आरबीआई ने वित्तीय सुरक्षा को मजबूती देने के लिए अप्रैल से टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य किया

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आरबीआई ने वित्तीय सुरक्षा को मजबूती देने के लिए अप्रैल से टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य किया

सारांश

आरबीआई ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 1 अप्रैल 2026 से टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य किया है। इससे यूपीआई और कार्ड भुगतान की सुरक्षा बढ़ेगी। यह कदम ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए लिया गया है।

मुख्य बातें

आरबीआई ने **टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन** को अनिवार्य किया है।
भुगतान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
ओटीपी के साथ दो स्तरों की वेरिफिकेशन आवश्यक होगी।
बैंकों को धोखाधड़ी के मामलों में जवाबदेही का सामना करना होगा।
इन नियमों का पूर्ण कार्यान्वयन **अक्टूबर 2026** तक होगा।

नई दिल्ली, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक अप्रैल, 2026 से टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इससे यूपीआई और कार्ड से भुगतान करना पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो जाएगा।

केंद्रीय बैंक ने सभी डिजिटल भुगतान प्रणालियों जैसे यूपीआई, डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स और मोबाइल वॉलेट्स के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य किया है।

इसका तात्पर्य यह है कि अब लेन-देन को पूरा करने के लिए केवल ओटीपी ही पर्याप्त नहीं होगा। उपयोगकर्ताओं को अब ओटीपी के साथ-साथ कम से कम दो स्तरों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा, जैसे कि पिन, पासवर्ड, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण या टोकन

यह कदम बढ़ती हुई ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों के मद्देनजर उठाया गया है, जिनमें फिशिंग और सिम स्वैप घोटाले शामिल हैं, जहां ओटीपी-आधारित प्रणाली असुरक्षित साबित हुई है।

सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़कर, आरबीआई का उद्देश्य अनधिकृत लेन-देन की संभावना को कम करना और डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर विश्वास बढ़ाना है।

इस बदलाव के कारण खासकर नए उपकरणों पर या उच्च मूल्य के लेन-देन के लिए भुगतान पूरा होने में थोड़ी अधिक समय लग सकता है।

हालांकि, विश्वसनीय उपकरणों पर नियमित लेन-देन अपेक्षाकृत सुचारू रहने की उम्मीद है।

यह प्रणाली जोखिम-आधारित दृष्टिकोण भी अपनाएगी, जहां सुरक्षा जांच का स्तर लेन-देन की प्रकृति और व्यवहार के आधार पर निर्धारित होगा।

नए नियमों का एक और महत्वपूर्ण पहलू बैंकों और भुगतान प्लेटफार्मों के लिए बढ़ी हुई जवाबदेही है।

यदि उनके सिस्टम में किसी खराबी के कारण कोई धोखाधड़ी होती है, तो वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों को मुआवजा देना पड़ सकता है।

इससे शिकायतों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित होने और बैंकों को अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रेरित होने की उम्मीद है।

आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि इसी तरह के प्रमाणीकरण मानदंड सीमा पार कार्ड भुगतान सहित अंतरराष्ट्रीय लेनदेन पर भी लागू होंगे।

इन नियमों का पूर्ण कार्यान्वयन अक्टूबर 2026 तक होने की उम्मीद है।

भारत में डिजिटल भुगतान में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए, केंद्रीय बैंक का यह नया कदम सुविधा और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अतिरिक्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया भले ही थोड़ी असुविधाजनक लगे, लेकिन इससे धोखाधड़ी का खतरा काफी हद तक कम होने की उम्मीद है और लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए दैनिक लेन-देन अधिक सुरक्षित हो जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उपयोगकर्ताओं के बीच डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर विश्वास भी बढ़ाएगा।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन क्या है?
यह एक सुरक्षा प्रक्रिया है जिसमें लेन-देन को पूरा करने के लिए दो स्तरों की प्रमाणीकरण आवश्यक होती है, जैसे कि ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण।
ये नियम कब से लागू होंगे?
ये नियम **एक अप्रैल 2026** से लागू होंगे।
क्या ये बदलाव सभी उपयोगकर्ताओं पर लागू होंगे?
हाँ, ये नियम सभी डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर लागू होंगे, जिसमें यूपीआई, डेबिट और क्रेडिट कार्ड शामिल हैं।
क्या इससे भुगतान करने में अधिक समय लगेगा?
हां, नए उपकरणों पर या उच्च मूल्य के लेन-देन के लिए भुगतान पूरा होने में थोड़ी अधिक समय लग सकता है।
क्या बैंकों को भी जवाबदेही का सामना करना पड़ेगा?
जी हां, यदि बैंकों के सिस्टम में कोई खामी होती है, तो उन्हें ग्राहकों को मुआवजा देना पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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