7 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

6जी लॉन्च की राह पर भारत: TRAI ने 600 MHz स्पेक्ट्रम की वैधता बढ़ाई, अनिल लाहोटी का बड़ा ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
6जी लॉन्च की राह पर भारत: TRAI ने 600 MHz स्पेक्ट्रम की वैधता बढ़ाई, अनिल लाहोटी का बड़ा ऐलान

सारांश

भारत 6जी की तैयारी में जुटा है और TRAI ने 600 MHz स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता बढ़ाई है। चेयरमैन अनिल लाहोटी ने बताया कि 2025-26 में रिकॉर्ड 1.7 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर जुड़े। AI युग में डेटा मांग पूरी करने के लिए फाइबर-FWA मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग पर जोर दिया जा रहा है।

मुख्य बातें

TRAI ने 6जी नेटवर्क की तैयारी के तहत 600 MHz स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता अवधि बढ़ाई।
TRAI चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने 24 अप्रैल 2025 को यह जानकारी सार्वजनिक की।
2025-26 में भारत में 1.7 करोड़ नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर जुड़े — यह एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड है।
इंटर-बैंड स्पेक्ट्रम शेयरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई।
कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क (CNPN) के लिए दिशानिर्देश जारी, लेकिन इस क्षेत्र में अपेक्षित सफलता अभी नहीं मिली।
भारत का लक्ष्य 2030 तक 6जी सेवाएं लॉन्च करना है; M2M कम्युनिकेशन और AI-रेडी नेटवर्क इसकी प्राथमिकता हैं।

भारत की 6जी तैयारी: स्पेक्ट्रम नीति में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक 6जी (6G) की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 600 मेगाहर्ट्ज (MHz) स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसे हाई-स्पीड इंटरनेट और अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए सबसे अहम फ्रीक्वेंसी बैंड माना जाता है। TRAI के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने शुक्रवार, 24 अप्रैल 2025 को यह जानकारी साझा की।

स्पेक्ट्रम की उपलब्धता और नेटवर्क दक्षता पर जोर

TRAI चेयरमैन लाहोटी ने स्पष्ट किया कि देश में डेटा खपत की रफ्तार जिस तेज़ी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए स्पेक्ट्रम की उपलब्धता बढ़ाना और नेटवर्क को अधिक कुशल बनाना अनिवार्य हो गया है। 600 MHz बैंड की खासियत यह है कि यह लंबी दूरी तक सिग्नल पहुंचाने और इमारतों के भीतर बेहतर कवरेज देने में सक्षम है, जो 6जी नेटवर्क की रीढ़ बनेगा।

TRAI ने स्पेक्ट्रम के बेहतर उपयोग के लिए इंटर-बैंड स्पेक्ट्रम शेयरिंग और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम को लीज पर देने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। इससे टेलीकॉम कंपनियां अपने मौजूदा संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सकेंगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग और निजी 5जी नेटवर्क

नियामक ने टेलीकॉम कंपनियों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत सरकारी सुविधाओं को साझा करना अनिवार्य होगा, जबकि निजी कंपनियां अपनी सुविधाएं स्वेच्छा से साझा कर सकेंगी। इससे नेटवर्क विस्तार की लागत कम होगी और दूरदराज के इलाकों में भी कनेक्टिविटी सुधरेगी।

TRAI ने कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क (CNPN) के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिससे उद्योग और कारोबारी संस्थाएं अपने निजी 5जी नेटवर्क स्थापित कर सकें। हालांकि, लाहोटी ने माना कि यह क्षेत्र अभी अपेक्षित सफलता नहीं पा सका है और इसे गति देने के लिए सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।

AI युग में डेटा मांग और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का रिकॉर्ड

TRAI चेयरमैन ने चेतावनी दी कि अकेले मोबाइल नेटवर्क भविष्य की डेटा मांग पूरी करने में सक्षम नहीं होंगे, विशेषकर जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। AI-आधारित एप्लिकेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग और IoT डिवाइस — सभी के लिए हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी नेटवर्क अनिवार्य है।

एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में लाहोटी ने बताया कि वर्ष 2025-26 में भारत में 1.7 करोड़ नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर जुड़े, जो देश के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। यह आंकड़ा बताता है कि भारत की डिजिटल भूख तेज़ी से बढ़ रही है।

फाइबर-FWA मॉडल और इनडोर कनेक्टिविटी की चुनौती

भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए फाइबर और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) का मिश्रित मॉडल अपनाना अनिवार्य होगा। TRAI ने सुझाया है कि इमारतों के डिजाइन के समय ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल किया जाए, ताकि इनडोर कनेक्टिविटी की समस्या हल हो सके। सरकार ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया है।

इसके अतिरिक्त, मशीन-टू-मशीन (M2M) कम्युनिकेशन को मजबूत बनाने के लिए भी कई सिफारिशें की गई हैं, जो देश के डिजिटल इकोसिस्टम को और सुदृढ़ करेंगी।

गौरतलब है कि भारत ने 2023 में अपना 6जी विज़न डॉक्यूमेंट जारी किया था और 2030 तक 6जी सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा है। 600 MHz बैंड की वैधता बढ़ाना उसी दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले महीनों में स्पेक्ट्रम नीलामी और 6जी परीक्षण से जुड़े और अहम फैसले सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक डिजिटल शक्ति संतुलन में अपनी जगह पक्की करने की रणनीति है। जहां चीन और दक्षिण कोरिया 6जी में पहले स्थान की होड़ में हैं, वहीं भारत 600 MHz स्पेक्ट्रम की वैधता बढ़ाकर और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग को बाध्यकारी बनाकर अपनी नींव मज़बूत कर रहा है — यह दूरदर्शी नीति है। हालांकि, कैप्टिव 5जी नेटवर्क की विफलता और इनडोर कनेक्टिविटी की चुनौती यह भी बताती है कि 5जी अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ, ऐसे में 6जी की घोषणाएं जमीनी हकीकत से आगे न चली जाएं — यह सुनिश्चित करना TRAI और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में 6जी कब लॉन्च होगा?
भारत सरकार ने 2030 तक 6जी सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए TRAI ने 600 MHz स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता बढ़ाने समेत कई नीतिगत कदम उठाए हैं।
600 MHz स्पेक्ट्रम बैंड 6जी के लिए क्यों जरूरी है?
600 MHz बैंड लंबी दूरी तक सिग्नल पहुंचाने और इमारतों के भीतर बेहतर कवरेज देने में सक्षम है। यही कारण है कि इसे 6जी नेटवर्क की आधारशिला माना जाता है।
TRAI ने स्पेक्ट्रम शेयरिंग पर क्या सुझाव दिए हैं?
TRAI ने इंटर-बैंड स्पेक्ट्रम शेयरिंग और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम को लीज पर देने की सिफारिश की है। इसके अलावा सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर की अनिवार्य शेयरिंग का प्रस्ताव भी रखा गया है।
भारत में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर का रिकॉर्ड क्या है?
TRAI चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी के अनुसार, 2025-26 में भारत में 1.7 करोड़ नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर जुड़े, जो देश के इतिहास में एक रिकॉर्ड है।
AI के बढ़ते उपयोग से टेलीकॉम सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा?
TRAI चेयरमैन के अनुसार, AI के बढ़ते उपयोग के कारण डेटा मांग इतनी बढ़ेगी कि अकेले मोबाइल नेटवर्क पर्याप्त नहीं होंगे। इसीलिए फाइबर और FWA का मिश्रित मॉडल अपनाना जरूरी होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले