जालंधर का देवी तालाब मंदिर: 51 शक्तिपीठों में शामिल, यहाँ गिरा था माता सती का दाहिना स्तन

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जालंधर का देवी तालाब मंदिर: 51 शक्तिपीठों में शामिल, यहाँ गिरा था माता सती का दाहिना स्तन

सारांश

जालंधर का देवी तालाब मंदिर महज एक धार्मिक स्थल नहीं — यह उस पौराणिक घटना का जीवंत प्रमाण है जब भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से माता सती का शरीर 51 भागों में विभक्त हुआ था। लगभग 200 वर्ष पुराना यह शक्तिपीठ आस्था, स्थापत्य और संगीत की त्रिवेणी है।

Key Takeaways

देवी तालाब मंदिर , जालंधर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ माता सती का दाहिना स्तन कटकर गिरा था। मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है और जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन से मात्र 1 किलोमीटर दूर है। परिसर में निःशुल्क भोजन और गेस्ट हाउस की सुविधा उपलब्ध है। प्रतिवर्ष 'कीर्तन दरबार' और 'हरबल्लभ संगीत सम्मेलन' का आयोजन होता है।

पंजाब के सबसे प्राचीन नगरों में से एक जालंधर में स्थित देवी तालाब मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वह पवित्र स्थान है जहाँ माता सती का दाहिना स्तन कटकर गिरा था। हिंदू आस्था में यह स्थल असाधारण शक्ति और पावनता का केंद्र माना जाता है।

पौराणिक कथा और शक्तिपीठ का महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में भगवान शिव के अपमान को सहन न कर पाने पर अपने प्राण त्याग दिए, तब क्रोधित शिव सती के शव को लेकर तांडव करने लगे। ब्रह्मांड की रक्षा हेतु भगवान विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र चलाया, जिससे माता सती का शरीर 51 भागों में विभक्त हो गया। इन्हीं स्थानों पर शक्तिपीठों की स्थापना हुई। जालंधर में माता सती का दाहिना स्तन गिरने के कारण यहाँ देवी तालाब मंदिर का निर्माण हुआ।

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल पर गंगा का आह्वान किया था, जिसके फलस्वरूप धरती से पवित्र जल प्रकट हुआ। यही जल आज देवी तालाब के रूप में विद्यमान है और श्रद्धालु इसमें आध्यात्मिक शुद्धि के लिए पवित्र स्नान करते हैं।

मंदिर की संरचना और विशेषताएँ

देवी तालाब मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है। मंदिर में देवी दुर्गा की मुख्य प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की दीवारों पर बारीक नक्काशी और ऊँचा पिरामिड आकार का गुंबद इसे स्थापत्य कला की दृष्टि से भव्य बनाता है।

मंदिर परिसर में देवी काली का प्राचीन मंदिर, भगवान शिव का मंदिर (बाघ पर विराजमान स्वरूप में) और अमरनाथ गुफा जैसी संरचना भी निर्मित है। परिसर में एक अत्यंत प्राचीन बरगद का वृक्ष भी है, जिस पर भक्त मनोकामनाएँ पूर्ण होने की आस में धागे बाँधते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएँ

मंदिर में निःशुल्क भोजन की व्यवस्था है। मंदिर कमेटी की ओर से प्रतिदिन सुबह और शाम भक्तों तथा भोजन के इच्छुक लोगों को भोजन कराया जाता है। मंदिर परिसर में ठहरने के लिए गेस्ट हाउस की सुविधा भी उपलब्ध है, जहाँ न्यूनतम शुल्क पर श्रद्धालु निर्धारित शर्तों के साथ रुक सकते हैं।

कैसे पहुँचें

देवी तालाब मंदिर, जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शहर के केंद्र में स्थित होने के कारण यहाँ ऑटो, टैक्सी या रिक्शा द्वारा सरलता से पहुँचा जा सकता है।

सांस्कृतिक आयोजन और आसपास के आकर्षण

मंदिर में प्रतिवर्ष भव्य 'कीर्तन दरबार' और 'हरबल्लभ संगीत सम्मेलन' का आयोजन होता है, जिसमें देशभर के प्रसिद्ध भजन गायक और संगीतकार भाग लेते हैं। मंदिर से 15 किलोमीटर के दायरे में वंडरलैंड थीम पार्क, सेंट मैरी कैथेड्रल चर्च, रंगला पंजाब हवेली और जंग-ए-आज़ादी स्मारक जैसे आकर्षण भी स्थित हैं। देवी तालाब मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और नारी शक्ति का प्रतीक है — और आने वाले समय में भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहेगा।

Point of View

बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण की भी है। पंजाब जैसे राज्य में, जहाँ सिख धर्म की प्रधानता है, एक हिंदू शक्तिपीठ का इस प्रकार फलना-फूलना सामासिक संस्कृति का प्रमाण है। हरबल्लभ संगीत सम्मेलन जैसे आयोजन इस मंदिर को धार्मिक सीमाओं से परे एक सांस्कृतिक केंद्र बनाते हैं। आवश्यकता है कि सरकार और मंदिर कमेटी मिलकर इस विरासत स्थल के दस्तावेज़ीकरण और संरक्षण को प्राथमिकता दें।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

देवी तालाब मंदिर जालंधर क्यों प्रसिद्ध है?
देवी तालाब मंदिर इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यह भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ माता सती का दाहिना स्तन गिरा था, जिससे यह स्थान अत्यंत पावन माना जाता है।
देवी तालाब मंदिर कितना पुराना है?
देवी तालाब मंदिर लगभग 200 वर्ष पुराना है। मंदिर में देवी दुर्गा की मुख्य प्रतिमा स्थापित है और इसकी स्थापत्य शैली में बारीक नक्काशी तथा पिरामिड आकार का गुंबद उल्लेखनीय है।
देवी तालाब मंदिर जालंधर कैसे पहुँचें?
मंदिर जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या रिक्शा द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
क्या देवी तालाब मंदिर में ठहरने और खाने की सुविधा है?
हाँ, मंदिर परिसर में निःशुल्क भोजन की व्यवस्था है जो मंदिर कमेटी द्वारा प्रतिदिन सुबह-शाम उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा न्यूनतम शुल्क पर गेस्ट हाउस में ठहरने की सुविधा भी है।
51 शक्तिपीठ क्या हैं और जालंधर का इनमें क्या स्थान है?
हिंदू धर्म में 51 शक्तिपीठ वे पवित्र स्थान हैं जहाँ माता सती के शरीर के अंग गिरे थे। जालंधर का देवी तालाब मंदिर इन 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ माता सती का दाहिना स्तन गिरा था।
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