क्योंझर कांड: बहन की अस्थियाँ बैंक ले जाने पर RDC जांच में बैंक अधिकारियों की लापरवाही उजागर

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क्योंझर कांड: बहन की अस्थियाँ बैंक ले जाने पर RDC जांच में बैंक अधिकारियों की लापरवाही उजागर

सारांश

₹19,300 निकालने के लिए एक आदिवासी युवक को कथित तौर पर बहन की अस्थियाँ बैंक ले जानी पड़ीं — और अब RDC जांच में बैंक अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। यह मामला ग्रामीण भारत में बैंकिंग संवेदनहीनता और टूटी प्रशासनिक व्यवस्था की कड़वी तस्वीर पेश करता है।

Key Takeaways

RDC संग्राम केशरी मोहापात्रा की प्रारंभिक जांच में ओडिशा ग्रामीण बैंक, मल्लीपोसी शाखा के अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई। जिटू मुंडा को मात्र ₹19,300 निकालने के लिए बहन कला मुंडा की अस्थियाँ कब्र से निकालकर बैंक ले जानी पड़ीं। मृतका और उनके भाई बैंक के नियमित ग्राहक थे और पहले आठ बार खाते से पैसे निकाले जा चुके थे। फरवरी 2025 में मृत्यु के बावजूद मृत्यु प्रमाण पत्र समय पर न मिलने की भी जांच होगी। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने आरडीसी जांच के आदेश दिए; ओडिशा विधानसभा में BJD और कांग्रेस ने जोरदार हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने कहा — इस घटना से राज्य की छवि देश-दुनिया में गंभीर रूप से प्रभावित हुई।

ओडिशा के क्योंझर जिले में हुई चौंकाने वाली घटना की जांच कर रहे रेवेन्यू डिविजनल कमिश्नर (नॉर्दर्न रेंज) संग्राम केशरी मोहापात्रा ने गुरुवार, 1 मई 2025 को बताया कि प्रारंभिक जांच में ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लीपोसी शाखा के अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस मामले में आदिवासी युवक जिटू मुंडा को कथित तौर पर अपनी दिवंगत बहन कला मुंडा के शव को कब्र से निकालकर उसकी अस्थियाँ बैंक ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था, ताकि खाते में जमा मात्र ₹19,300 निकालने की डेथ क्लेम प्रक्रिया पूरी हो सके।

मुख्य घटनाक्रम

27 अप्रैल 2025 को हुई इस घटना के बाद आरडीसी मोहापात्रा ने जांच शुरू करते हुए जिटू मुंडा के घर और ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लीपोसी शाखा का दौरा किया। उन्होंने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जानकारी ली और संबंधित बैंककर्मियों से पूछताछ की।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, ''प्रारंभिक जांच में बैंक अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है और व्यक्ति को सेवा देने से मना किया गया।'' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक में ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा न होने के कारण बैंककर्मी और जिटू मुंडा के बीच हुई बातचीत का सटीक ब्यौरा नहीं मिल सका।

पहचान के बावजूद सेवा से इनकार

जांच में सामने आया कि मृतका कला मुंडा और उनके भाई जिटू मुंडा नियमित रूप से उस बैंक शाखा में आते थे और अधिकारी उन्हें भली-भाँति जानते थे। इससे पहले उनके खाते से करीब आठ बार पैसे निकाले जा चुके थे। ऐसे में परिचित ग्राहक को सेवा देने से इनकार करना और उसे इस हद तक विवश करना बैंक की घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है।

मृत्यु प्रमाण पत्र में देरी की भी होगी जांच

आरडीसी मोहापात्रा ने बताया कि वे यह भी जांचेंगे कि फरवरी 2025 में कला मुंडा की मृत्यु हो जाने के बावजूद उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भाई जिटू मुंडा को समय पर क्यों नहीं दिया गया। गौरतलब है कि यदि प्रमाण पत्र समय पर मिलता, तो शायद यह दर्दनाक स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सिद्ध हुई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक हंगामा और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और सोशल मीडिया पर बैंक के रवैये की व्यापक आलोचना हुई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को इस मामले पर गहरी चिंता जताते हुए आरडीसी स्तर की जांच के आदेश दिए।

यह मुद्दा गुरुवार को ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र में भी उठा, जहाँ विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने सदन में जोरदार हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने इस घटना को उठाते हुए कहा कि इससे राज्य की छवि देश और दुनिया में गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।

आगे क्या होगा

जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी बैंककर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई अपेक्षित है। यह मामला ग्रामीण आदिवासी क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की सुलभता और संवेदनशीलता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है — और नीति-निर्माताओं को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या मौजूदा डेथ क्लेम प्रक्रियाएँ वाकई आम नागरिक के अनुकूल हैं।

Point of View

बल्कि एक ही जर्जर व्यवस्था के दो चेहरे हैं। सवाल यह है कि क्या RDC जांच केवल कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई तक सिमटेगी, या डेथ क्लेम प्रक्रियाओं को आदिवासी वास्तविकताओं के अनुरूप बदलने की कोशिश भी होगी।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

क्योंझर बैंक कांड क्या है?
ओडिशा के क्योंझर जिले में आदिवासी युवक जिटू मुंडा को कथित तौर पर अपनी दिवंगत बहन कला मुंडा की अस्थियाँ कब्र से निकालकर बैंक ले जानी पड़ीं, ताकि ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लीपोसी शाखा में जमा ₹19,300 निकालने की डेथ क्लेम प्रक्रिया पूरी हो सके। यह घटना 27 अप्रैल 2025 को हुई।
RDC जांच में क्या सामने आया?
रेवेन्यू डिविजनल कमिश्नर संग्राम केशरी मोहापात्रा की प्रारंभिक जांच में बैंक अधिकारियों की लापरवाही और जिटू मुंडा को सेवा देने से इनकार करने की बात सामने आई है। बैंक में ऑडियो रिकॉर्डिंग न होने से बातचीत का पूरा ब्यौरा नहीं मिल पाया।
मृत्यु प्रमाण पत्र समय पर क्यों नहीं मिला?
कला मुंडा की मृत्यु फरवरी 2025 में हुई थी, लेकिन उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भाई जिटू मुंडा को समय पर नहीं दिया गया। RDC ने इस देरी की भी जांच करने की बात कही है।
इस मामले में सरकार और विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया रही?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को आरडीसी स्तर की जांच के आदेश दिए। ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र में BJD और कांग्रेस ने हंगामा किया और नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि इस घटना से राज्य की छवि गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी?
RDC मोहापात्रा ने स्पष्ट किया है कि जांच में जिस किसी की भी लापरवाही सिद्ध होगी, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर बैंककर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
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