मध्य प्रदेश पुलिस ने APK और ई-सिम घोटाले में अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह पकड़ा, ₹3.09 लाख की ठगी

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मध्य प्रदेश पुलिस ने APK और ई-सिम घोटाले में अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह पकड़ा, ₹3.09 लाख की ठगी

सारांश

मध्य प्रदेश पुलिस ने झारखंड के देवघर से दो साइबर ठगों को पकड़ा जो APK फाइलों और ई-सिम स्वैपिंग की दोहरी तकनीक से बैंक खातों में सेंध लगा रहे थे। नर्मदापुरम के एक ग्रामीण से ₹3.09 लाख की ठगी का यह मामला देशभर में बढ़ते तकनीकी साइबर अपराध का खतरनाक नमूना है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश पुलिस ने 7 मई को झारखंड के देवघर जिले से उमेश दास (30) और उत्तम कुमार दास (23) को गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने APK फाइल और ई-सिम स्वैपिंग के ज़रिए नर्मदापुरम के ग्रामीण छोटेलाल कुशवाह से ₹3,09,917 की ठगी की।
शिकायत 17 मार्च को दर्ज हुई; पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा एस.
थोटा की देखरेख में विशेष जांच दल गठित हुआ।
पुलिस दल ने 4 दिनों तक गुप्त निगरानी के बाद 7 मई की रात छापेमारी कर गिरफ्तारी की।
आरोपियों से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक जब्त; आगे की जांच जारी।

मध्य प्रदेश पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो दुर्भावनापूर्ण APK फाइलों और ई-सिम स्वैपिंग के ज़रिए बैंक खातों से रकम उड़ा रहा था। नर्मदापुरम जिले के एक ग्रामीण से ₹3,09,917 की ठगी के मामले में झारखंड के देवघर जिले से दो आरोपियों को 7 मई को गिरफ्तार किया गया और 11 मई को मध्य प्रदेश लाया गया। यह कार्रवाई साइबर अपराध के उस बढ़ते खतरे को उजागर करती है जिसमें तकनीकी हथकंडों से निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया जाता है।

मामले का मूल घटनाक्रम

बानाखेड़ी पुलिस थाना क्षेत्र के डूमर गांव निवासी छोटेलाल कुशवाह (45) ने 17 मार्च को शिकायत दर्ज कराई कि उनके बैंक खाते से धोखाधड़ी करके ऑनलाइन पैसे निकाल लिए गए हैं। शिकायत मिलते ही नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा एस. थोटा की देखरेख में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। तकनीकी जांच के बाद यह दल झारखंड पहुंचा, जहां अधिकारी 2 मई को पहुंचे और लगातार चार दिनों तक निगरानी करते रहे।

गिरफ्तारी और जांच की प्रक्रिया

साइबर विभाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को भोपाल में प्रेस को बताया कि पुलिस दल ने भेष बदलकर आरोपियों के आवासीय क्षेत्र में गुप्त रूप से निगरानी रखी। 7 मई की देर रात छापेमारी में झारखंड के देवघर जिले के मधुपुर निवासी उमेश दास (30) और उत्तम कुमार दास (23) को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से कथित तौर पर अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक जब्त कर लिए गए हैं।

साइबर ठगी का तरीका

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग एप्लिकेशन के माध्यम से दुर्भावनापूर्ण APK फाइलें भेजते थे। पीड़ितों द्वारा फाइलें इंस्टॉल करने और अनुमति देने के बाद जालसाजों को उनके मोबाइल फोन में संग्रहीत SMS संदेश, OTP, बैंकिंग अलर्ट, संपर्क सूचियां और अन्य डेटा तक पहुंच मिल जाती थी। इसके बाद गिरोह पीड़ितों के मोबाइल नंबरों से जुड़े ई-सिम जेनरेट करता था, जिससे बैंक खाते से जुड़े OTP और बैंकिंग अलर्ट सीधे आरोपियों के पास पहुंचने लगते थे। यह दोहरी तकनीक — पहले APK से डेटा चोरी, फिर ई-सिम स्वैप से OTP हाइजैक — इस गिरोह को आम साइबर ठगों से अधिक खतरनाक बनाती है।

आम जनता पर असर और सुरक्षा सलाह

पुलिस ने नागरिकों को अज्ञात स्रोतों से प्राप्त APK फाइलें इंस्टॉल न करने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी है। यदि मोबाइल नेटवर्क अचानक काम करना बंद कर दे या अनधिकृत ई-सिम एक्टिवेशन अलर्ट प्राप्त हों, तो नागरिकों को तुरंत अपने बैंकों और मोबाइल ऑपरेटरों से संपर्क करने को कहा गया है। गौरतलब है कि ई-सिम स्वैपिंग आधारित धोखाधड़ी के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं और यह पहली बार नहीं है जब झारखंड स्थित गिरोहों को इस तरह के साइबर अपराधों में संलिप्त पाया गया है।

आगे की जांच

पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों की पहचान के लिए जांच जारी रखे हुए है। विशेष जांच दल यह भी पता लगा रहा है कि क्या अन्य राज्यों में भी इसी तरीके से ठगी की गई है। इस मामले में आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसार चिंताजनक है जहां डिजिटल साक्षरता अभी भी सीमित है। झारखंड से बार-बार ऐसे गिरोहों का सामने आना यह सवाल उठाता है कि क्या राज्य-स्तरीय साइबर अपराध नियंत्रण तंत्र पर्याप्त रूप से सक्रिय हैं। बिना व्यापक जन-जागरूकता अभियान और दूरसंचार कंपनियों की जवाबदेही के, ऐसी गिरफ्तारियां समस्या की जड़ को नहीं छूतीं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

APK फाइल और ई-सिम स्वैप से बैंक धोखाधड़ी कैसे होती है?
आरोपी सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के ज़रिए दुर्भावनापूर्ण APK फाइलें भेजते हैं; इंस्टॉल होने पर ये फाइलें फोन के SMS, OTP और बैंकिंग डेटा तक पहुंच दे देती हैं। इसके बाद आरोपी पीड़ित के नंबर पर ई-सिम जेनरेट कर लेते हैं, जिससे बैंकिंग OTP सीधे उनके पास आने लगते हैं और खाते से पैसे निकाले जा सकते हैं।
मध्य प्रदेश साइबर ठगी मामले में कितनी रकम की ठगी हुई?
नर्मदापुरम जिले के डूमर गांव निवासी छोटेलाल कुशवाह के बैंक खाते से ₹3,09,917 की धोखाधड़ी की गई। शिकायत 17 मार्च को दर्ज हुई थी।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और कहां के रहने वाले हैं?
गिरफ्तार आरोपी उमेश दास (30) और उत्तम कुमार दास (23) झारखंड के देवघर जिले के मधुपुर के निवासी हैं। इन्हें 7 मई को गिरफ्तार कर 11 मई को मध्य प्रदेश लाया गया।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतें?
पुलिस ने सलाह दी है कि अज्ञात स्रोतों से प्राप्त APK फाइलें इंस्टॉल न करें और संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। यदि मोबाइल नेटवर्क अचानक बंद हो जाए या अनधिकृत ई-सिम एक्टिवेशन अलर्ट आए, तो तुरंत बैंक और मोबाइल ऑपरेटर से संपर्क करें।
इस मामले की जांच किसकी देखरेख में हुई?
नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा एस. थोटा की देखरेख में विशेष जांच दल गठित किया गया था। दल ने तकनीकी जांच के बाद झारखंड में 4 दिनों की गुप्त निगरानी कर आरोपियों को पकड़ा।
राष्ट्र प्रेस