बड़ा फैसला: 6 पाकिस्तानी तस्करों को 20 साल की कठोर सजा, ₹384 करोड़ की हेरोइन जब्त
सारांश
Key Takeaways
- कच्छ की विशेष NDPS अदालत ने 24 अप्रैल 2025 को छह पाकिस्तानी नागरिकों को दोषी करार दिया।
- प्रत्येक आरोपी को 20 साल की कठोर कारावास और ₹2 लाख जुर्माना की सजा सुनाई गई।
- 20 दिसंबर 2021 को अरब सागर में ATS और तटरक्षक बल के संयुक्त ऑपरेशन में 76,936 ग्राम हेरोइन जब्त हुई।
- बरामद हेरोइन की कुल कीमत ₹384.68 करोड़ आंकी गई — यह एक बड़ी जब्ती है।
- मुकदमे में 203 दस्तावेजी सबूत पेश किए गए और 13 गवाहों के बयान दर्ज हुए।
- अदालत ने इसे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं को नशे में धकेलने की सुनियोजित साजिश करार दिया।
भुज, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के कच्छ जिले की भुज छठी अतिरिक्त सत्र एवं विशेष NDPS अदालत ने छह पाकिस्तानी नागरिकों को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। ये सभी आरोपी दिसंबर 2021 में भारत की समुद्री सीमा के रास्ते ₹384.68 करोड़ की हेरोइन की तस्करी करते हुए पकड़े गए थे। न्यायाधीश वी.ए. बाधु ने सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
ऑपरेशन की पूरी कहानी
दिसंबर 2021 में गुजरात एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को डिप्टी एसपी भावेश रोजिया के माध्यम से खुफिया सूचना मिली कि 'अल हुसैनी' नामक एक पाकिस्तानी नाव कराची से हेरोइन की बड़ी खेप लेकर भारतीय समुद्री सीमा की ओर बढ़ रही है। यह खेप जखाऊ तट से करीब 35 समुद्री मील की दूरी पर पहुंचाई जानी थी।
सूचना मिलते ही ATS ने भारतीय तटरक्षक बल के साथ मिलकर 18 से 20 दिसंबर 2021 के बीच एक संयुक्त समुद्री ऑपरेशन चलाया। 20 दिसंबर की रात करीब 2:30 बजे अरब सागर में गश्त के दौरान एक संदिग्ध नाव रडार पर पकड़ में आई।
तटरक्षक बल ने तत्काल उस नाव को घेर लिया। नाव पर सवार छह लोगों को हिरासत में लिया गया। तलाशी के दौरान नाव से पांच बड़े बैग बरामद हुए जिनमें कुल 76,936 ग्राम हेरोइन छिपाई गई थी।
आरोपियों की पहचान
सभी छह आरोपी कराची, पाकिस्तान के निवासी हैं। उनकी पहचान इस प्रकार हुई:
मोहम्मद इमरान मोहम्मद तारिक वाघेरा (31), दानिश मोहम्मद हुसैन कच्छी वाघेरा (24), सागर मोहम्मद कच्छी वाघेरा (23), इस्माइल इब्राहिम बादला (45), मोहम्मद साजिद मोहम्मद हुसैन याकुबला कुंगरा (24) और अशफाक मोहम्मद इशाक वाघेरा (26)।
गिरफ्तारी के बाद ATS पुलिस इंस्पेक्टर एम.सी. नायक की शिकायत पर NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच की जिम्मेदारी पुलिस सब-इंस्पेक्टर आर.आर. राठौड़ को सौंपी गई।
अदालत का फैसला और अहम टिप्पणी
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मुख्य जिला सरकारी वकील एच.बी. जडेजा ने पैरवी की। अदालत के सामने 203 दस्तावेजी सबूत पेश किए गए और 13 गवाहों के बयान दर्ज हुए।
सभी साक्ष्यों और दलीलों की समीक्षा के बाद अदालत ने छहों आरोपियों को दोषी करार दिया। प्रत्येक को 20 साल की कठोर कैद के साथ ₹2 लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यह साजिश भारत के युवाओं को नशे की लत में धकेलने और देश को भीतर से कमजोर करने की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा थी। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि नशे की समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा संकट है।
गहरा संदर्भ: पाकिस्तान से ड्रग तस्करी का बड़ा खतरा
यह मामला अकेला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में गुजरात ATS और तटरक्षक बल ने अरब सागर मार्ग से कई बड़ी ड्रग खेपें जब्त की हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान-अफगानिस्तान से आने वाली हेरोइन भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों को निशाना बनाकर देश के भीतर फैलाई जाती है।
गौरतलब है कि भारत सरकार के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के आंकड़े बताते हैं कि समुद्री मार्ग से ड्रग तस्करी की घटनाओं में पिछले पांच वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ₹384.68 करोड़ की यह खेप अब तक की सबसे बड़ी जब्तियों में से एक मानी जा रही है।
इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि अन्य लंबित ड्रग तस्करी मामलों में भी अदालतें सख्त रुख अपनाएंगी। भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री निगरानी क्षमता को और मजबूत करने की मांग भी इस फैसले के बाद तेज हो सकती है।