आरबीआई का बड़ा फैसला: डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड पर कड़े नियम, ग्राहकों को मिलेगी मजबूत सुरक्षा
सारांश
Key Takeaways
- आरबीआई ने 25 अप्रैल 2026 को डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड के लिए मसौदा 'मास्टर निर्देश' जारी किया।
- गैर-बैंकिंग पीपीआई जारीकर्ताओं के लिए न्यूनतम नेट-वर्थ ₹5 करोड़ और तीसरे वित्तीय वर्ष तक ₹15 करोड़ करना अनिवार्य।
- ग्राहकों की जमा राशि रुपया एस्क्रो खाते में किसी वाणिज्यिक बैंक में सुरक्षित रखनी होगी।
- सामान्य पीपीआई में अधिकतम ₹2 लाख जमा सीमा; ट्रांजिट पीपीआई में ₹3,000 की सीमा प्रस्तावित।
- लेन-देन विफल होने पर तत्काल रिफंड अनिवार्य; जानकारी हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में देनी होगी।
- मसौदे पर सुझाव देने की अंतिम तारीख 22 मई, 2026 है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल वॉलेट, प्रीपेड कार्ड और अन्य प्रीपेड भुगतान उपकरणों (पीपीआई) के लिए एक व्यापक मसौदा 'मास्टर निर्देश' जारी किया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान क्षेत्र में ग्राहक सुरक्षा, परिचालन पारदर्शिता और वित्तीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाना है। केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे पर 22 मई, 2026 तक आम नागरिकों और हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।
पीपीआई जारी करने की नई शर्तें और नेट-वर्थ सीमा
आरबीआई के मसौदे के अनुसार, डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंक, भुगतान एवं निपटान प्रणाली विभाग (डीपीएसएस) को सूचित करने के पश्चात प्रीपेड भुगतान उपकरण जारी कर सकेंगे। यह प्रावधान बैंकों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाता है।
गैर-बैंकिंग संस्थाओं के लिए नियम अधिक कठोर प्रस्तावित किए गए हैं। ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी गैर-बैंकिंग आवेदक की न्यूनतम नेट-वर्थ ₹5 करोड़ होनी चाहिए और उसे अपने वैधानिक ऑडिटर से प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना होगा। इतना ही नहीं, अनुमति मिलने के तीसरे वित्तीय वर्ष के अंत तक यह नेट-वर्थ बढ़ाकर ₹15 करोड़ करनी होगी।
एस्क्रो खाते में रखनी होगी ग्राहकों की जमा राशि
ग्राहकों के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मसौदे में यह अनिवार्य किया गया है कि गैर-बैंकिंग पीपीआई जारीकर्ता ग्राहकों से प्राप्त जमा राशि को एक अलग 'रुपया एस्क्रो खाते' में रखें। यह खाता भारत के किसी मान्यता प्राप्त वाणिज्यिक बैंक में खोला जाना अनिवार्य होगा। यह कदम फिनटेक कंपनियों के दिवालिया होने की स्थिति में ग्राहकों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है।
लेन-देन और भंडारण की प्रस्तावित सीमाएं
मसौदे में विभिन्न श्रेणियों के पीपीआई के लिए अलग-अलग वित्तीय सीमाएं निर्धारित की गई हैं। सामान्य उपयोग वाले पीपीआई में अधिकतम ₹2 लाख तक की राशि रखी जा सकती है, जबकि प्रति माह ₹10,000 तक नकद जमा करने की सीमा प्रस्तावित है।
सीमित उपयोग वाले पीपीआई की अधिकतम सीमा ₹10,000 और ट्रांजिट पीपीआई (परिवहन संबंधी) की सीमा ₹3,000 तक रखने का प्रस्ताव है। विदेशी मुद्रा से जुड़े पीपीआई में किसी भी माह ₹5 लाख से अधिक की निकासी पर रोक लगाने का प्रावधान भी शामिल है।
ग्राहकों को पारदर्शी जानकारी देना अनिवार्य
आरबीआई के इस मसौदे में पीपीआई जारीकर्ताओं के लिए यह भी अनिवार्य किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को पीपीआई की समस्त विशेषताओं, शुल्कों, वैधता अवधि और नियम-शर्तों की जानकारी सरल भाषा में दें। यह जानकारी अंग्रेजी, हिंदी और संबंधित स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा, लेन-देन विफल होने, राशि वापसी, रद्दीकरण या अस्वीकृति की स्थिति में संबंधित पीपीआई खाते में तत्काल रिफंड सुनिश्चित करना होगा — भले ही इससे उस श्रेणी की निर्धारित सीमा अस्थायी रूप से पार हो जाए।
डिजिटल भुगतान क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव
गौरतलब है कि भारत में यूपीआई, मोबाइल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड का उपयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल भुगतान लेन-देन अरबों की संख्या को पार कर चुके हैं। ऐसे में पीपीआई क्षेत्र में स्पष्ट नियामक ढांचे की मांग लंबे समय से उठती रही है।
यह प्रस्ताव उन फिनटेक कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है जो कम पूंजी के साथ डिजिटल वॉलेट सेवाएं संचालित कर रही हैं। वहीं, बड़े और स्थापित खिलाड़ियों के लिए यह बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर हो सकता है। 22 मई, 2026 तक प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, जो भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य को नया रूप देंगे।