30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

त्रिपुरा विधानसभा ने महिला आरक्षण विधेयक पुनः लाने की मांग की, ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
त्रिपुरा विधानसभा ने महिला आरक्षण विधेयक पुनः लाने की मांग की, ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित

सारांश

त्रिपुरा विधानसभा ने सात घंटे की तीखी बहस के बाद केंद्र से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पुनः लाने की माँग वाला प्रस्ताव पारित किया। BJP और सहयोगियों ने समर्थन किया, माकपा-कांग्रेस ने विरोध। 17 अप्रैल को लोकसभा में विफल हुए 131वें संशोधन विधेयक के बाद यह राजनीतिक दबाव की अगली कड़ी है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा विधानसभा ने 30 अप्रैल 2026 को ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर केंद्र से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पुनः लाने की माँग की।
प्रस्ताव में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन तुरंत शुरू करने और लोकसभा व विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण लागू करने का आग्रह।
BJP , टिपरा मोथा और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने समर्थन किया; माकपा और कांग्रेस ने विरोध।
संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका था।
BJP ने विपक्ष को घेरने के लिए देशभर में 'जन आक्रोश पदयात्रा' शुरू की है।

त्रिपुरा विधानसभा ने गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को सात घंटे की तीखी बहस के बाद केंद्र सरकार से नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान 131वाँ संशोधन विधेयक) को पुनः लाने की माँग वाला प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह प्रस्ताव लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए कुल सीटों में एक-तिहाई (33%) आरक्षण लागू करने का आग्रह करता है।

प्रस्ताव की मुख्य बातें

सरकार के मुख्य सचेतक कल्याणी साहा रॉय द्वारा पेश इस प्रस्ताव को सत्तापक्ष के 16 अन्य विधायकों का समर्थन मिला। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों टिपरा मोथा पार्टी तथा इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। कुल 25 मंत्रियों और विधायकों ने चर्चा में भाग लिया।

प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया कि यह सदन केंद्र सरकार से आग्रह करता है कि वह 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया तुरंत शुरू करे और संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक में संशोधन के लिए नए सिरे से प्रयास करे।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विपक्षी दलों पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने पहले भी राम मंदिर निर्माण, ट्रिपल तलाक कानून, जीएसटी और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अहम फैसलों का विरोध किया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने इन्हें सफलतापूर्वक लागू किया।

साहा ने कहा, ''विपक्षी दल महिला आरक्षण विधेयक को लेकर गलत नैरेटिव बनाकर भ्रम फैला रहे हैं। महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ यह आरक्षण हर क्षेत्र में लैंगिक भेदभाव खत्म करने में मदद करेगा।'' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1996, 1998 और 2010 में महिला आरक्षण कानून लाने के प्रयास विफल रहे थे, जबकि मोदी सरकार ने 2023 में यह विधेयक पारित कराया। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक फेसबुक पोस्ट में 17 अप्रैल को 'भारतीय लोकतंत्र का काला दिन' बताया।

विपक्ष का पक्ष

विपक्ष के नेता और माकपा के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने सरकार के दावों का खंडन किया। उन्होंने कहा, ''2023 में सभी विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया था, लेकिन इस बार भाजपा सरकार ने 131वाँ संशोधन विधेयक अपने राजनीतिक हितों के लिए आगे बढ़ाने की कोशिश की।'' विपक्षी सदस्यों ने यह भी तर्क दिया कि उनकी पार्टियों की सरकारों ने कई राज्यों में स्थानीय निकायों में महिलाओं को पहले ही 50 प्रतिशत आरक्षण दे रखा है।

संसदीय कार्य मंत्री रतन लाल नाथ ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रस्तावित आरक्षण का विरोध करने के लिए महिलाएँ विपक्षी नेताओं को माफ नहीं करेंगी।

पृष्ठभूमि: 17 अप्रैल की विफलता

गौरतलब है कि संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य 2029 तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है, किंतु यह विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। जितेंद्र चौधरी के अनुसार, सरकार ने इस विधेयक को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा, जिसे विपक्ष ने राजनीतिक चाल बताया।

आगे क्या होगा

संसद में इस घटनाक्रम के बाद BJP ने देश के विभिन्न हिस्सों में 'जन आक्रोश पदयात्रा' शुरू की है, जिसके ज़रिए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), समाजवादी पार्टी और वाम दलों को महिला आरक्षण विधेयक के विरोध पर घेरा जा रहा है। त्रिपुरा विधानसभा का यह प्रस्ताव उस राष्ट्रीय दबाव का हिस्सा है जो BJP केंद्र पर बनाने की कोशिश कर रही है — हालाँकि असली परीक्षा संसद के अगले सत्र में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और BJP उसे भली-भाँति जानती है। असली सवाल यह है कि 17 अप्रैल को लोकसभा में विफल हुए उसी विधेयक को BJP अब राज्य विधानसभाओं के प्रस्तावों के ज़रिए जनमत की अदालत में क्यों ले जा रही है। विपक्ष का तर्क — कि 2023 में उन्होंने समर्थन किया था, लेकिन 2026 का 131वाँ संशोधन परिसीमन से जोड़कर आरक्षण को अनिश्चितकाल के लिए टालने की चाल है — इसे महज़ 'महिला-विरोधी' बनाम 'महिला-समर्थक' की लड़ाई तक सीमित नहीं रहने देता। मुख्यधारा की कवरेज इस संरचनात्मक पेच को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है: परिसीमन की शर्त हटाए बिना 33% आरक्षण 2029 में भी लागू नहीं होगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा विधानसभा ने कौन-सा प्रस्ताव पारित किया है?
त्रिपुरा विधानसभा ने 30 अप्रैल 2026 को ध्वनिमत से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान 131वाँ संशोधन विधेयक) को पुनः लाने और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन तुरंत शुरू करने का आग्रह किया गया है। प्रस्ताव का लक्ष्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण दिलाना है।
131वाँ संशोधन विधेयक लोकसभा में क्यों पारित नहीं हुआ?
संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026, जो 2029 तक महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान करता है, 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विधेयक को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर आरक्षण को अनिश्चितकाल के लिए टाला जा रहा है।
माकपा और कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
माकपा के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी के अनुसार, 2023 में विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया था, लेकिन 2026 का 131वाँ संशोधन विधेयक भाजपा के राजनीतिक हितों के लिए लाया गया। विपक्षी दलों ने यह भी बताया कि उनकी सरकारों ने कई राज्यों में स्थानीय निकायों में महिलाओं को पहले ही 50% आरक्षण दे रखा है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है और इसका इतिहास क्या है?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का कानून है, जिसे मोदी सरकार ने 2023 में पारित कराया था। इससे पहले 1996, 1998 और 2010 में इसे लाने के प्रयास विफल रहे थे।
BJP की 'जन आक्रोश पदयात्रा' क्या है?
17 अप्रैल को लोकसभा में 131वें संशोधन विधेयक के पारित न होने के बाद BJP ने देशभर में 'जन आक्रोश पदयात्रा' शुरू की है। इस अभियान के ज़रिए कांग्रेस, TMC, DMK, समाजवादी पार्टी और वाम दलों को महिला आरक्षण विधेयक के विरोध पर जनता के सामने घेरा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले