कर्नाटक: भाजयुमो नेता वेंकटेश कुरुबारा हत्याकांड में 6 दोषियों को फांसी की सजा, ₹3-3 लाख जुर्माना
सारांश
Key Takeaways
गंगावती की एक स्थानीय अदालत ने गुरुवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के नेता वेंकटेश कुरुबारा (34) की हत्या के मामले में छह दोषियों को मौत की सजा सुनाई। न्यायाधीश सदानंद नागप्पा नाइक ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी छह पर ₹3-3 लाख का जुर्माना भी लगाया। 7 अक्टूबर 2025 को हुई इस क्रूर हत्या के बाद उत्तर कर्नाटक के राजनीतिक हलकों में भारी हलचल मची थी।
कौन हैं छह दोषी
अदालत ने जिन छह आरोपियों को मौत की सजा सुनाई, उनकी पहचान रवि, विजय, धनराज, भारत, सलीम मोहम्मद रफीक और गंगाधर गौली के रूप में की गई है। इससे पहले अदालत ने कार्तिक, दादापीर, मोहम्मद अल्ताफ, मल्लिकार्जुन, अक्किरोटी शरण और चैत्रा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। कुल 12 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में 927 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया था।
हत्या की रात क्या हुआ
घटना 7 अक्टूबर 2025 की रात करीब 2 बजे की है, जब वेंकटेश एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद दोस्तों के साथ डिनर करके लौट रहे थे। लीलावती अस्पताल के पास कोप्पल रोड पर एक गिरोह ने उनकी बाइक को कार से टक्कर मारी और तलवारों व लोहे की रॉड से बेरहमी से हमला किया। चश्मदीद दोस्त रमू के अनुसार, हमलावरों ने पहले वेंकटेश को धमकाया और पीछा किया, फिर उन पर हमला बोल दिया।
हत्या की जड़ — 2003 का पुराना रंजिश
कोप्पल एसपी आर. एल. अरसिद्धि ने बताया था कि इस हत्या की जड़ 2003 के एक पुलिस केस से जुड़ी है, जिसमें वेंकटेश ने आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद की थी। इसी कारण मुख्य दोषी रवि उनसे पुरानी रंजिश रखता था। वेंकटेश के पिता हंपन्या जंटाकल ने बताया कि रवि ने 2024 में व्हाट्सएप पर भी उनके बेटे को जान से मारने की धमकी दी थी। डर के चलते वेंकटेश अक्सर जगह बदलकर दोस्तों के साथ रहते थे।
अदालती कार्यवाही और सुरक्षा व्यवस्था
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने 83 गवाहों के बयान दर्ज किए। सरकारी अभियोजक नागलक्ष्मी ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। फैसले के दिन गंगावती कोर्ट परिसर के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और सभी छह दोषियों को दो अलग-अलग वाहनों में कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया। बताया जाता है कि घटना की रात आरोपी बेंगलुरु भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन टायर फटने के कारण उन्हें कार छोड़नी पड़ी और वे पकड़े गए।
आगे क्या होगा
मौत की सजा पाए दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। यह मामला उत्तर कर्नाटक में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस को केंद्र में ला देता है। गौरतलब है कि गंगावती नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज इस केस में त्वरित सुनवाई और कठोर सजा को न्याय व्यवस्था की सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है।