इंदौर कोर्ट ने बेटी की हत्या में पिता बबलेश अहीरवाल को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
सारांश
Key Takeaways
इंदौर की जिला अदालत ने 30 अप्रैल 2026 को 2019 के एक जघन्य हत्याकांड में दोषी पाए गए बबलेश अहीरवाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपी पर अपनी ही बेटी रानी की हत्या करने का दोष सिद्ध हुआ, जो परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में घटित इस घटना ने उस समय पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया था।
मामले की पृष्ठभूमि
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बबलेश अहीरवाल अपनी पत्नी सुदामा बाई के चरित्र पर संदेह करता था, जिसके कारण घर में लगातार तनाव बना रहता था। घटना के दिन सुदामा बाई घर से बाहर थीं और घर में केवल बबलेश और उसकी बेटी रानी मौजूद थीं। आरोपी ने बेटी से उसकी माँ के चरित्र को लेकर पूछताछ की और जब बेटी स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ रही, तो उसने क्रोध में आकर रानी की हत्या कर दी।
शव छुपाने की कोशिश और पत्नी पर हमला
वारदात को छिपाने के लिए आरोपी ने बेटी के शव को घर में रखे एक नीले ड्रम में छुपा दिया। जब सुदामा बाई घर लौटीं और बेटी के बारे में पूछा, तो बबलेश ने उन्हें गुमराह करते हुए कहा कि रानी अस्पताल गई है। पत्नी को उसकी बातों पर संदेह हुआ और दोनों के बीच विवाद छिड़ गया। इसी विवाद के दौरान आरोपी ने कुल्हाड़ी से सुदामा बाई पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।
गिरफ्तारी और अदालती कार्यवाही
घटना के बाद परिजन मौके पर पहुँचे और घायल महिला को अस्पताल पहुँचाया गया। इलाज के दौरान ही आरोपी ने अपनी बेटी की हत्या करने की बात कबूल की और शव के ठिकाने की जानकारी दी। इसके बाद परदेशीपुरा पुलिस ने मामला दर्ज कर बबलेश को गिरफ्तार किया और जाँच पूरी कर न्यायालय में पेश किया।
अभियोजन पक्ष की दलीलें
अतिरिक्त लोक अभियोजक योगेश जायसवाल ने अदालत के समक्ष विस्तार से पक्ष रखते हुए आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने बबलेश अहीरवाल को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका परिवार के भीतर होने वाले जघन्य अपराधों को भी कठोरतम दृष्टि से देखती है।
आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में घरेलू हिंसा और परिवार के भीतर हत्या के मामलों पर न्यायिक सख्ती की माँग लगातार उठती रही है। गौरतलब है कि यह मामला 2019 से अदालत में विचाराधीन था और लगभग छह वर्षों बाद अंततः फैसले तक पहुँचा। पीड़ित परिवार को न्याय मिलने के साथ यह निर्णय समाज को एक कड़ा संदेश देता है।