इकबाल मिर्ची की मुंबई-दुबई संपत्तियाँ होंगी अटैच, PMLA कोर्ट ने ED को दी मंजूरी
सारांश
Key Takeaways
- PMLA विशेष अदालत ने 29 अप्रैल 2026 को ED को इकबाल मिर्ची परिवार की अतिरिक्त संपत्तियाँ अटैच करने की मंजूरी दी।
- मुंबई के वर्ली में रबिया मैन्शन, मरियम लॉज और सी व्यू — कुल 4,970.41 वर्ग मीटर — अटैचमेंट के दायरे में।
- दुबई स्थित होटल मिडवेस्ट अपार्टमेंट और 14 रियल एस्टेट यूनिट्स भी शामिल।
- मिर्ची ने 1986 में ये वर्ली संपत्तियाँ मात्र ₹6.5 लाख में खरीदी थीं; बाद में ट्रस्ट व फर्जी किरायेदारों के जरिए मालिकाना हक छिपाया गया।
- परिवार के सदस्य आसिफ, जुनैद और हाजरा इकबाल मेमन को फरवरी 2021 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है।
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिवंगत अंडरवर्ल्ड डॉन इकबाल मिर्ची (इकबाल मेमन) और उनके परिवार से जुड़ी अतिरिक्त संपत्तियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत अटैच करने की अनुमति दे दी है। बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को जारी इस आदेश में मुंबई के वर्ली स्थित तीन भूखंडों और दुबई के होटल व रियल एस्टेट यूनिट्स को अटैच करने का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
अदालत ने FEO अधिनियम की धारा 5(1) के तहत परिशिष्ट 'सी' में सूचीबद्ध संपत्तियों को अटैच करने की मंजूरी दी। साथ ही धारा 13 के तहत एक अतिरिक्त आवेदन दाखिल करने की भी अनुमति दी गई, ताकि जाँच के दौरान सामने आई नई संपत्तियों को भी इस कार्रवाई में शामिल किया जा सके। यह आवेदन मुंबई ED द्वारा दायर किया गया था।
किन संपत्तियों पर होगी कार्रवाई
अटैच की जाने वाली संपत्तियों में मुंबई के वर्ली इलाके में स्थित तीन प्रमुख भूखंड — रबिया मैन्शन, मरियम लॉज और सी व्यू — शामिल हैं, जो कुल मिलाकर लगभग 4,970.41 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले हैं। इसके अलावा दुबई में स्थित होटल मिडवेस्ट अपार्टमेंट और 14 रियल एस्टेट यूनिट्स भी इस कार्रवाई के दायरे में आएंगी।
ED का दावा और जाँच में खुलासे
ED का दावा है कि ये सभी संपत्तियाँ इकबाल मिर्ची द्वारा अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थीं और इन्हें मोहम्मद यूसुफ ट्रस्ट तथा परिवार के सदस्यों — आसिफ इकबाल मेमन, जुनैद इकबाल मेमन और हाजरा इकबाल मेमन — के जरिए छिपाने की कोशिश की गई। जाँच में यह भी सामने आया कि मिर्ची ने 1986 में अपनी कंपनी के माध्यम से वर्ली की संपत्तियाँ मात्र ₹6.5 लाख में खरीदी थीं और बाद में ट्रस्ट व फर्जी किरायेदारों के जरिए असली मालिकाना हक छिपाने का प्रयास किया गया।
भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषणा का संदर्भ
एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपियों को फरवरी 2021 में ही भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है और उनकी भारत व विदेश की संपत्तियों को जब्त करने के निर्देश पहले से जारी हैं। गौरतलब है कि यह मामला पहले से चल रही PMLA कार्रवाई का हिस्सा है और नई संपत्तियाँ आगे की जाँच के दौरान सामने आई हैं।
आगे क्या होगा
अदालत ने ED की अर्जी स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए संपत्तियों को अटैच किया जा सकता है। यह मामला भारत में अंडरवर्ल्ड से जुड़ी संपत्तियों पर सबसे बड़ी कानूनी कार्रवाइयों में से एक बनता जा रहा है, और आने वाले समय में और संपत्तियाँ जाँच के दायरे में आ सकती हैं।