ऐतिहासिक FTA से पहले पीयूष गोयल ने टॉड मैक्ले का किया स्वागत, 27 अप्रैल को होगा भारत-न्यूजीलैंड समझौता
सारांश
Key Takeaways
- वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 25 अप्रैल 2026 को न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले का नई दिल्ली में स्वागत किया।
- भारत-न्यूजीलैंड FTA पर 27 अप्रैल 2026 को आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे।
- न्यूजीलैंड के PM क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि इससे निर्यातकों को 70 से अधिक देशों में कारोबार करने में मदद मिलेगी।
- समझौते से आयात शुल्क (टैरिफ) चरणबद्ध तरीके से घटाए जाएंगे, जिससे व्यापार आसान होगा।
- भारत के लिए यह ऑस्ट्रेलिया ECTA के बाद दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में दूसरा बड़ा व्यापार समझौता है।
- भारतीय IT, फार्मास्युटिकल और टेक्सटाइल क्षेत्र को न्यूजीलैंड के बाजार में नई पहुंच मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2026 — वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले का भारत में औपचारिक स्वागत किया। यह महत्वपूर्ण मुलाकात 27 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर से ठीक दो दिन पहले हुई। इस समझौते को दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक नया मील का पत्थर माना जा रहा है।
मंत्री गोयल का संदेश — नई साझेदारी की शुरुआत
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि टॉड मैक्ले का भारत में स्वागत करना उनके लिए हर्ष की बात है, क्योंकि यह यात्रा भारत और न्यूजीलैंड के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 27 अप्रैल 2026 को होने वाली भारत-न्यूजीलैंड FTA साइनिंग से पहले यह दौरा दोनों देशों के बीच आपसी भरोसे, साझा मूल्यों और समान आर्थिक विकास के दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
न्यूजीलैंड के PM लक्सन का ऐलान — व्यापार बाधाएं होंगी कम
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पहले ही सोशल मीडिया पर घोषणा कर दी थी कि सोमवार, 27 अप्रैल को भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
एक वीडियो संदेश में लक्सन ने बताया कि इस समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारतीय बाजार में बेहतर और सुलभ पहुंच मिलेगी। उन्होंने खासतौर पर उन कंपनियों का उल्लेख किया जो मरीन जेट सिस्टम बनाती हैं और जिनके उत्पाद 70 से अधिक देशों में निर्यात होते हैं।
लक्सन के अनुसार, फिलहाल कई निर्यातकों को भारत में माल भेजते समय ऊंचे आयात शुल्क (टैरिफ) का सामना करना पड़ता है। FTA लागू होने के बाद ये शुल्क चरणबद्ध तरीके से घटाए जाएंगे, जिससे व्यापार अधिक प्रतिस्पर्धी और लाभदायक बनेगा।
FTA से दोनों देशों को क्या मिलेगा फायदा
इस समझौते से न्यूजीलैंड में व्यापार, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा कि इससे अधिक नौकरियां, बेहतर वेतन और नए व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे।
भारत के नजरिए से देखें तो यह FTA दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में भारत की व्यापारिक उपस्थिति को मजबूत करेगा। भारत पहले से ऑस्ट्रेलिया के साथ ECTA (आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता) कर चुका है और अब न्यूजीलैंड के साथ यह डील उस क्षेत्रीय रणनीति का विस्तार है।
ऐतिहासिक संदर्भ — कब से चल रही थी बातचीत
भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA को लेकर वार्ता वर्षों से चल रही थी। 2010 के दशक में कई दौर की बातचीत के बावजूद यह समझौता अटका रहा, मुख्यतः डेयरी उत्पादों, कृषि वस्तुओं और बाजार पहुंच को लेकर मतभेदों के कारण। 2023 में दोनों देशों ने वार्ता को नए सिरे से शुरू किया और अब 2026 में यह ऐतिहासिक समझौता साकार होने जा रहा है।
गौरतलब है कि भारत इन दिनों कई देशों के साथ एक साथ FTA वार्ता आगे बढ़ा रहा है — जिनमें यूके, यूरोपीय संघ, कनाडा और खाड़ी देश शामिल हैं। यह भारत की 'व्यापार विविधीकरण' नीति का हिस्सा है जो किसी एक बाजार पर निर्भरता कम करती है।
आम जनता और उद्योग पर असर
भारतीय उपभोक्ताओं के लिए इस FTA का सबसे सीधा असर न्यूजीलैंड से आने वाले उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है — जैसे डेयरी उत्पाद, ऊन, लकड़ी और समुद्री खाद्य। हालांकि डेयरी क्षेत्र को लेकर भारत की संवेदनशीलता को देखते हुए इस पर विशेष सुरक्षात्मक प्रावधान रखे जाने की संभावना है।
भारतीय IT, फार्मास्युटिकल और टेक्सटाइल उद्योग को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है, जो दीर्घकालिक रूप से भारतीय निर्यात और रोजगार के लिए सकारात्मक संकेत है।
27 अप्रैल 2026 को जैसे ही दोनों देश इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, यह भारत के FTA इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ जाएगा। आने वाले महीनों में इस समझौते के अनुसमर्थन (ratification) और क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिस पर दोनों देशों के उद्योग जगत की नजरें टिकी रहेंगी।