त्रिशूर पूरम से पहले हाथियों पर अत्याचार: केरल हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
सारांश
Key Takeaways
- केरल हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने 24 अप्रैल को त्रिशूर पूरम से जुड़ी PIL पर नोटिस जारी किया।
- जस्टिस ए.ए. ज़ियाद रहमान और जस्टिस के.वी. जयकुमार की बेंच ने राज्य सरकार, वन विभाग, जिला कलेक्टर और पुलिस प्रमुख को नोटिस दिया।
- तिरुवंबाडी और परमेक्कावु देवस्वम के सचिवों को भी तत्काल नोटिस भेजा गया।
- अदालत ने अंतरिम आदेश देने से इनकार किया क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में समान मामला विचाराधीन है।
- याचिकाकर्ता ने पटाखों के दौरान असली हाथियों की जगह रोबोटिक हाथी उपयोग करने का प्रस्ताव दिया।
- अगली सुनवाई 25 मई, 2025 को होगी।
कोच्चि, 24 अप्रैल। केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को त्रिशूर पूरम उत्सव से ठीक पहले बंदी हाथियों के साथ कथित क्रूर व्यवहार को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह उत्सव 26 अप्रैल को आयोजित होना है। याचिका में मांग की गई है कि पशु कल्याण कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और हाथियों को अनावश्यक पीड़ा से बचाया जाए।
वेकेशन बेंच ने लिया संज्ञान
जस्टिस ए.ए. ज़ियाद रहमान और जस्टिस के.वी. जयकुमार की वेकेशन बेंच ने याचिका को स्वीकार करते हुए कई प्रमुख अधिकारियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। इनमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक, सहायक वन संरक्षक, त्रिशूर और पलक्कड़ के जिला कलेक्टर तथा त्रिशूर के जिला पुलिस प्रमुख शामिल हैं।
सरकारी वकील ने राज्य की ओर से नोटिस स्वीकार कर लिया। वार्षिक उत्सव के मुख्य आयोजकों — तिरुवंबाडी देवस्वम और परमेक्कावु देवस्वम के सचिवों को भी तत्काल नोटिस भेजा गया।
अंतरिम राहत देने से इनकार
हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इसी विषय से जुड़ा एक मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
तिरुवंबाडी देवस्वम बनाम भारत संघ मामले में शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के उन पूर्व निर्देशों पर रोक लगाई थी, जिनमें केरल कैप्टिव एलिफेंट्स (प्रबंधन और रखरखाव) नियम, 2012 को और अधिक कठोरता से लागू करने का आदेश दिया गया था। यह स्थिति एक कानूनी पेचीदगी उत्पन्न करती है — जहां हाईकोर्ट हस्तक्षेप करना चाहता है, वहीं सुप्रीम कोर्ट की रोक उसके हाथ बांधती है।
याचिका में क्या हैं आरोप?
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि केरल के मंदिर उत्सवों — विशेषकर त्रिशूर पूरम — में पशु कल्याण मानदंडों का बड़े पैमाने पर और बार-बार उल्लंघन होता है। याचिका में निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
हाथियों को अत्यंत निकट दूरी से तेज़ आवाज़ वाले पटाखों का सामना करना पड़ता है, जो उनके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से हानिकारक है। उन्हें बिना किसी सुरक्षा दूरी के घनी भीड़ के बीच खड़ा किया जाता है। प्रतिबंधित घंटों में जुलूस निकाले जाते हैं और हाथियों को पर्याप्त आराम, भोजन व पानी से वंचित रखा जाता है।
याचिका के अनुसार, ये प्रथाएं वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, बंदी हाथियों से संबंधित 2012 के नियमों और विभिन्न सरकारी परिपत्रों का सीधा उल्लंघन हैं।
रोबोटिक हाथी का अनूठा प्रस्ताव
याचिकाकर्ता ने एक उल्लेखनीय और नवाचारी सुझाव देते हुए पटाखों के प्रदर्शन के दौरान मूर्तियों को ले जाने के लिए रोबोटिक हाथियों के उपयोग का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने इस वर्ष के उत्सव के लिए तिरुवंबाडी और परमेक्कावु गुटों को ऐसे दो रोबोटिक हाथी उपलब्ध कराने की इच्छा भी व्यक्त की है।
गौरतलब है कि तमिलनाडु के कुछ मंदिरों में पशु अधिकार संगठन PETA इंडिया द्वारा दान किए गए रोबोटिक हाथी पहले से उपयोग में हैं। केरल में भी इस विकल्प की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन परंपरा और धार्मिक भावनाओं के नाम पर इसका विरोध होता रहा है।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह मामला केवल एक उत्सव तक सीमित नहीं है। केरल में 700 से अधिक बंदी हाथी हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। इनमें से अधिकांश मंदिर उत्सवों और धार्मिक जुलूसों में उपयोग किए जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में हाथियों द्वारा महावतों पर हमले और उत्सवों के दौरान अनियंत्रित हो जाने की घटनाएं बढ़ी हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि जानवर भारी तनाव में हैं।
केरल हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 मई, 2025 की तारीख निर्धारित की है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का निर्णय इस PIL की दिशा को किस प्रकार प्रभावित करता है और क्या उत्सव के बाद अदालत कोई कड़ा रुख अपनाती है।