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बंगाल चुनाव दूसरा चरण: डरे मतदाताओं की मदद को केंद्रीय बल तैयार, 2,407 कंपनियाँ तैनात

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बंगाल चुनाव दूसरा चरण: डरे मतदाताओं की मदद को केंद्रीय बल तैयार, 2,407 कंपनियाँ तैनात

सारांश

पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण की वोटिंग से पहले चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है — 2,407 कंपनियाँ तैनात और डरे मतदाताओं के लिए विशेष SOS व्यवस्था। पहले चरण में हुई धमकी की शिकायतों के बाद यह सख्ती, खासकर डायमंड हार्बर जैसे संवेदनशील इलाकों में, बताती है कि आयोग इस बार बूथ के बाहर भी निगरानी रखने के मूड में है।

मुख्य बातें

चुनाव आयोग ने 28 अप्रैल 2026 को केंद्रीय बलों को डरे मतदाताओं को सुरक्षित बूथ तक पहुँचाने के निर्देश दिए।
दूसरे चरण में 2,407 कंपनियाँ तैनात — CAPF, IRB और अन्य राज्यों की सशस्त्र पुलिस शामिल।
23 अप्रैल के पहले चरण में बूथ के बाहर मतदाताओं को डराने की शिकायतें मिली थीं।
डायमंड हार्बर सब-डिवीजन (दक्षिण 24 परगना) पर विशेष नज़र, जहाँ चुनावी हिंसा का इतिहास रहा है।
मतदाता विशेष हेल्पलाइन या ईमेल से शिकायत कर सकेंगे; पहचान गोपनीय रहेगी।
CEO मनोज कुमार अग्रवाल ने मतदाताओं से निर्भय होकर वोट डालने की अपील की।

पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल के कार्यालय ने 28 अप्रैल 2026 को केंद्रीय बलों को निर्देश दिया है कि वे दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान डरे-सहमे मतदाताओं को सुरक्षित मतदान केंद्रों तक पहुँचाने के लिए तत्काल तैनात रहें। चुनाव आयोग का यह कदम 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान के दौरान कुछ वोटरों द्वारा डराए-धमकाए जाने की शिकायतों के बाद उठाया गया है।

पहले चरण से मिला सबक

CEO कार्यालय के एक अंदरूनी सूत्र के अनुसार, 23 अप्रैल को पहले चरण में पोलिंग बूथ के भीतर मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। हालाँकि, कई मतदाताओं ने शिकायत दर्ज कराई कि मतदान केंद्र तक जाते समय उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने दूसरे चरण के लिए विशेष व्यवस्था की है।

केंद्रीय बलों की विशेष तैनाती

चुनाव आयोग ने नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि केंद्रीय बलों की एक टुकड़ी हर समय तैयार रहे, ताकि शिकायत मिलते ही संबंधित इलाके में तुरंत पहुँचा जा सके। दूसरे चरण में कुल 2,407 कंपनियाँ तैनात की जाएँगी, जिनमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), इंडिया रिज़र्व बटालियन (IRB) और अन्य राज्यों की सशस्त्र पुलिस टुकड़ियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस के जवान भी तैनात रहेंगे।

डायमंड हार्बर पर विशेष नज़र

आयोग का विशेष ध्यान दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर सब-डिवीजन पर है, जहाँ चुनावी हिंसा का इतिहास रहा है। अंदरूनी सूत्र के अनुसार, इस बार आयोग का लक्ष्य केवल बूथ-स्तरीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाताओं को डराने-धमकाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करना है।

हेल्पलाइन और गोपनीयता की व्यवस्था

CEO कार्यालय के सूत्र ने बताया कि मतदान के दिन यदि कोई मतदाता डराए जाने की शिकायत करना चाहे, तो वह एक विशेष हेल्पलाइन नंबर या ईमेल के माध्यम से CEO के कार्यालय से संपर्क कर सकता है। शिकायत करने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। शिकायत मिलने पर केंद्रीय बलों की टुकड़ी उस क्षेत्र में तत्काल पहुँचेगी और मतदाता को सुरक्षित पोलिंग बूथ तक पहुँचाएगी।

CEO की मतदाताओं से अपील

पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने दूसरे चरण के मतदाताओं से अपील की है कि वे बिना किसी भय के मतदान करें। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि छिटपुट घटनाएँ। 2,407 कंपनियों की तैनाती प्रभावशाली संख्या है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि शिकायत मिलने पर प्रतिक्रिया कितनी तेज़ और निष्पक्ष रहती है। डायमंड हार्बर जैसे इलाकों में जहाँ राजनीतिक प्रभाव गहरा है, वहाँ केंद्रीय बलों की उपस्थिति तभी कारगर होगी जब स्थानीय प्रशासन सहयोगी हो। आयोग की गोपनीय शिकायत व्यवस्था सही दिशा में कदम है, लेकिन इसकी जानकारी ज़मीनी स्तर तक पहुँचाना ही इसकी सफलता की कुंजी होगी।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल दूसरे चरण की वोटिंग में केंद्रीय बलों की क्या भूमिका है?
चुनाव आयोग ने केंद्रीय बलों को निर्देश दिया है कि वे डरे-सहमे मतदाताओं को सुरक्षित पोलिंग बूथ तक पहुँचाएँ। शिकायत मिलने पर बलों की टुकड़ी तुरंत संबंधित इलाके में पहुँचेगी।
बंगाल दूसरे चरण में कुल कितनी सुरक्षा कंपनियाँ तैनात हैं?
दूसरे चरण में 2,407 कंपनियाँ तैनात की गई हैं, जिनमें CAPF, IRB और अन्य राज्यों की सशस्त्र पुलिस के साथ-साथ कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस भी शामिल हैं।
डायमंड हार्बर पर चुनाव आयोग का विशेष ध्यान क्यों है?
दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर सब-डिवीजन में चुनावी हिंसा का इतिहास रहा है। आयोग ने इस क्षेत्र में मतदाताओं को डराने-धमकाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।
अगर मतदाता को धमकी मिले तो वह शिकायत कैसे करे?
मतदाता विशेष हेल्पलाइन नंबर या ईमेल के माध्यम से CEO कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
पहले चरण में क्या हुआ था जिसके कारण यह व्यवस्था की गई?
23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग में बूथ के अंदर मतदान शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ मतदाताओं ने शिकायत की कि बूथ तक जाते समय उन्हें डराया-धमकाया गया। इन्हीं शिकायतों के आधार पर दूसरे चरण के लिए यह विशेष SOS व्यवस्था लागू की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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