मोतिहारी में जाली नोट गिरोह का भंडाफोड़: बर्खास्त BMP जवान समेत 9 गिरफ्तार, ₹4 लाख के नकली नोट जब्त
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वी चंपारण जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में मोतिहारी पुलिस ने 30 जुलाई 2026 को एक संगठित अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया, जो जाली नोटों का कारोबार करने के साथ-साथ लोगों को 'रुपए दोगुना-तीन गुना' करने का झाँसा देकर ठगी करता था। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना बिदुर सहनी — जो बिहार पुलिस से बर्खास्त सिपाही है — समेत नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार सदस्यों में एक बर्खास्त BMP जवान और दो बर्खास्त होमगार्ड जवान भी शामिल हैं।
कैसे हुई कार्रवाई
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बर्खास्त सिपाही बिदुर सहनी अपने साथियों के साथ जाली नोटों के कारोबार, ठगी और हथियार के बल पर लूटपाट की वारदातों को अंजाम दे रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने कुवारी देवी चौक पर छापेमारी कर सरगना बिदुर सहनी को उसके दो सहयोगियों — आकाश कुमार और प्रदीप कुमार जायसवाल — के साथ दबोच लिया। इनके पास से जाली नोट और नकद राशि बरामद की गई।
बासमनपुर में दूसरी छापेमारी, छह और गिरफ्तार
पहली गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बासमनपुर गाँव में गिरोह के अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई की। इस दौरान राम प्रवेश भगत, कुंदन कुमार, चंदेश्वर गिरी, अमिरी पंडित, अनिल ठाकुर और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया गया। अमिरी पंडित के घर से पुलिस वर्दी के तीन पैंट, दो शर्ट और एक बेल्ट बरामद हुई, जबकि कुंदन कुमार के घर से एक देसी कट्टा और एक जिंदा कारतूस भी मिला।
बरामदगी का ब्यौरा
पुलिस ने गिरोह के पास से निम्नलिखित सामग्री जब्त की:
₹34,000 नकद; 'चिल्ड्रेन बैंक ऑफ इंडिया' अंकित ₹500 के नोट जैसे दिखने वाले ₹4 लाख के जाली नोट; ₹200 और ₹100 के नोट के आकार में कटे सादे कागज; आठ मोबाइल फोन; और तीन मोटरसाइकिल।
ठगी का तरीका
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लोगों को रुपए दोगुना या तीन गुना करने का लालच देकर उनके असली नोटों की जगह जाली नोट थमा देता था। कई मामलों में गिरोह के सदस्य हथियार का भय दिखाकर ठगी और लूटपाट की घटनाओं को भी अंजाम देते थे। यह ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में संगठित ठगी गिरोहों के विरुद्ध अभियान तेज किया गया है।
आगे की जाँच
मुफ्फसिल थाना में सभी नौ आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है और पूछताछ जारी है। पुलिस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और उसके व्यापक नेटवर्क की भी जाँच में जुटी है। गौरतलब है कि गिरफ्तार आरोपियों में पूर्व सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी इस मामले को और गंभीर बनाती है।