इंडिया-अफ्रीका समिट 2026: दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्त अनिल सूकलाल बोले — सहयोग का नया ब्लूप्रिंट बनेगा
सारांश
Key Takeaways
- 31 मई 2026 को नई दिल्ली में चौथा इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट आयोजित होगा जिसकी सह-मेजबानी भारत और अफ्रीकन यूनियन कमीशन करेंगे।
- दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने कहा कि यह समिट भारत-अफ्रीका सहयोग का नया ब्लूप्रिंट तैयार करेगा।
- भारत ने अब तक अफ्रीका को 85,000 से अधिक स्कॉलरशिप और कौशल प्रशिक्षण के अवसर प्रदान किए हैं।
- समिट में वैश्विक शासन सुधार, UNSC, WTO, आतंकवाद, स्वास्थ्य, कृषि, क्रिटिकल मिनरल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर चर्चा होगी।
- अफ्रीका के पास दुनिया की 60 फीसदी कृषि योग्य भूमि है फिर भी वह नेट फूड इम्पोर्टर है और भारत की तकनीक इसे बदल सकती है।
- कोविड संकट के दौरान भारत अफ्रीका की मदद के लिए सबसे पहले आगे आने वाले देशों में था जो गहरे आपसी विश्वास का प्रतीक है।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने राष्ट्र प्रेस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि 31 मई 2026 को नई दिल्ली में होने वाला चौथा इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट भारत और अफ्रीकी महाद्वीप के बीच सहयोग का एक नया ब्लूप्रिंट तैयार करने वाला ऐतिहासिक अवसर साबित होगा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के सामने साझा चुनौतियां हैं और यह शिखर सम्मेलन उन्हें मिलकर हल करने की दिशा में निर्णायक कदम होगा।
समिट क्यों है इतना जरूरी?
उच्चायुक्त सूकलाल ने कहा कि 2008 में पहले, 2011 में दूसरे और 2015 में तीसरे इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट ने द्विपक्षीय सहयोग का एक मजबूत ढांचा खड़ा किया था। पिछले समिट को एक दशक बीत चुका है और इस दौरान कोविड महामारी समेत कई कारणों से यह आयोजन संभव नहीं हो सका। अब दोनों पक्ष भारत और अफ्रीकी महाद्वीप दस साल पहले की तुलना में बिल्कुल अलग और बेहतर स्थिति में हैं।
उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और अफ्रीकी महाद्वीप भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। दोनों के सामने विकास की साझा चुनौतियां हैं और दोनों की उम्मीदें एक जैसी हैं।
किन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा?
सूकलाल ने बताया कि इस समिट में वैश्विक शासन, संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, ब्रेटन वुड्स संस्थानों और विश्व व्यापार संगठन में सुधार जैसे बहुपक्षीय एजेंडे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही आतंकवाद जैसी साझा सुरक्षा चुनौतियों पर भी गंभीर विमर्श होगा।
उन्होंने याद दिलाया कि कोविड संकट के दौरान भारत अफ्रीका की मदद के लिए सबसे पहले आगे आने वाले देशों में शामिल था, जो दोनों के बीच गहरे भरोसे का प्रमाण है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में साझेदारी
2015 के समिट में भारत ने अफ्रीका के लिए 50,000 छात्रवृत्तियां घोषित की थीं, जो आज बढ़कर 85,000 से अधिक स्कॉलरशिप और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में तब्दील हो चुकी हैं। सूकलाल ने कहा कि आगामी समिट में शिक्षा और कौशल विकास पर और अधिक जोर दिया जाएगा क्योंकि अफ्रीका की आबादी बेहद युवा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में उन्होंने भारत के वैश्विक फार्मास्यूटिकल नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि अफ्रीका का स्वास्थ्य ढांचा अभी भी कमजोर है और भारत इस क्षेत्र में एक बड़े सहयोगी की भूमिका निभा सकता है। कृषि के बारे में उन्होंने बताया कि अफ्रीका के पास दुनिया की 60 फीसदी कृषि योग्य भूमि है, फिर भी वह एक नेट फूड-इम्पोर्टिंग महाद्वीप बना हुआ है।
औद्योगीकरण और खनिज संसाधन
उच्चायुक्त ने कहा कि औद्योगीकरण अफ्रीका के विकास की कुंजी है। अफ्रीका तीसरी औद्योगिक क्रांति में पिछड़ गया लेकिन नई तकनीक के जरिए वह अब तेजी से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि अफ्रीका खनिज संसाधनों विशेषकर नई तकनीक के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स से समृद्ध है और भारत इन संसाधनों के दोहन में अफ्रीका का साझेदार बन सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में उन्होंने कहा कि भारत में बंदरगाह, हवाई अड्डे, रेल, सड़क और डिजिटल ढांचे का जो विस्तार हुआ है वैसा ही अफ्रीका को भी चाहिए और भारत इस क्षेत्र में भी एक मजबूत भागीदार बन सकता है।
दक्षिण अफ्रीका की भागीदारी
समिट में दक्षिण अफ्रीका की भागीदारी के बारे में पूछे जाने पर उच्चायुक्त सूकलाल ने कहा कि प्रतिनिधित्व उच्च स्तरीय होगा और बिजनेस समिट के लिए एक मजबूत व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आएगा। उन्होंने इसे न केवल महाद्वीपीय स्तर पर बल्कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के एक बड़े अवसर के रूप में देखा।
31 मई 2026 को नई दिल्ली में भारत और अफ्रीकन यूनियन कमीशन की साझा मेजबानी में होने वाला यह शिखर सम्मेलन भारत-अफ्रीका संबंधों में एक नए युग की शुरुआत करने की क्षमता रखता है।