एनएचआरसी का बड़ा एक्शन: झाबुआ में महिला के सार्वजनिक अपमान पर स्वतः संज्ञान, MP-ओडिशा को नोटिस

Click to start listening
एनएचआरसी का बड़ा एक्शन: झाबुआ में महिला के सार्वजनिक अपमान पर स्वतः संज्ञान, MP-ओडिशा को नोटिस

सारांश

एनएचआरसी ने मध्य प्रदेश के झाबुआ में महिला के सार्वजनिक अपमान और ओडिशा के गजपति में स्कूल गेट गिरने से दो छात्राओं की मौत पर स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।

Key Takeaways

  • एनएचआरसी ने मध्य प्रदेश के झाबुआ में महिला के सार्वजनिक अपमान पर 24 अप्रैल 2025 को स्वतः संज्ञान लिया।
  • घटना 13 अप्रैल 2025 को हुई थी — ग्रामीणों ने महिला का सिर मुंडवाया और पति को कंधों पर बैठाकर घुमाया।
  • झाबुआ के जिला मजिस्ट्रेट और एसपी को नोटिस, दो सप्ताह में रिपोर्ट देना अनिवार्य।
  • ओडिशा के गजपति में 15 अप्रैल को स्कूल का लोहे का गेट गिरने से दो छात्राओं की मौत हुई।
  • ओडिशा के मुख्य सचिव और गजपति एसपी को भी एनएचआरसी का नोटिस जारी।
  • दोनों मामलों में एनएचआरसी ने जांच की स्थिति और पीड़ितों को मुआवजे का विवरण मांगा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में एक महिला के कथित सार्वजनिक अपमान की घटना पर 24 अप्रैल 2025 को स्वतः संज्ञान लिया है। आरोप है कि महिला पर किसी अन्य व्यक्ति के साथ भागने का इल्जाम लगाकर ग्रामीणों ने उसका सिर मुंडवाया और उसके पति को उसके कंधों पर बैठाकर सार्वजनिक रूप से घुमाया। यह मामला तब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

झाबुआ घटना: क्या हुआ था उस दिन

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह घटना 13 अप्रैल 2025 को झाबुआ जिले के एक गांव में हुई। ग्रामीणों ने महिला पर लगे आरोपों को आधार बनाकर उसे सजा देने का तथाकथित फैसला सुनाया। इस तरह की समानांतर 'जाति पंचायत' न्याय व्यवस्था संविधान और कानून की सीधी अवहेलना है।

वीडियो वायरल होने के बाद झाबुआ पुलिस हरकत में आई, महिला का पता लगाया, उसे सुरक्षा प्रदान की और मामले में एफआईआर दर्ज की। इस मामले में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

एनएचआरसी का नोटिस और मांगी गई रिपोर्ट

एनएचआरसी ने इस घटना को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए झाबुआ के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है जिसमें जांच की वर्तमान स्थिति और पीड़िता को दिए गए मुआवजे का विवरण होना अनिवार्य है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट की जानकारी सत्य पाई जाती है तो यह मानवाधिकार के घोर उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

ओडिशा स्कूल हादसा: गेट गिरने से दो मासूमों की जान गई

इसी क्रम में एनएचआरसी ने ओडिशा के गजपति जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में हुई दर्दनाक घटना का भी स्वतः संज्ञान लिया। 15 अप्रैल 2025 को स्कूल के प्रवेश द्वार का लोहे का भारी गेट अचानक गिर गया, जिसके नीचे दबकर दो छात्राओं की मौत हो गई। बच्चियां उस वक्त स्कूल के प्रवेश द्वार के पास खेल रही थीं।

स्थानीय लोगों ने तत्काल दोनों बच्चियों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एनएचआरसी ने ओडिशा के मुख्य सचिव और गजपति के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

व्यापक संदर्भ: यह पहली बार नहीं

झाबुआ की यह घटना देश में जाति पंचायतों द्वारा महिलाओं को दी जाने वाली अमानवीय सजाओं की एक लंबी श्रृंखला की कड़ी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में मध्य प्रदेश लगातार शीर्ष राज्यों में बना रहता है। ऐसे मामलों में अक्सर सामाजिक दबाव के चलते पीड़िता शिकायत दर्ज कराने से कतराती है और मामला तभी सामने आता है जब वीडियो वायरल हो जाए — यह व्यवस्थागत विफलता का संकेत है।

वहीं ओडिशा का स्कूल हादसा सरकारी विद्यालयों की जर्जर अवसंरचना की त्रासदी उजागर करता है। देशभर में हर साल स्कूल भवनों की खस्ताहाली से जुड़ी दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जाता।

आने वाले हफ्तों में झाबुआ और गजपति के अधिकारियों को एनएचआरसी के समक्ष जवाब देना होगा। यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई तो आयोग आगे की कार्रवाई और मुआवजे के निर्देश दे सकता है।

Point of View

बल्कि उस समानांतर 'जाति-न्याय' व्यवस्था का आईना है जो संविधान को चुनौती देती रहती है — और प्रशासन तब तक आंखें मूंदे रहता है जब तक वीडियो वायरल न हो जाए। एनएचआरसी का हस्तक्षेप स्वागतयोग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि पुलिस को वीडियो से पहले खबर क्यों नहीं थी? ओडिशा का स्कूल हादसा भी उसी नौकरशाही लापरवाही की कड़ी है जहां बच्चों की जान सस्ती है और जवाबदेही नोटिस तक सिमट जाती है। जब तक दोषियों को कड़ी सजा और पीड़ितों को त्वरित मुआवजा नहीं मिलता, ऐसे नोटिस महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाते हैं।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

झाबुआ में महिला के साथ क्या हुआ था?
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में 13 अप्रैल 2025 को ग्रामीणों ने एक महिला पर किसी अन्य व्यक्ति के साथ भागने का आरोप लगाकर उसका सिर मुंडवाया और उसके पति को उसके कंधों पर बैठाकर सार्वजनिक रूप से घुमाया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारियां कीं।
एनएचआरसी ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने झाबुआ के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में जांच की स्थिति और पीड़िता को दिए गए मुआवजे का विवरण देना अनिवार्य किया गया है।
ओडिशा के गजपति में स्कूल हादसा कब और कैसे हुआ?
15 अप्रैल 2025 को गजपति जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय का लोहे का गेट अचानक गिर गया, जिसके नीचे दबकर दो छात्राओं की मौत हो गई। बच्चियां उस समय स्कूल के प्रवेश द्वार के पास खेल रही थीं।
एनएचआरसी ने ओडिशा मामले में किसे नोटिस दिया?
एनएचआरसी ने ओडिशा के मुख्य सचिव और गजपति के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
क्या झाबुआ मामले में कोई गिरफ्तारी हुई?
हां, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने महिला को सुरक्षा प्रदान की, एफआईआर दर्ज की और मामले में कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच जारी है।
Nation Press