यूपीआई ट्रांजैक्शन में एक दशक में 12,000 गुना उछाल, FY2025-26 में 24,162 करोड़ लेनदेन : वित्त मंत्रालय

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यूपीआई ट्रांजैक्शन में एक दशक में 12,000 गुना उछाल, FY2025-26 में 24,162 करोड़ लेनदेन : वित्त मंत्रालय

सारांश

एक दशक पहले जो प्लेटफॉर्म 2 करोड़ ट्रांजैक्शन से शुरू हुआ था, वह अब सालाना 24,162 करोड़ लेनदेन प्रोसेस कर रहा है। IMF की मान्यता और 703 बैंकों की भागीदारी के साथ, यूपीआई अब सिर्फ भारत की नहीं — दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट प्रणाली है।

Key Takeaways

वित्त मंत्रालय ने 30 अप्रैल 2026 को बताया कि यूपीआई ट्रांजैक्शन में एक दशक में 12,000 गुना वृद्धि हुई है। FY2016-17 में 2 करोड़ से बढ़कर FY2025-26 में 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज हुए। ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर ₹314 लाख करोड़ — 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी। दिसंबर 2025 में 2,163 करोड़ मासिक ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड; CY2025 में प्रतिदिन औसतन 60 करोड़ ट्रांजैक्शन। नेटवर्क पर सक्रिय बैंकों की संख्या 44 से बढ़कर 703 हुई। IMF ने यूपीआई को वॉल्यूम के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट प्रणाली माना।

वित्त मंत्रालय ने 30 अप्रैल 2026 को बताया कि भारत के डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने पिछले एक दशक में लेनदेन की मात्रा में लगभग 12,000 गुना की असाधारण वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2016-17 में मात्र 2 करोड़ ट्रांजैक्शन से शुरू हुई यह यात्रा वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन तक पहुँच गई है, जो भारत के डिजिटल वित्तीय ढाँचे की परिपक्वता का प्रमाण है।

यूपीआई की स्थापना और विकास की पृष्ठभूमि

11 अप्रैल 2016 को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की नियामकीय देखरेख में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा लॉन्च किया गया यूपीआई आज भारत के डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुका है। गौरतलब है कि यह वही दौर था जब देश में डिजिटल भुगतान की अवसंरचना अभी प्रारंभिक अवस्था में थी और नकदी-आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भरता बेहद अधिक थी।

मूल्य के लिहाज़ से भी यूपीआई की प्रगति उतनी ही उल्लेखनीय रही है। ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू पहले परिचालन वर्ष में 0.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग ₹314 लाख करोड़ हो गई — यह 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी है।

मात्रा और मूल्य में दोहरा विस्तार

वित्त मंत्रालय के अनुसार, वॉल्यूम और वैल्यू दोनों में यह दोहरा विस्तार दर्शाता है कि यूपीआई अब केवल छोटे खुदरा भुगतानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अधिक मूल्य वाले ट्रांजैक्शन के लिए भी एक अनिवार्य माध्यम बनता जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल भुगतान को लेकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने यूपीआई को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट प्रणाली के रूप में मान्यता दी है। सरकारी आकलन के मुताबिक, यूपीआई के पैमाने, इंटरऑपरेबिलिटी और विश्वसनीयता ने भारत को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया है।

2025 में ऐतिहासिक मील का पत्थर

वर्ष 2025 यूपीआई के विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जब पहली बार मासिक ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 2,000 करोड़ के आँकड़े को पार कर गया। अगस्त 2025 में ट्रांजैक्शन 2,001 करोड़ तक पहुँचे, और यह गति पूरे वर्ष बनी रही। दिसंबर 2025 में 2,163 करोड़ ट्रांजैक्शन का नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया।

कुल मिलाकर, कैलेंडर वर्ष 2025 में यूपीआई ने लगभग 22,000 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिनका औसत प्रतिदिन लगभग 60 करोड़ ट्रांजैक्शन रहा।

