क्या ओडिशा में भुवनेश्वर में अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ हुआ?
सारांश
Key Takeaways
- भुवनेश्वर में साइबर धोखाधड़ी का बड़ा रैकेट पकड़ा गया।
- 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से अधिकांश बिहार के हैं।
- आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
- पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड की पहचान की।
- साइबर सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
भुवनेश्वर, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भुवनेश्वर-कटक कमिश्नरेट पुलिस ने रविवार को एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन में राज्य की राजधानी से संचालित एक अंतरराज्यीय साइबर अपराध रैकेट का खुलासा किया। इस कार्रवाई में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस आयुक्त एस देव दत्ता सिंह ने यह जानकारी साझा की।
आयुक्त ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से सात बिहार के, चार केरल के और एक ओडिशा का है।
उन्होंने कहा कि विश्वसनीय सूचना के आधार पर कमिश्नरेट पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया। गिरोह के अधिकांश सदस्य बिहार के नालंदा जिले के निवासी हैं।
वे पिछले कुछ महीनों से बडागढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के टैंकापानी रोड स्थित देबासिस त्रिपाठी के घर से गुप्त रूप से यह रैकेट चला रहे थे। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड के रूप में देबाशीष त्रिपाठी, अर्जुन राज उर्फ बिटू (22), बिजय कुमार (24), और पंकज कुमार की पहचान की।
पुलिस कमिश्नर ने आगे बताया कि यह गिरोह बिहार के कुख्यात कात्री सराय गिरोह के नाम से जाना जाता है। यह गिरोह मैन्युअल और साइबर धोखाधड़ी दोनों में संलग्न है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पंकज अपने गांव में तैनात एजेंटों के माध्यम से नापतोल, मीशो और अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ग्राहकों का पूरा डेटाबेस इकट्ठा करता था और इसके लिए फर्जी बैंक खाते भी बनाता था। साइबर जालसाज बिहार में अपने एजेंटों से बैंक खाता संख्या और यूपीआई हैंडल प्राप्त करते थे और शिकार लोगों को पैसे जमा करने के लिए ये खाते देते थे।
पुलिस ने यह भी पता लगाया कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों के जरिए अलग-अलग मोबाइल सेवा प्रदाताओं से फर्जी प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड प्राप्त करते थे, जिनका इस्तेमाल वे ग्राहकों को फोन करने और इंटरनेट तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काम करने के लिए करते थे। आरोपियों ने फर्जी उपहार वाउचर विजेता, केरल लॉटरी घोटाला और फर्जी ऋण प्रस्तावों के जरिए लोगों को ठगा।
वेब ग्राफिक्स डिजाइनर त्रिपाठी ने टारगेट ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए स्क्रैच कार्ड, उपहार वाउचर, लकी कूपन और ऑफर लेटर तैयार किए, जिनमें उपहार वाउचर जीतने के लिए एक मोबाइल नंबर दिया गया था। इसके बाद, आरोपियों के एजेंटों द्वारा कोलकाता से डाक के माध्यम से विभिन्न पीड़ितों को कूपन और फोन नंबर के साथ पत्र भेजे गए।
लकी ड्रॉ कूपन को स्क्रैच करने के बाद पीड़ितों ने आरोपियों से संपर्क किया। पीड़ितों को कथित रूप से जीते गए पुरस्कार प्राप्त करने के लिए 5,500 रुपए से 12,000 रुपए तक का पंजीकरण शुल्क देने के लिए कहा गया।