इंदौर कोर्ट ने बेटी की हत्या में पिता बबलेश अहीरवाल को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

Click to start listening
इंदौर कोर्ट ने बेटी की हत्या में पिता बबलेश अहीरवाल को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

सारांश

इंदौर की जिला अदालत ने 2019 के एक दर्दनाक मामले में पिता बबलेश अहीरवाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई — जिसने पत्नी के चरित्र पर संदेह में अपनी ही बेटी रानी की हत्या कर शव ड्रम में छुपा दिया था। छह साल बाद मिला यह फैसला न्यायपालिका की दृढ़ता का प्रमाण है।

Key Takeaways

इंदौर जिला अदालत ने 30 अप्रैल 2026 को बबलेश अहीरवाल को बेटी रानी की हत्या में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। घटना 2019 की है, जो परदेशीपुरा थाना क्षेत्र, इंदौर की है — फैसला आने में लगभग छह वर्ष लगे। आरोपी ने पत्नी सुदामा बाई के चरित्र पर संदेह में बेटी से पूछताछ की और जवाब न मिलने पर हत्या कर दी। शव को घर में रखे नीले ड्रम में छुपाया गया था; बाद में आरोपी ने स्वयं हत्या कबूल की। अतिरिक्त लोक अभियोजक योगेश जायसवाल ने ठोस साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष की दलीलें रखीं।

इंदौर की जिला अदालत ने 30 अप्रैल 2026 को 2019 के एक जघन्य हत्याकांड में दोषी पाए गए बबलेश अहीरवाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपी पर अपनी ही बेटी रानी की हत्या करने का दोष सिद्ध हुआ, जो परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में घटित इस घटना ने उस समय पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया था।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन पक्ष के अनुसार, बबलेश अहीरवाल अपनी पत्नी सुदामा बाई के चरित्र पर संदेह करता था, जिसके कारण घर में लगातार तनाव बना रहता था। घटना के दिन सुदामा बाई घर से बाहर थीं और घर में केवल बबलेश और उसकी बेटी रानी मौजूद थीं। आरोपी ने बेटी से उसकी माँ के चरित्र को लेकर पूछताछ की और जब बेटी स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ रही, तो उसने क्रोध में आकर रानी की हत्या कर दी।

शव छुपाने की कोशिश और पत्नी पर हमला

वारदात को छिपाने के लिए आरोपी ने बेटी के शव को घर में रखे एक नीले ड्रम में छुपा दिया। जब सुदामा बाई घर लौटीं और बेटी के बारे में पूछा, तो बबलेश ने उन्हें गुमराह करते हुए कहा कि रानी अस्पताल गई है। पत्नी को उसकी बातों पर संदेह हुआ और दोनों के बीच विवाद छिड़ गया। इसी विवाद के दौरान आरोपी ने कुल्हाड़ी से सुदामा बाई पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।

गिरफ्तारी और अदालती कार्यवाही

घटना के बाद परिजन मौके पर पहुँचे और घायल महिला को अस्पताल पहुँचाया गया। इलाज के दौरान ही आरोपी ने अपनी बेटी की हत्या करने की बात कबूल की और शव के ठिकाने की जानकारी दी। इसके बाद परदेशीपुरा पुलिस ने मामला दर्ज कर बबलेश को गिरफ्तार किया और जाँच पूरी कर न्यायालय में पेश किया।

अभियोजन पक्ष की दलीलें

अतिरिक्त लोक अभियोजक योगेश जायसवाल ने अदालत के समक्ष विस्तार से पक्ष रखते हुए आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने बबलेश अहीरवाल को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका परिवार के भीतर होने वाले जघन्य अपराधों को भी कठोरतम दृष्टि से देखती है।

आगे की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में घरेलू हिंसा और परिवार के भीतर हत्या के मामलों पर न्यायिक सख्ती की माँग लगातार उठती रही है। गौरतलब है कि यह मामला 2019 से अदालत में विचाराधीन था और लगभग छह वर्षों बाद अंततः फैसले तक पहुँचा। पीड़ित परिवार को न्याय मिलने के साथ यह निर्णय समाज को एक कड़ा संदेश देता है।

Point of View

वहाँ सुनवाई इतने वर्षों तक क्यों खिंचती है — यह प्रश्न न्यायिक सुधार की माँग को और प्रासंगिक बनाता है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

बबलेश अहीरवाल को किस मामले में सजा सुनाई गई?
बबलेश अहीरवाल को अपनी बेटी रानी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया और इंदौर जिला अदालत ने 30 अप्रैल 2026 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह घटना 2019 में परदेशीपुरा थाना क्षेत्र, इंदौर में हुई थी।
इस हत्याकांड की वजह क्या थी?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी बबलेश अपनी पत्नी सुदामा बाई के चरित्र पर संदेह करता था। उसने बेटी रानी से माँ के बारे में पूछताछ की और जब बेटी ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी, तो क्रोध में आकर उसने बेटी की हत्या कर दी।
आरोपी ने अपराध कैसे छुपाने की कोशिश की?
बबलेश ने बेटी के शव को घर में रखे एक नीले ड्रम में छुपा दिया और पत्नी के पूछने पर कहा कि रानी अस्पताल गई है। बाद में पत्नी पर कुल्हाड़ी से हमला करने के बाद जब वह घायल होकर अस्पताल पहुँचीं, तब आरोपी ने इलाज के दौरान हत्या कबूल की।
इस मामले में फैसला आने में इतना समय क्यों लगा?
यह मामला 2019 में दर्ज हुआ था और 2026 में फैसला आया, यानी लगभग छह वर्ष की न्यायिक प्रक्रिया के बाद। भारत में आपराधिक मामलों में गवाहों के बयान, साक्ष्य परीक्षण और अदालती प्रक्रियाओं के चलते ऐसे मामले अक्सर लंबे समय तक चलते हैं।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की भूमिका क्या रही?
अतिरिक्त लोक अभियोजक योगेश जायसवाल ने अदालत के समक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। उनकी दलीलों के आधार पर अदालत ने बबलेश अहीरवाल को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
Nation Press