क्योंझर कांड: बहन की अस्थियाँ बैंक ले जाने पर RDC जांच में बैंक अधिकारियों की लापरवाही उजागर
सारांश
Key Takeaways
ओडिशा के क्योंझर जिले में हुई चौंकाने वाली घटना की जांच कर रहे रेवेन्यू डिविजनल कमिश्नर (नॉर्दर्न रेंज) संग्राम केशरी मोहापात्रा ने गुरुवार, 1 मई 2025 को बताया कि प्रारंभिक जांच में ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लीपोसी शाखा के अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस मामले में आदिवासी युवक जिटू मुंडा को कथित तौर पर अपनी दिवंगत बहन कला मुंडा के शव को कब्र से निकालकर उसकी अस्थियाँ बैंक ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था, ताकि खाते में जमा मात्र ₹19,300 निकालने की डेथ क्लेम प्रक्रिया पूरी हो सके।
मुख्य घटनाक्रम
27 अप्रैल 2025 को हुई इस घटना के बाद आरडीसी मोहापात्रा ने जांच शुरू करते हुए जिटू मुंडा के घर और ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लीपोसी शाखा का दौरा किया। उन्होंने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जानकारी ली और संबंधित बैंककर्मियों से पूछताछ की।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, ''प्रारंभिक जांच में बैंक अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है और व्यक्ति को सेवा देने से मना किया गया।'' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक में ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा न होने के कारण बैंककर्मी और जिटू मुंडा के बीच हुई बातचीत का सटीक ब्यौरा नहीं मिल सका।
पहचान के बावजूद सेवा से इनकार
जांच में सामने आया कि मृतका कला मुंडा और उनके भाई जिटू मुंडा नियमित रूप से उस बैंक शाखा में आते थे और अधिकारी उन्हें भली-भाँति जानते थे। इससे पहले उनके खाते से करीब आठ बार पैसे निकाले जा चुके थे। ऐसे में परिचित ग्राहक को सेवा देने से इनकार करना और उसे इस हद तक विवश करना बैंक की घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है।
मृत्यु प्रमाण पत्र में देरी की भी होगी जांच
आरडीसी मोहापात्रा ने बताया कि वे यह भी जांचेंगे कि फरवरी 2025 में कला मुंडा की मृत्यु हो जाने के बावजूद उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भाई जिटू मुंडा को समय पर क्यों नहीं दिया गया। गौरतलब है कि यदि प्रमाण पत्र समय पर मिलता, तो शायद यह दर्दनाक स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सिद्ध हुई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक हंगामा और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और सोशल मीडिया पर बैंक के रवैये की व्यापक आलोचना हुई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को इस मामले पर गहरी चिंता जताते हुए आरडीसी स्तर की जांच के आदेश दिए।
यह मुद्दा गुरुवार को ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र में भी उठा, जहाँ विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने सदन में जोरदार हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने इस घटना को उठाते हुए कहा कि इससे राज्य की छवि देश और दुनिया में गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
आगे क्या होगा
जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी बैंककर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई अपेक्षित है। यह मामला ग्रामीण आदिवासी क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की सुलभता और संवेदनशीलता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है — और नीति-निर्माताओं को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या मौजूदा डेथ क्लेम प्रक्रियाएँ वाकई आम नागरिक के अनुकूल हैं।