6जी लॉन्च की राह पर भारत: TRAI ने 600 MHz स्पेक्ट्रम की वैधता बढ़ाई, अनिल लाहोटी का बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
भारत की 6जी तैयारी: स्पेक्ट्रम नीति में बड़ा बदलाव
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक 6जी (6G) की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 600 मेगाहर्ट्ज (MHz) स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसे हाई-स्पीड इंटरनेट और अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए सबसे अहम फ्रीक्वेंसी बैंड माना जाता है। TRAI के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने शुक्रवार, 24 अप्रैल 2025 को यह जानकारी साझा की।
स्पेक्ट्रम की उपलब्धता और नेटवर्क दक्षता पर जोर
TRAI चेयरमैन लाहोटी ने स्पष्ट किया कि देश में डेटा खपत की रफ्तार जिस तेज़ी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए स्पेक्ट्रम की उपलब्धता बढ़ाना और नेटवर्क को अधिक कुशल बनाना अनिवार्य हो गया है। 600 MHz बैंड की खासियत यह है कि यह लंबी दूरी तक सिग्नल पहुंचाने और इमारतों के भीतर बेहतर कवरेज देने में सक्षम है, जो 6जी नेटवर्क की रीढ़ बनेगा।
TRAI ने स्पेक्ट्रम के बेहतर उपयोग के लिए इंटर-बैंड स्पेक्ट्रम शेयरिंग और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम को लीज पर देने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। इससे टेलीकॉम कंपनियां अपने मौजूदा संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सकेंगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग और निजी 5जी नेटवर्क
नियामक ने टेलीकॉम कंपनियों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत सरकारी सुविधाओं को साझा करना अनिवार्य होगा, जबकि निजी कंपनियां अपनी सुविधाएं स्वेच्छा से साझा कर सकेंगी। इससे नेटवर्क विस्तार की लागत कम होगी और दूरदराज के इलाकों में भी कनेक्टिविटी सुधरेगी।
TRAI ने कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क (CNPN) के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिससे उद्योग और कारोबारी संस्थाएं अपने निजी 5जी नेटवर्क स्थापित कर सकें। हालांकि, लाहोटी ने माना कि यह क्षेत्र अभी अपेक्षित सफलता नहीं पा सका है और इसे गति देने के लिए सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।
AI युग में डेटा मांग और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का रिकॉर्ड
TRAI चेयरमैन ने चेतावनी दी कि अकेले मोबाइल नेटवर्क भविष्य की डेटा मांग पूरी करने में सक्षम नहीं होंगे, विशेषकर जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। AI-आधारित एप्लिकेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग और IoT डिवाइस — सभी के लिए हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी नेटवर्क अनिवार्य है।
एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में लाहोटी ने बताया कि वर्ष 2025-26 में भारत में 1.7 करोड़ नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर जुड़े, जो देश के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। यह आंकड़ा बताता है कि भारत की डिजिटल भूख तेज़ी से बढ़ रही है।
फाइबर-FWA मॉडल और इनडोर कनेक्टिविटी की चुनौती
भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए फाइबर और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) का मिश्रित मॉडल अपनाना अनिवार्य होगा। TRAI ने सुझाया है कि इमारतों के डिजाइन के समय ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल किया जाए, ताकि इनडोर कनेक्टिविटी की समस्या हल हो सके। सरकार ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया है।
इसके अतिरिक्त, मशीन-टू-मशीन (M2M) कम्युनिकेशन को मजबूत बनाने के लिए भी कई सिफारिशें की गई हैं, जो देश के डिजिटल इकोसिस्टम को और सुदृढ़ करेंगी।
गौरतलब है कि भारत ने 2023 में अपना 6जी विज़न डॉक्यूमेंट जारी किया था और 2030 तक 6जी सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा है। 600 MHz बैंड की वैधता बढ़ाना उसी दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले महीनों में स्पेक्ट्रम नीलामी और 6जी परीक्षण से जुड़े और अहम फैसले सामने आने की उम्मीद है।