अरुणाचल प्रदेश में असम राइफल्स का बड़ा ऑपरेशन: एनएससीएन (खांगो) उग्रवादी और ओवरग्राउंड वर्कर गिरफ्तार

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अरुणाचल प्रदेश में असम राइफल्स का बड़ा ऑपरेशन: एनएससीएन (खांगो) उग्रवादी और ओवरग्राउंड वर्कर गिरफ्तार

सारांश

असम राइफल्स ने अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग में एनएससीएन (खांगो) के हथियारबंद उग्रवादी और ओवरग्राउंड वर्कर को दबोचा। जांच में जबरन वसूली, युवाओं की भर्ती और गुटों के बीच आपसी खींचतान का खुलासा हुआ। ऊपरी असम में भी 'रेड शील्ड गनर्स' ने उल्फा (आई) के कैडर को पकड़ा।

Key Takeaways

असम राइफल्स ने 29 अप्रैल 2026 को चांगलांग ज़िले के रीमा-पुटोक इलाके में खुफिया अभियान चलाया। एनएससीएन (खांगो) उग्रवादी कामनोंग पांगथा और ओवरग्राउंड वर्कर गोपांग नेगिमु गिरफ्तार। दोनों पर जबरन वसूली और स्थानीय युवाओं की उग्रवादी भर्ती का आरोप। ओवरग्राउंड वर्कर एनएससीएन (खांगो) सदस्यों को एनएससीएन (अंगमाई) में शामिल कराने की कोशिश में था। अप्रैल 2026 में 'रेड शील्ड गनर्स' और असम पुलिस ने तिनसुकिया, चराइदेव, शिवसागर में संयुक्त अभियान में उल्फा (आई) कैडर को भी पकड़ा।

असम राइफल्स ने 29 अप्रैल 2026 को अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग ज़िले के रीमा-पुटोक इलाके में एक सुनियोजित खुफिया अभियान के तहत एनएससीएन (खांगो) से जुड़े हथियारबंद नागा उग्रवादी कामनोंग पांगथा और ओवरग्राउंड वर्कर गोपांग नेगिमु को गिरफ्तार किया। रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता के अनुसार, यह अभियान विश्वसनीय खुफिया जानकारी और अंदरूनी सूत्रों से मिली पुष्टि के आधार पर चलाया गया।

अभियान का विवरण

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि चांगलांग और जयरामपुर इलाकों में सक्रिय इन दोनों व्यक्तियों के बारे में खास खुफिया इनपुट मिले थे, जिनकी अंदरूनी सूत्रों से पुष्टि के बाद असम राइफल्स ने यह सुनियोजित कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद दोनों को उनके सामान सहित आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया।

प्रारंभिक जांच में खुलासे

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि कामनोंग पांगथा और गोपांग नेगिमु दोनों जबरन वसूली की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे और स्थानीय युवाओं को उग्रवादी संगठनों में भर्ती कराने में इनकी अहम भूमिका थी। जांच में यह भी पता चला कि ओवरग्राउंड वर्कर गोपांग नेगिमु रीमा-पुटोक इलाके में एनएससीएन (खांगो) गुट के सदस्यों को एनएससीएन (अंगमाई) गुट में शामिल कराने की कोशिश कर रहा था।

उग्रवादी गुटों में आपसी गुटबाजी उजागर

अधिकारियों के अनुसार, इस प्रयास का मकसद रीमा-पुटोक इलाके में एनएससीएन (अंगमाई) गुट की सदस्य संख्या और प्रभाव को बढ़ाना था। यह घटनाक्रम उग्रवादी संगठनों के बीच चल रही आपसी गुटबाजी को स्पष्ट रूप से उजागर करता है, जो सुरक्षा बलों के लिए एक महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी है। गौरतलब है कि नागा उग्रवादी संगठनों में यह आंतरिक विभाजन पूर्वोत्तर भारत में शांति प्रक्रिया को जटिल बनाता रहा है।

