मध्य प्रदेश पुलिस ने APK और ई-सिम घोटाले में अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह पकड़ा, ₹3.09 लाख की ठगी
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो दुर्भावनापूर्ण APK फाइलों और ई-सिम स्वैपिंग के ज़रिए बैंक खातों से रकम उड़ा रहा था। नर्मदापुरम जिले के एक ग्रामीण से ₹3,09,917 की ठगी के मामले में झारखंड के देवघर जिले से दो आरोपियों को 7 मई को गिरफ्तार किया गया और 11 मई को मध्य प्रदेश लाया गया। यह कार्रवाई साइबर अपराध के उस बढ़ते खतरे को उजागर करती है जिसमें तकनीकी हथकंडों से निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया जाता है।
मामले का मूल घटनाक्रम
बानाखेड़ी पुलिस थाना क्षेत्र के डूमर गांव निवासी छोटेलाल कुशवाह (45) ने 17 मार्च को शिकायत दर्ज कराई कि उनके बैंक खाते से धोखाधड़ी करके ऑनलाइन पैसे निकाल लिए गए हैं। शिकायत मिलते ही नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा एस. थोटा की देखरेख में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। तकनीकी जांच के बाद यह दल झारखंड पहुंचा, जहां अधिकारी 2 मई को पहुंचे और लगातार चार दिनों तक निगरानी करते रहे।
गिरफ्तारी और जांच की प्रक्रिया
साइबर विभाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को भोपाल में प्रेस को बताया कि पुलिस दल ने भेष बदलकर आरोपियों के आवासीय क्षेत्र में गुप्त रूप से निगरानी रखी। 7 मई की देर रात छापेमारी में झारखंड के देवघर जिले के मधुपुर निवासी उमेश दास (30) और उत्तम कुमार दास (23) को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से कथित तौर पर अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक जब्त कर लिए गए हैं।
साइबर ठगी का तरीका
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग एप्लिकेशन के माध्यम से दुर्भावनापूर्ण APK फाइलें भेजते थे। पीड़ितों द्वारा फाइलें इंस्टॉल करने और अनुमति देने के बाद जालसाजों को उनके मोबाइल फोन में संग्रहीत SMS संदेश, OTP, बैंकिंग अलर्ट, संपर्क सूचियां और अन्य डेटा तक पहुंच मिल जाती थी। इसके बाद गिरोह पीड़ितों के मोबाइल नंबरों से जुड़े ई-सिम जेनरेट करता था, जिससे बैंक खाते से जुड़े OTP और बैंकिंग अलर्ट सीधे आरोपियों के पास पहुंचने लगते थे। यह दोहरी तकनीक — पहले APK से डेटा चोरी, फिर ई-सिम स्वैप से OTP हाइजैक — इस गिरोह को आम साइबर ठगों से अधिक खतरनाक बनाती है।
आम जनता पर असर और सुरक्षा सलाह
पुलिस ने नागरिकों को अज्ञात स्रोतों से प्राप्त APK फाइलें इंस्टॉल न करने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी है। यदि मोबाइल नेटवर्क अचानक काम करना बंद कर दे या अनधिकृत ई-सिम एक्टिवेशन अलर्ट प्राप्त हों, तो नागरिकों को तुरंत अपने बैंकों और मोबाइल ऑपरेटरों से संपर्क करने को कहा गया है। गौरतलब है कि ई-सिम स्वैपिंग आधारित धोखाधड़ी के मामले देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं और यह पहली बार नहीं है जब झारखंड स्थित गिरोहों को इस तरह के साइबर अपराधों में संलिप्त पाया गया है।
आगे की जांच
पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों की पहचान के लिए जांच जारी रखे हुए है। विशेष जांच दल यह भी पता लगा रहा है कि क्या अन्य राज्यों में भी इसी तरीके से ठगी की गई है। इस मामले में आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।