एग्री-टेक राजधानी बने बेंगलुरु — CM सिद्दारमैया का बड़ा विजन, किसानों को AI तकनीक से जोड़ने का आह्वान

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एग्री-टेक राजधानी बने बेंगलुरु — CM सिद्दारमैया का बड़ा विजन, किसानों को AI तकनीक से जोड़ने का आह्वान

सारांश

CM सिद्दारमैया ने बेंगलुरु को एग्री-टेक की वैश्विक राजधानी बनाने का विजन पेश किया। ग्लोबल एग्री टेक समिट-2026 में 83 लाख किसानों को ₹70,000 करोड़ ऋण और AI तकनीक से जोड़ने की बात कही। युवाओं को खेती की ओर लौटाने के लिए कृषि को लाभदायक बनाना सरकार की प्राथमिकता।

Key Takeaways

  • CM सिद्दारमैया ने 24 अप्रैल 2026 को ग्लोबल एग्री टेक समिट-2026 में बेंगलुरु को एग्री-टेक की वैश्विक राजधानी बनाने का विजन रखा।
  • कर्नाटक के 83 लाख किसानों को ₹70,000 करोड़ के कृषि ऋण वितरित किए जा चुके हैं।
  • कृषि बुनियादी ढांचे के लिए पिछले वर्ष ₹8,000 करोड़ आवंटित किए गए।
  • कृषि भाग्य योजना को सूखा प्रभावित किसानों के लिए पुनः शुरू किया गया है; BJP पर इसे बंद करने का आरोप लगाया गया।
  • AI और आधुनिक तकनीक को खेती में अपनाने पर जोर, युवाओं को कृषि की ओर लौटाने का लक्ष्य।
  • कर्नाटक सूखाग्रस्त भूमि के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है, जो कृषि नवाचार को और जरूरी बनाता है।

बेंगलुरु, 24 अप्रैल। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शुक्रवार को ग्लोबल एग्री टेक समिट-2026 के उद्घाटन अवसर पर ऐतिहासिक विजन पेश करते हुए कहा कि बेंगलुरु को जिस तरह आईटी उद्योग की वैश्विक राजधानी के रूप में पहचाना जाता है, उसी तर्ज पर अब उसे कृषि तकनीक (एग्री-टेक) का भी अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेती में नवाचार तभी सार्थक होगा जब उसका लाभ प्रत्येक किसान तक सीधे पहुंचे।

समिट में क्या बोले मुख्यमंत्री?

यह समिट कर्नाटक वाणिज्य एवं उद्योग मंडल संघ (FKCCI) द्वारा आयोजित की गई थी। सीएम सिद्दारमैया ने कहा कि कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों को अपनाना अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुका है।

उन्होंने कहा, "अगर खेती लाभदायक बनेगी, तो युवा खुद-ब-खुद इस क्षेत्र की ओर लौटेंगे।" उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज की युवा पीढ़ी कृषि से मुंह मोड़ रही है, जो देश के लिए दीर्घकालिक खतरा है।

मुख्यमंत्री ने समिट में आयोजित ऑर्गेनिक खेती और कृषि मशीनरी प्रदर्शनी की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि इस तरह की प्रदर्शनियां अलग और बड़े पैमाने पर आयोजित की जाएं ताकि उनका प्रभाव अधिकतम हो सके।

कृषि ऋण और बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश

सीएम सिद्दारमैया ने बताया कि राज्य के करीब 83 लाख किसानों को ₹70,000 करोड़ के कृषि ऋण वितरित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, पिछले वित्त वर्ष में कृषि बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ₹8,000 करोड़ आवंटित किए गए।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक औद्योगिक और ग्रामीण विकास में देश में अग्रणी है, लेकिन कृषि क्षेत्र में निवेश को और गति देना जरूरी है।

कृषि भाग्य योजना और BJP पर आरोप

मुख्यमंत्री ने 'कृषि भाग्य योजना' का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि यह योजना विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों की सहायता के लिए बनाई गई थी। कर्नाटक देश में सूखाग्रस्त भूमि के मामले में दूसरे स्थान पर है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने इस महत्वपूर्ण योजना को बंद कर दिया था, जिसे उनकी वर्तमान सरकार ने पुनः बहाल किया है। यह आरोप राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले किसान वोट बैंक को साधने की कोशिश स्पष्ट दिखती है।

बड़ी तस्वीर — IT के बाद अब एग्री-टेक की बारी?

