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डस्टलिक-7 संपन्न: भारत-उज्बेकिस्तान ने आतंकी कैंप नष्ट करने का किया सफल युद्धाभ्यास

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डस्टलिक-7 संपन्न: भारत-उज्बेकिस्तान ने आतंकी कैंप नष्ट करने का किया सफल युद्धाभ्यास

सारांश

भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त युद्धाभ्यास 'डस्टलिक' का सातवां संस्करण उज्बेकिस्तान में संपन्न हुआ। आतंकी कैंप नष्ट करने, ड्रोन युद्ध, स्नाइपर ऑपरेशन और पर्वतीय अभियानों का अभ्यास हुआ। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच सामरिक तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी और मजबूत हुई।

मुख्य बातें

डस्टलिक-7 — भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त युद्धाभ्यास का सातवां संस्करण 24 अप्रैल 2025 को उज्बेकिस्तान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
अभ्यास में ड्रोन युद्ध , रॉकेट हमले , स्नाइपर ऑपरेशन , पर्वतारोहण और आतंकी कैंप नष्ट करने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
मुख्य उद्देश्य अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियान क्षमता को बढ़ाना और दोनों सेनाओं की इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना था।
दोनों देशों ने अवैध सशस्त्र समूहों के विरुद्ध छापेमारी, खोज अभियान और संयुक्त योजना निर्माण का अभ्यास किया।
समापन समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने अभ्यास को द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को गहरा करने की दिशा में अहम बताया।
यह अभ्यास SCO ढांचे और भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत मध्य एशिया में सामरिक साझेदारी को नई ऊंचाई देता है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित ऐतिहासिक संयुक्त सैन्य अभ्यास 'डस्टलिक' का सातवां संस्करण शुक्रवार को उज्बेकिस्तान में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस अभ्यास में दोनों देशों के जवानों ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने, घुसपैठ रोकने और युद्धक्षेत्र में ड्रोन के उपयोग जैसी आधुनिक सैन्य रणनीतियों का गहन प्रशिक्षण लिया।

युद्धाभ्यास में क्या-क्या हुआ

इस संयुक्त अभ्यास के दौरान भारतीय और उज्बेकी सेना के जवानों ने अत्यंत तीव्र गोलीबारी को अंजाम दिया और दुश्मन की गोलीबारी का तत्काल जवाब देने की क्षमता का प्रदर्शन किया। रॉकेट हमले, स्नाइपर ऑपरेशन, पर्वतारोहण और रस्सी के सहारे उतरने जैसी विशेष सैन्य गतिविधियां इस अभ्यास का अभिन्न हिस्सा रहीं।

युद्धक्षेत्र में मानव रहित यंत्रों (UAV) और ड्रोन का प्रभावी उपयोग, घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया तथा दुश्मन के ठिकानों की टोही एवं निगरानी — ये सभी इस मिशन के प्रमुख पहलू रहे। आतंकी कैंपों में घुसकर ऑपरेशन चलाने का विशेष अभ्यास भी किया गया।

आतंकवाद-रोधी अभियान पर विशेष फोकस

इस सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियानों की क्षमता को बढ़ाना था। दोनों देशों की सेनाओं ने अवैध सशस्त्र समूहों को निष्क्रिय करने से जुड़े विभिन्न ऑपरेशन, छापेमारी, खोज अभियान और आतंकी ठिकाने नष्ट करने की रणनीतियों का अभ्यास किया।

दोनों देशों के बीच आतंकवाद-रोधी अनुभवों और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान इस अभ्यास की आत्मा रहा। आधुनिक युद्धक रणनीतियों, समन्वित कार्रवाई और विभिन्न परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया।

सामरिक महत्व और इंटरऑपरेबिलिटी

भारतीय सेना के अनुसार, डस्टलिक-7 ने दोनों देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी — यानी एक साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता — को उल्लेखनीय रूप से बेहतर बनाया है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभ्यास से भविष्य में किसी भी संयुक्त मिशन या ऑपरेशन को अधिक कुशलता और समन्वय के साथ अंजाम देने में मदद मिलेगी।

समापन समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने अभ्यास की सफलता पर संतोष व्यक्त किया और इसे द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

व्यापक रणनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि डस्टलिक श्रृंखला का यह सातवां संस्करण ऐसे समय में संपन्न हुआ है जब भारत अपने पड़ोसी देशों और मध्य एशियाई राष्ट्रों के साथ सैन्य सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की रणनीति पर काम कर रहा है। पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठनों के खिलाफ भारत की बढ़ती सक्रियता के मद्देनजर, उज्बेकिस्तान जैसे मध्य एशियाई देशों के साथ इस प्रकार के संयुक्त अभ्यास रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि भारत शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का सदस्य है, जिसमें उज्बेकिस्तान भी शामिल है। इस ढांचे के तहत दोनों देश आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के विरुद्ध संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। डस्टलिक अभ्यास इसी प्रतिबद्धता की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है।

आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के और विस्तार की संभावना है, जिसमें संयुक्त निगरानी तंत्र, सैन्य प्रौद्योगिकी साझाकरण और उच्च स्तरीय रक्षा वार्ता शामिल हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उज्बेकिस्तान जैसे SCO सदस्य देश के साथ आतंकवाद-रोधी अभ्यास का रणनीतिक संदेश स्पष्ट है। विडंबना यह है कि मुख्यधारा की कवरेज इसे केवल 'सैन्य कवायद' बताकर छोड़ देती है, जबकि यह भारत के 'नेबरहुड प्लस' और 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति की जमीनी परीक्षा है। ड्रोन युद्ध और पर्वतीय अभियानों पर जोर यह भी संकेत देता है कि भारत अपनी सेना को भविष्य के हाइब्रिड युद्ध के लिए तैयार कर रहा है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डस्टलिक युद्धाभ्यास क्या है और यह कहां हुआ?
'डस्टलिक' भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित होने वाला वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है। इसका सातवां संस्करण उज्बेकिस्तान में संपन्न हुआ, जिसमें आतंकवाद-रोधी अभियान और आधुनिक युद्धक रणनीतियों का अभ्यास किया गया।
डस्टलिक-7 में किन-किन चीजों का अभ्यास किया गया?
इस अभ्यास में रॉकेट हमले, स्नाइपर ऑपरेशन, ड्रोन का युद्धक उपयोग, पर्वतारोहण, आतंकी कैंप नष्ट करना और घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास शामिल था। दुश्मन के ठिकानों की टोही और छापेमारी का प्रशिक्षण भी दिया गया।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच डस्टलिक अभ्यास का क्या महत्व है?
यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और सामरिक तालमेल को मजबूत करता है। यह SCO ढांचे के तहत आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के विरुद्ध संयुक्त प्रतिबद्धता की व्यावहारिक अभिव्यक्ति भी है।
डस्टलिक का यह कौन सा संस्करण था?
यह डस्टलिक का सातवां संस्करण था। यह अभ्यास श्रृंखला भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को नियमित रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित की जाती है।
डस्टलिक-7 में ड्रोन का उपयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
आधुनिक युद्ध में ड्रोन और मानव रहित यंत्र निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। इस अभ्यास में इनके युद्धक उपयोग का प्रशिक्षण भारत की सेना को भविष्य के हाइब्रिड और असममित युद्ध के लिए तैयार करता है।
राष्ट्र प्रेस
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