ऊपरी असम में 'रेड शील्ड गनर्स' के संयुक्त अभियान

एक अन्य घटनाक्रम में, अप्रैल 2026 के दौरान भारतीय सेना के 'रेड शील्ड गनर्स' ने 'स्पीयर कोर' के नेतृत्व में और असम पुलिस के सहयोग से खुफिया जानकारी पर आधारित कई संयुक्त अभियान चलाए। ये अभियान ऊपरी (पूर्वी) असम के तिनसुकिया, चराइदेव और शिवसागर ज़िलों में चलाए गए, जिनमें उल्फा (आई) के एक कैडर को भी गिरफ्तार किया गया।

सुरक्षा बलों की सतर्कता का संदेश

रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि असम राइफल्स इस क्षेत्र में सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए किस स्तर की सतर्कता और सक्रियता बनाए हुए है। पूर्वोत्तर भारत में उग्रवादी गतिविधियों और उनके सहायक नेटवर्क को निष्क्रिय करने की दिशा में सुरक्षा बलों के ये ताज़ा अभियान आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

Point of View

जहाँ एनएससीएन के गुट अब एक-दूसरे के सदस्यों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। यह आंतरिक प्रतिस्पर्धा सुरक्षा बलों के लिए खुफिया अवसर तो पैदा करती है, लेकिन साथ ही नए और अप्रत्याशित गठजोड़ का खतरा भी लाती है। उल्लेखनीय है कि नागा शांति वार्ता वर्षों से लंबित है और इस बीच जमीनी स्तर पर उग्रवादी ढाँचा पुनर्गठित होता दिख रहा है। बिना राजनीतिक समाधान के केवल गिरफ्तारियों पर निर्भरता एक दीर्घकालिक रणनीति नहीं हो सकती।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

असम राइफल्स ने अरुणाचल में किसे गिरफ्तार किया?
असम राइफल्स ने 29 अप्रैल 2026 को चांगलांग ज़िले के रीमा-पुटोक इलाके में एनएससीएन (खांगो) के हथियारबंद उग्रवादी कामनोंग पांगथा और ओवरग्राउंड वर्कर गोपांग नेगिमु को गिरफ्तार किया। दोनों को आगे की जांच के लिए स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
एनएससीएन (खांगो) और एनएससीएन (अंगमाई) में क्या अंतर है?
एनएससीएन (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड) के कई गुट हैं जो आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं। इस मामले में ओवरग्राउंड वर्कर खांगो गुट के सदस्यों को अंगमाई गुट में शामिल कराने की कोशिश कर रहा था, जो इन संगठनों के बीच चल रही गुटबाजी को दर्शाता है।
ओवरग्राउंड वर्कर कौन होता है?
ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) वह व्यक्ति होता है जो उग्रवादी संगठनों के लिए जमीनी स्तर पर काम करता है — जैसे जबरन वसूली, भर्ती और लॉजिस्टिक सहायता — लेकिन खुद हथियार नहीं उठाता। इस मामले में गोपांग नेगिमु पर चांगलांग और जयरामपुर में ऐसी ही गतिविधियाँ चलाने का आरोप है।
ऊपरी असम में 'रेड शील्ड गनर्स' ने क्या किया?
अप्रैल 2026 में भारतीय सेना के 'रेड शील्ड गनर्स' ने 'स्पीयर कोर' के नेतृत्व में असम पुलिस के साथ मिलकर तिनसुकिया, चराइदेव और शिवसागर ज़िलों में संयुक्त अभियान चलाए, जिनमें उल्फा (आई) के एक कैडर को गिरफ्तार किया गया।
अरुणाचल प्रदेश में उग्रवाद की स्थिति क्या है?
अरुणाचल प्रदेश, विशेषकर चांगलांग ज़िला, नागा और अन्य उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों से प्रभावित रहा है। सुरक्षा बल नियमित रूप से खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान चलाते हैं और इस क्षेत्र में जबरन वसूली व भर्ती नेटवर्क को निष्क्रिय करने के प्रयास जारी हैं।
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