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मिथोस एआई से 'अभूतपूर्व' खतरा: वित्त मंत्री सीतारमण ने बैंकों को किया सतर्क

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मिथोस एआई से 'अभूतपूर्व' खतरा: वित्त मंत्री सीतारमण ने बैंकों को किया सतर्क

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एंथ्रोपिक के मिथोस एआई मॉडल से बैंकिंग सेक्टर को 'अभूतपूर्व' खतरे की चेतावनी दी। MeitY को अंतरराष्ट्रीय समन्वय और IBA को बैंकों के बीच सामूहिक रणनीति बनाने का निर्देश दिया गया। नियामक ढांचे को अपडेट करने के संकेत भी दिए गए।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 24 अप्रैल 2025 को एंथ्रोपिक के मिथोस एआई मॉडल से बैंकिंग सेक्टर को 'अभूतपूर्व' खतरे की चेतावनी दी।
MeitY को अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर मिथोस एआई के जोखिमों का आकलन करने का निर्देश दिया गया।
भारतीय बैंक संघ (IBA) सभी बैंकों के बीच समन्वित चर्चा का नेतृत्व करेगा और सामूहिक सुरक्षा रणनीति तैयार करेगा।
मौजूदा साइबर सुरक्षा नियामक ढांचे को अपडेट करने के संकेत दिए गए हैं।
6 अप्रैल 2025 को NIPFP कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा था कि RBI के पास नीतिगत फैसले लेने की पर्याप्त गुंजाइश है।
भारतीय बैंक वर्तमान में मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन एआई तकनीक की गति के साथ अतिरिक्त सतर्कता अनिवार्य है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को एंथ्रोपिक के मिथोस एआई मॉडल से उत्पन्न 'अभूतपूर्व' साइबर खतरों को लेकर भारतीय बैंकों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तेज़ी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के चलते बैंकिंग प्रणाली को पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई मॉडलों की बढ़ती ताकत को लेकर वित्तीय संस्थानों में चिंता गहरा रही है।

मिथोस एआई: क्यों है यह खतरनाक?

एंथ्रोपिक का मिथोस एआई मॉडल अपनी उन्नत संज्ञानात्मक क्षमताओं और स्वायत्त निर्णय लेने की शक्ति के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल परंपरागत साइबर सुरक्षा तंत्रों को भेदने में सक्षम हो सकता है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत इस मॉडल से जुड़े संभावित जोखिमों पर पैनी नज़र बनाए हुए है।

सीतारमण ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इस मामले में अन्य देशों की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य मिथोस एआई के जोखिमों का व्यापक मूल्यांकन करना और भारतीय बैंकिंग तंत्र पर इसके संभावित असर को समझना है।

बैंकों को क्या निर्देश दिए गए?

वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय बैंक संघ (IBA) इस विषय पर सभी बैंकों के बीच समन्वित चर्चा का नेतृत्व करेगा। बैंकों को आपस में सहयोग करके एक सामूहिक रणनीति तैयार करने को कहा गया है ताकि पूरे बैंकिंग क्षेत्र की तकनीकी सुरक्षा को और सुदृढ़ किया जा सके।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा नियामक ढांचे और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को अपडेट करने की आवश्यकता पड़ सकती है, ताकि नई और जटिल एआई-आधारित चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

भारतीय बैंकिंग तंत्र की मौजूदा स्थिति

सीतारमण ने स्पष्ट किया कि भारतीय बैंक वर्तमान में मजबूत और स्थिर स्थिति में हैं। हालांकि, एआई तकनीक की अभूतपूर्व गति और जटिलता को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतना समय की मांग है। उनका यह बयान एक दिन पहले दिए गए उस वक्तव्य के बाद आया जिसमें उन्होंने मिथोस एआई से जुड़े खतरों को 'अभूतपूर्व' करार दिया था।

गौरतलब है कि इसी महीने 6 अप्रैल को राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (NIPFP) के कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा था कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास ब्याज दरें घटाने और नीतिगत फैसले लेने की पर्याप्त गुंजाइश है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत की रणनीति

यह पहली बार नहीं है जब किसी देश की सरकार ने एआई मॉडलों से बैंकिंग क्षेत्र को होने वाले खतरों पर चिंता जताई हो। यूरोपीय संघ और अमेरिका में भी एआई रेगुलेशन को लेकर गहन बहस चल रही है। भारत का MeitY के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग करना यह दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे को केवल घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौती के रूप में देख रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि एआई मॉडलों की बढ़ती स्वायत्तता से फिशिंग अटैक, डीपफेक फ्रॉड और स्वचालित साइबर हमलों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। बैंकिंग क्षेत्र, जो पहले से डिजिटल धोखाधड़ी की चुनौतियों से जूझ रहा है, के लिए यह एक नया और कहीं अधिक परिष्कृत खतरा है।

आने वाले हफ्तों में IBA की बैठकों और MeitY के अंतरराष्ट्रीय समन्वय के नतीजों पर सबकी नज़र रहेगी। यह भी देखना होगा कि RBI इस संदर्भ में कोई नया साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश जारी करता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संभावित हथियार बन रहे हैं। विडंबना यह है कि भारत एक तरफ 'एआई सुपरपावर' बनने का सपना देखता है और दूसरी तरफ उसी एआई से अपने बैंकिंग तंत्र को बचाने की जुगत में है। MeitY का अंतरराष्ट्रीय सहयोग सही दिशा में कदम है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत का नियामक ढांचा उस गति से बदलेगा जिस गति से एआई तकनीक विकसित हो रही है — अतीत में साइबर फ्रॉड दिशानिर्देशों में देरी इस संशय को बल देती है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिथोस एआई से बैंकों को क्या खतरा है?
एंथ्रोपिक का मिथोस एआई मॉडल अपनी उन्नत और स्वायत्त क्षमताओं के कारण बैंकिंग साइबर सुरक्षा तंत्र को भेदने में सक्षम हो सकता है। इससे डीपफेक फ्रॉड, स्वचालित साइबर हमले और फिशिंग अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने बैंकों को क्या निर्देश दिया?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को आपस में मिलकर काम करने और सतर्क रहने का निर्देश दिया। भारतीय बैंक संघ (IBA) इस विषय पर सभी बैंकों के बीच समन्वित चर्चा का नेतृत्व करेगा।
MeitY मिथोस एआई के खतरे से निपटने के लिए क्या कर रहा है?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) अन्य देशों की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर मिथोस एआई के जोखिमों का आकलन कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय बैंकिंग तंत्र पर इसके असर को समझना और उचित सुरक्षा उपाय करना है।
क्या भारतीय बैंक अभी सुरक्षित हैं?
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि भारतीय बैंक वर्तमान में मजबूत और स्थिर स्थिति में हैं। हालांकि, एआई तकनीक की तेज़ी से बदलती प्रकृति को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।
क्या बैंकिंग साइबर सुरक्षा नियम बदलेंगे?
वित्त मंत्री ने संकेत दिया है कि मौजूदा नियामक ढांचे और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को अपडेट करने की आवश्यकता पड़ सकती है। यह बदलाव नई और जटिल एआई-आधारित तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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