संस्थागत भागीदारी में व्यापक विस्तार

यूपीआई नेटवर्क पर सक्रिय बैंकों की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में 44 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 703 हो गई है। इनमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और सहकारी बैंक शामिल हैं। इस व्यापक भागीदारी से प्लेटफॉर्म की भौगोलिक पहुँच और सुलभता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

लेनदेन के पैटर्न और उपयोगकर्ता व्यवहार

डेटा के रुझान लेनदेन के उपयोग में स्पष्ट अंतर दर्शाते हैं। कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत है, जिसकी मुख्य वजह अधिक बारंबारता वाले, कम मूल्य के खुदरा भुगतान हैं। इनमें से 86 प्रतिशत लेनदेन ₹500 से कम के हैं।

दूसरी ओर, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) लेनदेन कुल ट्रांजैक्शन मूल्य में 71 प्रतिशत योगदान देते हैं। P2P भुगतानों में 59 प्रतिशत लेनदेन ₹500 से कम के हैं, जबकि 41 प्रतिशत इस सीमा से अधिक के हैं — जो यह संकेत देता है कि बड़े मूल्य के व्यक्तिगत हस्तांतरण में भी यूपीआई की स्वीकार्यता बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यूपीआई के अंतर्राष्ट्रीय विस्तार और नए उपयोग मामलों के साथ यह वृद्धि और तेज़ होने की संभावना है।

Point of View

000 गुना वृद्धि निर्विवाद रूप से प्रभावशाली है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है — जब वॉल्यूम की चमक के पीछे गहरे सवाल छुपे हैं। P2M लेनदेन में 86 प्रतिशत भुगतान ₹500 से कम के हैं, जो दर्शाता है कि उच्च-मूल्य वाणिज्यिक उपयोग अभी भी सीमित है। इसके अलावा, शून्य MDR नीति के कारण NPCI और बैंकों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है, जिसका दीर्घकालिक समाधान अभी तय नहीं हुआ है। IMF की मान्यता गर्व की बात है, पर डिजिटल समावेश की वास्तविक गहराई — विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में — अभी भी एक अनुत्तरित प्रश्न बनी हुई है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

यूपीआई ट्रांजैक्शन में 12,000 गुना वृद्धि का क्या मतलब है?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या FY2016-17 में 2 करोड़ से बढ़कर FY2025-26 में 24,162 करोड़ से अधिक हो गई है, जो लगभग 12,000 गुना वृद्धि दर्शाती है। यह भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र की तेज़ी से बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत है।
यूपीआई को किसने और कब लॉन्च किया था?
यूपीआई को 11 अप्रैल 2016 को NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) ने RBI की नियामकीय देखरेख में लॉन्च किया था। शुरुआत में केवल 44 बैंक इस नेटवर्क से जुड़े थे, जो अब बढ़कर 703 हो गए हैं।
IMF ने यूपीआई के बारे में क्या कहा है?
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने यूपीआई को ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट प्रणाली के रूप में मान्यता दी है। इससे वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की स्थिति और मज़बूत हुई है।
यूपीआई पर सबसे अधिक किस प्रकार के लेनदेन होते हैं?
कुल वॉल्यूम में P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) लेनदेन की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत है, जिनमें से 86 प्रतिशत ₹500 से कम के हैं। वहीं, कुल मूल्य में P2P (पर्सन-टू-पर्सन) लेनदेन का योगदान 71 प्रतिशत है।
2025 में यूपीआई ने कौन-सा ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया?
अगस्त 2025 में पहली बार मासिक ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 2,000 करोड़ को पार कर 2,001 करोड़ पहुँचा। दिसंबर 2025 में यह रिकॉर्ड 2,163 करोड़ तक पहुँच गया, और पूरे CY2025 में औसतन प्रतिदिन 60 करोड़ ट्रांजैक्शन दर्ज हुए।
Nation Press