बोकारो साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़: नौ आरोपी गिरफ्तार, बिहार से जुड़े तार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के बोकारो जिले की पुलिस ने 16 जुलाई को एक सक्रिय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी बोकारो में किराए के मकानों में रहकर देश के विभिन्न राज्यों के निर्दोष नागरिकों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बना रहे थे। प्रारंभिक जांच में गिरोह के मुख्य संचालकों के तार बिहार से जुड़े होने की बात सामने आई है।
गिरोह का तरीकाकार
बोकारो के पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपी खुद को बैंक कर्मचारी या 'आरएम टूर एंड ट्रैवल्स' का एजेंट बताकर लोगों से संपर्क करते थे। पीड़ितों का भरोसा जीतने के बाद वे विभिन्न बहानों से उनके बैंक खातों की संवेदनशील जानकारी हासिल करते थे और ठगी की रकम अपने खातों में स्थानांतरित करा लेते थे।
गौरतलब है कि यह गिरोह किराए के मकानों को 'ऑपरेशन सेंटर' के रूप में इस्तेमाल कर रहा था, जो साइबर अपराधियों की एक उभरती हुई कार्यशैली है — जहाँ अपराधी स्थानीय किरायेदार के रूप में छुपकर अंतर-राज्यीय ठगी का संचालन करते हैं।
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी
गिरफ्तार नौ आरोपियों की पहचान सम्राट कुमार विनय, निरंजन कुमार, सुदामा कुमार, नीतीश कुमार, सुबोध कुमार, प्रेमचंद कुमार, धर्मराज कुमार, बृजेश कुमार और रवि प्रभाकर के रूप में हुई है। इनमें सम्राट कुमार विनय बोकारो सेक्टर-3 का निवासी है, जबकि शेष आरोपी बिहार के विभिन्न जिलों से संबंधित बताए जा रहे हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से ₹43,100 नकद, 18 बैंक पासबुक, 3 चेकबुक, 10 डेबिट कार्ड, 9 सिम कार्ड और 10 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जिन बैंक खातों में ठगी की रकम जमा कराई गई थी, उन्हें संबंधित बैंकों के माध्यम से होल्ड करा दिया गया है ताकि आगे के वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाई जा सके।
बिहार कनेक्शन और आगे की जांच
एसपी मीणा ने बताया कि पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ है कि गिरोह के मुख्य संचालक और संरक्षक बिहार में बैठे हैं। उनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। बरामद मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके।
मकान मालिक की भूमिका भी जांच के दायरे में
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिस मकान में आरोपी रहकर साइबर ठगी का संचालन कर रहे थे, उसके मकान मालिक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, सभी गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास को भी खंगाला जा रहा है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब झारखंड और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों से संचालित साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जांच के आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क के और भी सदस्यों के उजागर होने की संभावना है।