गवाहों को धमकाने पर आंध्र प्रदेश के MLC अनंता बाबू गिरफ्तार, ड्राइवर हत्याकांड में नया मोड़
सारांश
Key Takeaways
- YSRCP के MLC अनंता बाबू को 24 अप्रैल को राजमहेंद्रवरम में गिरफ्तार किया गया।
- उन पर दलित ड्राइवर वीधी सुब्रह्मण्यम की 19 मई 2022 को हुई हत्या के मामले में गवाहों को धमकाने का आरोप है।
- चार गवाहों की शिकायत पर 20 अप्रैल को सरपावरम थाने में नया मामला दर्ज किया गया था।
- तीन गवाहों को अपार्टमेंट में जबरन बंधक बनाने और बड़ी रकम की रिश्वत देने की कोशिश का आरोप है।
- पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए पांच विशेष टीमें गठित की थीं; अनंता बाबू को अब काकीनाडा अदालत में पेश किया जाएगा।
- जून 2024 में टीडीपी सरकार और जुलाई 2025 में एससी/एसटी अदालत ने मामले की पुनः जांच के आदेश दिए थे।
अमरावती, 24 अप्रैल। आंध्र प्रदेश में एक चर्चित दलित हत्याकांड ने नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) से जुड़े विधान परिषद सदस्य (MLC) अनंता बाबू, जिनका असली नाम अनंता उदय भास्कर है, को पुलिस ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया। उन पर अपने दलित ड्राइवर वीधी सुब्रह्मण्यम की हत्या के मामले में गवाहों को धमकाने, रिश्वत देने और बंधक बनाने के गंभीर आरोप हैं।
राजमहेंद्रवरम अदालत के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा
राजमहेंद्रवरम में उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब अनंता बाबू अपनी जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत से बाहर निकले। पहले से तैनात पुलिस बल ने उन्हें तत्काल हिरासत में ले लिया। इस दौरान उनकी पत्नी लक्ष्मी दुर्गा, जो इस मामले में सह-आरोपी हैं, भी उनके साथ मौजूद थीं।
पुलिस अनंता बाबू को काकीनाडा ले जाने की तैयारी में है, जहां उन्हें संबंधित अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से फरार थे और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर रहे थे।
पांच विशेष पुलिस टीमें और नया मामला
अनंता बाबू को पकड़ने के लिए पुलिस ने पांच विशेष टीमें गठित की थीं, जिनमें सर्किल इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल थे। 20 अप्रैल को काकीनाडा के सरपावरम थाने में चार प्रमुख गवाहों की शिकायत पर नया मामला दर्ज किया गया था।
गवाहों ने आरोप लगाया कि अनंता बाबू ने उन्हें अपने बयान बदलने के बदले बड़ी रकम की पेशकश की। जब गवाहों ने रिश्वत लेने से इनकार किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इसके अलावा, तीन गवाहों ने यह भी दावा किया कि उन्हें एक अपार्टमेंट में जबरन बंधक बनाकर रखा गया और बयान बदलने का दबाव बनाया गया।
इन आरोपों के आधार पर अनंता बाबू पर गवाहों से छेड़छाड़ और आपराधिक धमकी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। विशेष लोक अभियोजक मुप्पला सुब्बाराव ने भी अदालत में याचिका दायर कर उनकी जमानत रद्द करने की मांग की थी।
मूल हत्याकांड: 2022 से शुरू हुई कहानी
19 मई 2022 को काकीनाडा में दलित युवक वीधी सुब्रह्मण्यम (34) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। आरोप है कि अनंता बाबू स्वयं रात करीब 2 बजे शव को पीड़ित के घर ले गए और इसे सड़क दुर्घटना बताया।
हालांकि पीड़ित के परिजनों ने इस कहानी को मानने से इनकार कर दिया और हत्या का आरोप लगाया। इसके बाद दलित संगठनों और परिवार ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किए। गिरफ्तारी के बाद YSRCP ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था।
हालांकि, 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण दिसंबर 2022 में उन्हें डिफॉल्ट जमानत मिल गई। यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत चूक थी, जिसने मामले को कमजोर किया।
सत्ता परिवर्तन के बाद मामले में नई जान
जून 2024 में सत्ता में आई टीडीपी गठबंधन सरकार ने इस मामले की दोबारा जांच का फैसला लिया। इसके बाद जुलाई 2025 में एससी/एसटी विशेष अदालत ने भी मामले की पुनः जांच के आदेश दिए।
यह घटनाक्रम उस व्यापक पैटर्न की ओर इशारा करता है, जिसमें सत्ता से जुड़े आरोपी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। गवाहों को धमकाना भारतीय न्याय व्यवस्था की एक गंभीर कमजोरी को उजागर करता है — विशेष रूप से दलित उत्पीड़न के मामलों में, जहां पीड़ित पक्ष पहले से ही संसाधन-संपन्न नहीं होता।
आने वाले दिनों में काकीनाडा की अदालत में अनंता बाबू की पेशी और उनकी जमानत रद्द होने या न होने का फैसला इस मामले की दिशा तय करेगा। एससी/एसटी विशेष अदालत में जांच की प्रगति पर भी सभी की निगाहें टिकी हैं।