सही कुकिंग टिप्स अपनाएं: घर का खाना बनेगा सच में हेल्दी और पोषण से भरपूर
सारांश
Key Takeaways
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 26 अप्रैल को सोशल मीडिया पर सही कुकिंग टिप्स साझा किए।
- सब्जियों को अधिक उबालने से उनके विटामिन और मिनरल नष्ट हो जाते हैं — हल्का स्टीम करना बेहतर है।
- एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से हानिकारक तत्व बनते हैं जो हृदय रोग का खतरा बढ़ाते हैं।
- चना, मूंग जैसी दालों को अंकुरित करके खाने से पोषण कई गुना बढ़ जाता है।
- साबुत फल जूस की तुलना में अधिक फाइबर और पोषण प्रदान करते हैं।
- ताजा पका खाना खाना सबसे बेहतर है — बासी या बार-बार गर्म किया खाना पोषण में कमजोर होता है।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। घर का खाना सेहत के लिए तभी फायदेमंद होता है जब उसे सही कुकिंग टिप्स के साथ तैयार किया जाए। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक अहम पोस्ट साझा करते हुए बताया कि केवल घर में खाना बनाना ही पर्याप्त नहीं है — बल्कि पकाने का सही तरीका अपनाना उतना ही जरूरी है। गलत तरीके से पकाया गया खाना न सिर्फ पोषण से रहित हो जाता है, बल्कि कई बार शरीर के लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।
सब्जियों का पोषण कैसे बचाएं
अक्सर घरों में सब्जियों को अधिक देर तक उबाला जाता है, जिससे उनमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सब्जियों को हल्का स्टीम करना या कम पानी में पकाना सबसे बेहतर विकल्प है। इससे उनका प्राकृतिक स्वाद भी बरकरार रहता है और पोषण भी बना रहता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि सब्जियों को अधिक गलाकर पकाने से बचना चाहिए। जितना कम समय सब्जियां आग पर रहती हैं, उतना ज्यादा पोषण शरीर को मिलता है।
तेल के सही इस्तेमाल का महत्व
खाना पकाने में तेल की मात्रा का सीधा असर सेहत पर पड़ता है। अत्यधिक तेल खाने को भारी और अनहेल्दी बना देता है। मंत्रालय की सलाह है कि हमेशा सीमित मात्रा में तेल का उपयोग करें और सबसे जरूरी — एक ही तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल करने से बचें। बार-बार गर्म किए गए तेल में हानिकारक ट्रांस फैट और अन्य विषाक्त तत्व उत्पन्न हो सकते हैं, जो हृदय रोग और अन्य बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
दालें, अनाज और अंकुरित आहार के फायदे
दालों और अनाज को पकाने से पहले कुछ घंटे भिगोना एक सरल लेकिन प्रभावी आदत है। इससे ये जल्दी पकते हैं और पाचन तंत्र पर भी कम दबाव पड़ता है। चना, मूंग और मसूर जैसी दालों को अंकुरित करके खाने से उनकी पोषण क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
पोषण विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अंकुरित आहार (स्प्राउट्स) में एंजाइम, विटामिन-C और प्रोटीन की मात्रा सामान्य से अधिक होती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है।
फल खाएं, जूस नहीं — फाइबर का महत्व
आजकल पैकेज्ड जूस और ताजे फलों के रस का चलन बढ़ा है, लेकिन साबुत फल खाना कहीं अधिक लाभदायक है। साबुत फलों में मौजूद प्राकृतिक फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। जूस बनाने की प्रक्रिया में यह फाइबर नष्ट हो जाता है।
मसालों का संतुलित उपयोग और ताजा खाना
अत्यधिक मसालों का उपयोग खाने को भारी बनाता है और पाचन पर बुरा असर डालता है। हल्के और संतुलित मसाले खाने को स्वादिष्ट बनाए रखते हैं और शरीर को नुकसान भी नहीं पहुंचाते। इसके अलावा, ताजा पका हुआ खाना खाना सबसे बेहतर विकल्प है। बासी या बार-बार गर्म किया हुआ खाना पोषण मूल्य में कमजोर होता है और कुछ मामलों में बैक्टीरिया के पनपने का खतरा भी रहता है।
गौरतलब है कि भारत में कुपोषण एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार देश में अभी भी बड़ी संख्या में बच्चे और महिलाएं पोषण की कमी से जूझ रहे हैं — और इसका एक बड़ा कारण गलत खाना पकाने की आदतें भी हैं। ऐसे में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की यह पहल जागरूकता फैलाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में मंत्रालय द्वारा स्वस्थ खान-पान को लेकर और भी जागरूकता अभियान चलाए जाने की उम्मीद है।