त्रिपुरा CM माणिक साहा बोले: विपक्ष की आदत प्रगति रोकना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम का किया समर्थन

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त्रिपुरा CM माणिक साहा बोले: विपक्ष की आदत प्रगति रोकना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम का किया समर्थन

सारांश

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विधानसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का खुलकर समर्थन किया और विपक्ष पर बार-बार प्रगति रोकने का आरोप लगाया। 33% महिला आरक्षण के इस विधेयक पर सदन में व्यापक चर्चा हुई, जो परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े सवालों के बीच राजनीतिक रूप से अहम है।

Key Takeaways

त्रिपुरा CM माणिक साहा ने 1 मई 2026 को विधानसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया। मुख्य सचेतक कल्याणी साहा रॉय ने 131वाँ संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है। साहा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बार-बार महत्वपूर्ण विधेयकों में बाधा डालता है और जनता को बाँटने की कोशिश करता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर होगा और दक्षिणी या पूर्वोत्तर राज्यों की सीटें कम नहीं होंगी। सदन में लगभग सभी सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया और विधेयक को व्यापक समर्थन मिलने के संकेत हैं।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 1 मई 2026 को अगरतला में राज्य विधानसभा में महिला आरक्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उसकी आदत बन गई है कि वह संसद में पेश होने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध करता है और जनता को बाँटने की कोशिश करता है।

विधानसभा में प्रस्ताव और चर्चा

राज्य विधानसभा में मुख्य सचेतक कल्याणी साहा रॉय ने '131वाँ संविधान संशोधन विधेयक' — जिसे 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के नाम से भी जाना जाता है — नामक एक प्रस्ताव पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री साहा ने कहा कि सदन में इस विषय पर रचनात्मक और विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें लगभग सभी सदस्यों ने भाग लिया।

मुख्यमंत्री का समर्थन और आह्वान

मुख्यमंत्री ने कहा,

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि परिसीमन की समयसीमा अभी भी अनिश्चित है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पारित हो चुका है, परंतु इसका क्रियान्वयन परिसीमन पर टिका है — जो कब होगा, इसकी कोई स्पष्ट तारीख नहीं है। विपक्ष पर 'बाधा डालने' का आरोप राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन यह तथ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के पास पर्याप्त बहुमत होने के बावजूद क्रियान्वयन की राह अभी लंबी है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे 131वाँ संविधान संशोधन विधेयक भी कहा जाता है, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। यह 2023 में संसद में पारित हुआ था, लेकिन इसका क्रियान्वयन परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।
त्रिपुरा विधानसभा में यह प्रस्ताव क्यों पेश किया गया?
मुख्य सचेतक कल्याणी साहा रॉय ने केंद्रीय महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में यह प्रस्ताव पेश किया। इसका उद्देश्य राज्य स्तर पर केंद्र की नीति को समर्थन देना और महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाना है।
परिसीमन का महिला आरक्षण से क्या संबंध है?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम तभी लागू होगा जब अगली परिसीमन प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। मुख्यमंत्री साहा ने स्पष्ट किया कि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर होगा और इससे दक्षिणी या पूर्वोत्तर राज्यों की सीटें कम नहीं होंगी।
CM माणिक साहा ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
साहा ने कहा कि विपक्ष की आदत बन गई है कि वह संसद में पेश होने वाले विधेयकों का विरोध करता है और जनता को गुमराह करने की कोशिश करता है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक के पिछले संस्करणों में हुई देरी का उदाहरण दिया।
इस प्रस्ताव से त्रिपुरा की महिलाओं को क्या फायदा होगा?
यदि नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होता है, तो त्रिपुरा विधानसभा की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे राज्य की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
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