गौरतलब है कि बेंगलुरु पहले से ही देश का सबसे बड़ा IT और स्टार्टअप हब है। यदि यही पारिस्थितिकी तंत्र कृषि तकनीक के क्षेत्र में विकसित हो, तो यह न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे दक्षिण भारत के किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो इज़राइल और नीदरलैंड जैसे देश एग्री-टेक में वैश्विक नेता हैं। भारत के पास विशाल कृषि भूमि और युवा तकनीकी प्रतिभा दोनों हैं — बस नीतिगत इच्छाशक्ति और निरंतर निवेश की दरकार है।

आने वाले महीनों में कर्नाटक सरकार की एग्री-टेक नीति का खाका सामने आने की उम्मीद है। उद्योग जगत और किसान संगठन दोनों की निगाहें इस पर टिकी रहेंगी।

Point of View

लेकिन विरोधाभास यह है कि जिस राज्य में 83 लाख किसानों को ऋण देने की बात हो रही है, वहां कृषि भाग्य योजना जैसी बुनियादी स्कीम को पिछली सरकार ने बंद कर दिया था — यह दर्शाता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अस्थिर है। बेंगलुरु का IT मॉडल तब सफल हुआ जब सरकार ने निरंतर नीतिगत समर्थन और निजी निवेश को एकसाथ जोड़ा — एग्री-टेक के लिए भी यही फॉर्मूला चाहिए, सिर्फ समिट और भाषण नहीं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह विजन 2028 के चुनावों के बाद भी जीवित रहेगा।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

ग्लोबल एग्री टेक समिट-2026 क्या है और यह कहां हुआ?
ग्लोबल एग्री टेक समिट-2026 बेंगलुरु में कर्नाटक वाणिज्य एवं उद्योग मंडल संघ (FKCCI) द्वारा आयोजित किया गया। इसमें कृषि तकनीक, AI और आधुनिक खेती के तरीकों पर चर्चा हुई।
CM सिद्दारमैया ने किसानों के लिए क्या घोषणाएं कीं?
सीएम सिद्दारमैया ने बताया कि कर्नाटक के 83 लाख किसानों को ₹70,000 करोड़ के कृषि ऋण दिए गए हैं और बुनियादी ढांचे के लिए ₹8,000 करोड़ आवंटित किए गए। कृषि भाग्य योजना को भी पुनः शुरू किया गया है।
कृषि भाग्य योजना क्या है और इसे क्यों बंद किया गया था?
कृषि भाग्य योजना कर्नाटक के सूखा प्रभावित किसानों की सहायता के लिए बनाई गई थी। CM सिद्दारमैया के अनुसार पूर्ववर्ती BJP सरकार ने इसे बंद कर दिया था, जिसे उनकी सरकार ने फिर से चालू किया है।
बेंगलुरु को एग्री-टेक हब बनाने की योजना क्यों महत्वपूर्ण है?
बेंगलुरु पहले से IT का वैश्विक केंद्र है और यहां तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत है। यदि यही ढांचा कृषि तकनीक में लगाया जाए तो किसानों की आय बढ़ सकती है और युवा भी खेती की ओर आकर्षित होंगे।
कर्नाटक में सूखाग्रस्त भूमि की स्थिति क्या है?
कर्नाटक देश में सूखाग्रस्त भूमि के मामले में दूसरे स्थान पर है। इसीलिए कृषि भाग्य योजना जैसी स्कीमें राज्य के किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
Nation Press