एआई-आधारित शहरी विकास: भारत-जापान के बीच ऐतिहासिक डेटा साझेदारी समझौता
सारांश
Key Takeaways
- डेटाकावेरी सिस्टम्स और वनस्ट्रक्शन इंक. (जापान) के बीच 24 अप्रैल को आईआईएससी बेंगलुरु में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
- इस साझेदारी से भारत के 55 स्मार्ट शहरों में एआई-आधारित शहरी नियोजन को बल मिलेगा।
- समझौते में आईएफसी ओपन स्टैंडर्ड डेटा को आईयूडीएक्स प्लेटफॉर्म से जोड़ना और डिजिटल ट्विन विकसित करना शामिल है।
- जापान के एमईटीआई, एमओएफए और भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
- अशोक कृष्णन (डेटाकावेरी) और लुकास हेवुड (वनस्ट्रक्शन) ने इसे निर्माण डेटा उपयोग में क्रांतिकारी कदम बताया।
- यह पहल निर्माण परियोजनाओं के बाद बेकार पड़े डेटा को शहरी एआई एप्लिकेशन में पुनः उपयोगी बनाएगी।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एआई-आधारित शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु से संबद्ध डेटा प्लेटफॉर्म कंपनी डेटाकावेरी सिस्टम्स और जापान की अग्रणी निर्माण प्रौद्योगिकी कंपनी वनस्ट्रक्शन इंक. के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य निर्माण क्षेत्र के विशाल डेटा भंडार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से शहरी नियोजन में उपयोगी बनाना है। यह समझौता जापान-भारत एआई स्ट्रैटेजिक डायलॉग के दौरान संपन्न हुआ, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
समझौते का स्वरूप और उद्देश्य
डेटाकावेरी सिस्टम्स और वनस्ट्रक्शन इंक. के बीच हुए इस एमओयू का मूल लक्ष्य शहरी और निर्माण क्षेत्र से जुड़े डेटा को एकीकृत करने तथा तकनीकी सहयोग का एक सुदृढ़ ढांचा खड़ा करना है। इस समझौते के अंतर्गत वनस्ट्रक्शन की निर्माण डेटा विशेषज्ञता को डेटाकावेरी के इंटेलिजेंट यूनिवर्सल डेटा एक्सचेंज (आईयूडीएक्स) प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जाएगा।
यह आईयूडीएक्स प्लेटफॉर्म पहले से ही भारत के 55 स्मार्ट शहरों में सक्रिय रूप से उपयोग किया जा रहा है और परिवहन, बिजली, पर्यावरण एवं सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित डेटा का प्रबंधन करता है। इस नई साझेदारी से इन शहरों में एआई-संचालित अनुप्रयोगों और डिजिटल ट्विन तकनीक के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
उच्चस्तरीय सरकारी उपस्थिति में हुआ समझौता
यह ऐतिहासिक समझौता आईआईएससी बेंगलुरु में आयोजित जापान-भारत एआई स्ट्रैटेजिक डायलॉग के मंच पर हुआ। इस आयोजन में जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (एमईटीआई), जापान के विदेश मंत्रालय (एमओएफए) तथा भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस उच्चस्तरीय उपस्थिति से स्पष्ट होता है कि यह साझेदारी केवल व्यावसायिक नहीं, बल्कि दोनों देशों की रणनीतिक तकनीकी कूटनीति का भी हिस्सा है।
गौरतलब है कि भारत और जापान के बीच पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ा है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना से लेकर सेमीकंडक्टर और अब एआई तक — यह साझेदारी उसी व्यापक रणनीतिक दृष्टि का विस्तार है।
निर्माण डेटा की बर्बादी: एक बड़ी समस्या का समाधान
यह पहल एक गंभीर और अनदेखी समस्या को हल करने की दिशा में एक ठोस कदम है। निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ा डेटा प्रायः अलग-अलग एजेंसियों और विभागों में बिखरा रहता है तथा परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह डेटा व्यावहारिक रूप से निष्क्रिय हो जाता है। इस बिखरे हुए डेटा को एक सुरक्षित, मापनीय और इंटरऑपरेबल प्रणाली में एकीकृत कर शहरी नियोजन में उपयोग किया जाएगा।
इस समझौते के तहत दोनों संस्थाएं मिलकर आईएफसी (इंडस्ट्री फाउंडेशन क्लासेज) जैसे ओपन डेटा स्टैंडर्ड को आईयूडीएक्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने, स्मार्ट सिटी के लिए एआई उपयोग विकसित करने और संयुक्त वित्तपोषण के अवसर तलाशने पर काम करेंगी।
विशेषज्ञों की राय और आगे की राह
सीडीपीजी और डेटाकावेरी सिस्टम्स के वाणिज्यिक व्यवसाय एवं राजस्व के उपाध्यक्ष अशोक कृष्णन ने कहा कि निर्माण क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण डेटा मौजूद है, परंतु यह संगठनात्मक सीमाओं में कैद रहता है और व्यक्तिगत परियोजनाओं से परे इसका उपयोग नगण्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि इसे सुव्यवस्थित तरीके से एकीकृत किया जाए, तो यह शहरों की योजना और निर्णय-प्रक्रिया को आमूलचूल बदल सकता है।
वनस्ट्रक्शन के वैश्विक रणनीति उपाध्यक्ष लुकास हेवुड ने इस साझेदारी को निर्माण डेटा को परिवहन, पर्यावरण जैसे अन्य शहरी डेटा स्रोतों से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया।
यह साझेदारी ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार अपने स्मार्ट सिटी मिशन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी कर रही है और एआई को राष्ट्रीय शासन व्यवस्था में मुख्यधारा में लाने पर जोर दे रही है। आने वाले महीनों में इस साझेदारी के तहत पायलट परियोजनाओं की घोषणा और संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों की शुरुआत की संभावना है।