अंतरिक्ष में बनेगा IV फ्लूइड: नासा की ऐतिहासिक तकनीक से मंगल मिशन को मिलेगी संजीवनी
सारांश
Key Takeaways
- नासा ग्लेन रिसर्च सेंटर ने IVGen Mini तकनीक विकसित की है जो अंतरिक्ष में ही IV फ्लूइड तैयार करती है।
- यह सिस्टम 11 अप्रैल 2025 को NG CRS-24 मिशन के जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पहुंचाया गया।
- मई 2025 में ISS पर दो दिनों में लगभग 10 लीटर IV द्रव तैयार किया जाएगा।
- पहले से पैक IV फ्लूइड की शेल्फ लाइफ केवल 16 महीने होती है, जबकि गहरे अंतरिक्ष मिशन 3 वर्ष या उससे अधिक चलते हैं।
- वर्तमान मॉडल प्रति घंटे 1.2 लीटर IV तरल बना सकता है और लगभग 30 प्रतिशत मेडिकल समस्याओं का उपचार करने में सक्षम है।
- मूल IVGen सिस्टम का प्रदर्शन 2010 में ISS पर हुआ था; Mini संस्करण उसका उन्नत और कॉम्पैक्ट रूप है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है — अब अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में ही इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड तैयार कर सकेंगे। नासा ग्लेन रिसर्च सेंटर, क्लीवलैंड के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह तकनीक चंद्रमा, मंगल ग्रह और अन्य गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
क्यों जरूरी है अंतरिक्ष में IV फ्लूइड?
हर मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन में IV यानी इंट्रावेनस द्रव की थैलियां अनिवार्य रूप से साथ ले जाई जाती हैं। सोडियम क्लोराइड और शुद्ध पानी का यह सरल मिश्रण उड़ान के दौरान निर्जलीकरण, जलन और अन्य चिकित्सीय आपात स्थितियों में काम आता है। यह लगभग 30 प्रतिशत सामान्य मेडिकल समस्याओं का उपचार करने में सक्षम है।
समस्या यह है कि पहले से पैक किए गए IV द्रव की शेल्फ लाइफ केवल 16 महीने होती है। जबकि पृथ्वी की निचली कक्षा से परे जाने वाले मिशन तीन वर्ष या उससे अधिक समय तक चल सकते हैं। ऐसे में एक्सपायर होने का जोखिम और सीमित भंडारण स्थान एक बड़ी चुनौती बन जाते हैं।
IVGen Mini — तकनीक का नया अवतार
इस चुनौती से निपटने के लिए नासा ने IVGen Mini नामक एक उन्नत और कॉम्पैक्ट प्रणाली विकसित की है। यह सिस्टम अंतरिक्ष में उपलब्ध पानी को छानकर उसमें से कण और खनिज आयन पूरी तरह हटा देता है। इसके बाद शुद्ध पानी को पूर्व-निर्धारित मात्रा में सोडियम क्लोराइड के साथ मिलाकर रोगाणुरहित और चिकित्सा-उपयोगी IV द्रव तैयार किया जाता है।
यह IVGen का दूसरा और बेहतर संस्करण है। मूल प्रणाली का प्रदर्शन वर्ष 2010 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर किया गया था, लेकिन वह काफी बड़ी और भारी थी। वैज्ञानिकों ने वर्षों की मेहनत से उसे छोटा, हल्का और अधिक कुशल बनाया है।
ISS पर परीक्षण की तैयारी
IVGen Mini को 11 अप्रैल को नासा के नॉर्थ्रोप ग्रुम्मन कमर्शियल रीसप्लाई सर्विसेज-24 (NG CRS-24) मिशन के जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर भेजा गया। नासा ग्लेन की इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मैनेजर कर्टनी श्कुरको के अनुसार, मई 2025 में इसके अस्थायी संचालन की योजना है।
अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद दल दो दिनों तक इस सिस्टम को संचालित करेगा और लगभग 10 लीटर IV द्रव तैयार करेगा। इस द्रव को पृथ्वी पर वापस लाकर सभी चिकित्सीय मानकों पर परखा जाएगा।
मंगल मिशन के लिए व्यावहारिक समाधान
श्कुरको ने स्पष्ट किया, "अगर मंगल मिशन में 100 लीटर IV फ्लूइड ले जाना हो तो एक-एक लीटर के 100 बैग अत्यधिक जगह घेरेंगे। IVGen Mini बहुत कम स्थान लेता है और जरूरत पड़ने पर ताजा द्रव तैयार करता है — यह एक्सपायरी के जोखिम को पूरी तरह खत्म कर देता है।"
वर्तमान मॉडल प्रति घंटे 1.2 लीटर IV तरल तैयार कर सकता है। इसकी क्षमता गहरे अंतरिक्ष में संभावित चिकित्सीय आपात स्थितियों के विश्लेषण के आधार पर निर्धारित की गई है।
व्यापक संदर्भ और भविष्य की संभावनाएं
यह तकनीक नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम और मंगल अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि अंतरिक्ष में चिकित्सा आपूर्ति की सीमा हमेशा से दीर्घकालिक मिशनों की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रही है। अगर ISS पर यह परीक्षण सफल रहा, तो यह तकनीक न केवल अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष में दीर्घकालिक मानव उपस्थिति की नींव भी रखेगी।
आने वाले महीनों में ISS से पृथ्वी पर वापस आए द्रव के परीक्षण परिणाम तय करेंगे कि यह तकनीक भविष्य के मिशनों में मानक उपकरण के रूप में शामिल होगी या नहीं।