एआईएम 2030 को तेज करने पर अफ्रीकी नेताओं की सहमति, दवाओं और वैक्सीन के स्थानीय उत्पादन पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
अफ्रीकी नेताओं ने मंगलवार, 12 मई 2026 को नैरोबी में आयोजित अफ्रीका फॉरवर्ड समिट के उद्घाटन से पूर्व एक उच्च स्तरीय बैठक में अफ्रीका इनिशिएटिव फॉर मेडिकल एक्सेस एंड मैन्युफैक्चरिंग (एआईएम 2030) को तेज़ी से लागू करने पर सहमति जताई। इस पहल का मुख्य लक्ष्य महाद्वीप में दवाओं और वैक्सीन के घरेलू उत्पादन को दोगुना करना तथा स्वास्थ्य उत्पादों तक समान पहुँच सुनिश्चित करना है।
बैठक में क्या हुआ
केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने बैठक में कहा कि अफ्रीका को बुनियादी ढाँचे और तकनीकी क्षमता से जुड़ी कमियों को दूर करना होगा, ताकि एआईएम 2030 को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। उन्होंने ज़ोर दिया कि इन कमियों को दूर किए बिना महाद्वीप दवाओं और वैक्सीन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बन सकता, जो खतरनाक बीमारियों से लड़ने के लिए अनिवार्य है।
अफ्रीकी संघ आयोग के अध्यक्ष महमूद अली यूसुफ ने कहा कि एक मजबूत स्थानीय दवा निर्माण व्यवस्था से अफ्रीका की स्वास्थ्य सुरक्षा, मानव अधिकार और विकास के नतीजे बेहतर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अफ्रीकी देशों को नए और रचनात्मक फंडिंग मॉडल अपनाने चाहिए, ताकि क्षेत्रीय बाजारों में आपूर्ति मजबूत करने हेतु टिकाऊ सप्लाई चेन बनाई जा सके।
कोविड-19 से मिले सबक
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अफ्रीका क्षेत्रीय निदेशक मोहम्मद याकूब जनाबी ने कहा कि कोविड-19 महामारी से मिले सबक के बाद अब अफ्रीका अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक मज़बूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है, विशेष रूप से स्थानीय उत्पादन बढ़ाकर। जनाबी के अनुसार एआईएम 2030 अफ्रीकी देशों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की एक बड़ी प्रतिबद्धता है, जिसका लक्ष्य स्वास्थ्य उत्पादों का स्थानीय निर्माण दोगुना करना और स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत बनाना है — जो अफ्रीका के 'एजेंडा 2063' के अनुरूप है।
विश्व बैंक और अफ्रीकी संघ की भूमिका
विश्व बैंक और अफ्रीकी संघ के सहयोग से संचालित इस पहल का उद्देश्य वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों के बीच भी अफ्रीकी नागरिकों तक स्वास्थ्य उत्पादों की बेहतर पहुँच सुनिश्चित करना है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक महामारियों और भू-राजनीतिक तनावों ने आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमज़ोरियाँ उजागर की हैं।
नए वित्तीय ढाँचे की माँग
समिट के अंत में विश्व नेताओं और अफ्रीकी राष्ट्राध्यक्षों ने मिलकर एक नए वित्तीय ढाँचे की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि अफ्रीका की आर्थिक क्षमता का पूरी तरह उपयोग किया जा सके। गौरतलब है कि अफ्रीका अभी अपनी ज़रूरत की अधिकांश दवाएँ और वैक्सीन आयात पर निर्भर रहकर प्राप्त करता है, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। आने वाले वर्षों में इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश वित्तपोषण, तकनीकी हस्तांतरण और नीतिगत सुधारों को कितनी तेज़ी से अमल में ला पाते हैं।