भारतीय शेयर बाजार में साप्ताहिक भारी गिरावट: सेंसेक्स 2.3%25 और निफ्टी 1.9%25 टूटा, आईटी सेक्टर 10%25 धराशायी

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भारतीय शेयर बाजार में साप्ताहिक भारी गिरावट: सेंसेक्स 2.3%25 और निफ्टी 1.9%25 टूटा, आईटी सेक्टर 10%25 धराशायी

सारांश

पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान और कच्चे तेल के 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से इस सप्ताह सेंसेक्स 2.3%25 और निफ्टी 1.9%25 गिरा। आईटी सेक्टर में 10%25 की भारी बिकवाली रही, जबकि डीआईआई ने 9,782 करोड़ की खरीदारी से बाजार को संभाला।

Key Takeaways

  • सेंसेक्स इस सप्ताह 2.3 प्रतिशत और निफ्टी50 1.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
  • आईटी सेक्टर में करीब 10 प्रतिशत की भारी बिकवाली रही, जो सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा।
  • कच्चे तेल की कीमतें 15 प्रतिशत उछलकर 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचीं।
  • एफआईआई ने 1,369 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जबकि डीआईआई ने 9,782 करोड़ रुपए की खरीदारी की।
  • शुक्रवार, 25 अप्रैल को सेंसेक्स 76,664.21 और निफ्टी 23,897.95 पर बंद हुआ।
  • एफएमसीजी और बीएफएसआई सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर रहे, मिडकैप-स्मॉलकैप में नुकसान सीमित रहा।

मुंबई, 25 अप्रैल 2026भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह भारी दबाव में रहा। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र उछाल और आईटी सेक्टर में लगभग 10 प्रतिशत की बिकवाली के चलते साप्ताहिक आधार पर बीएसई सेंसेक्स 2.3 प्रतिशत और एनएसई निफ्टी50 1.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। यह गिरावट बाजार के लिए इस वर्ष के सबसे तनावपूर्ण सप्ताहों में से एक साबित हुई।

साप्ताहिक प्रदर्शन: बड़े इंडेक्स लुढ़के, मिडकैप-स्मॉलकैप अपेक्षाकृत स्थिर

साप्ताहिक आधार पर बीएसई सेंसेक्स में 2.3 प्रतिशत और निफ्टी50 में 1.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, बीएसई मिडकैप इंडेक्स केवल 0.6 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स मात्र 0.2 प्रतिशत नीचे आया, जो दर्शाता है कि बड़े शेयरों पर दबाव अधिक रहा।

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार, 25 अप्रैल को सेंसेक्स 999.79 अंक यानी 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,664.21 पर बंद हुआ। निफ्टी50 भी 275.10 अंक यानी 1.14 प्रतिशत फिसलकर 23,897.95 पर आ गया।

इंट्राडे में सेंसेक्स 77,483.80 पर खुलकर 1,260 अंक यानी 1.6 प्रतिशत गिरकर 76,403.87 के दिन के न्यूनतम स्तर तक पहुंचा। निफ्टी भी 24,100.55 से खुलकर 359 अंक यानी 1.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,813.65 के निचले स्तर पर आया।

आईटी सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित, एफएमसीजी और बीएफएसआई ने दी राहत

आईटी सेक्टर इस सप्ताह का सबसे बड़ा पीड़ित रहा, जहां करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह गिरावट मुख्यतः कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों की आशंका के कारण आई। हालांकि, इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के नतीजे संतोषजनक रहे।

दूसरी ओर, एफएमसीजी सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया और कंपनियों ने डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की। बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र (बीएफएसआई) भी स्थिर रहा, जहां एसेट क्वालिटी संतोषजनक बनी रही।

पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतें: बाजार पर दोहरा बोझ

होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न व्यवधान और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया। पहले ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की घोषणा की, लेकिन अमेरिकी कार्रवाई के बाद फिर से प्रतिबंध लागू हो गए।

इस उठापटक के बीच कच्चे तेल की कीमतें 15 प्रतिशत उछलकर 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया, जिससे क्षेत्रीय अनिश्चितता और गहरी हो गई।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश के लिए तेल की ऊंची कीमतें व्यापार घाटे और महंगाई दोनों पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं। यह दबाव रुपये की विनिमय दर और राजकोषीय घाटे पर भी दिख सकता है।

एफआईआई की बिकवाली बनाम डीआईआई की खरीदारी

लिक्विडिटी के मोर्चे पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने इस सप्ताह 1,369 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 9,782 करोड़ रुपए की खरीदारी कर बाजार को संभाला।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि म्यूचुअल फंड और घरेलू निवेशकों की सक्रियता ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभाई। एसआईपी प्रवाह की मजबूती भारतीय बाजार की आंतरिक स्थिरता का संकेत है।

अगले सप्ताह की दिशा: वैश्विक संकेतों पर रहेगी नजर

अगले सप्ताह बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण आंकड़ों पर निर्भर करेगी। निवेशक भारत के मार्च 2026 के आईआईपी डेटा, अमेरिका, चीन और जापान के पीएमआई आंकड़ों और अमेरिका के पीसीई महंगाई डेटा पर नजर रखेंगे।

इसके साथ ही, फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपीय केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति घोषणाएं वैश्विक बाजारों की दिशा तय करेंगी। घरेलू मोर्चे पर वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के कॉर्पोरेट नतीजे भी बाजार की धारणा को प्रभावित करते रहेंगे। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है, तो बाजार में राहत की उम्मीद की जा सकती है।

Point of View

बल्कि एक गहरी भू-राजनीतिक चेतावनी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, और जब होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी संवेदनशील धमनी अवरुद्ध होती है तो देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। विडंबना यह है कि आईटी सेक्टर — जो भारत की सबसे मजबूत निर्यात आय का स्रोत है — वैश्विक मंदी की आशंका में 10 प्रतिशत टूट गया, जबकि इंफोसिस और टीसीएस के नतीजे संतोषजनक रहे। यह दर्शाता है कि बाजार अब तथ्यों से नहीं, आशंकाओं से चल रहा है — और यही सबसे बड़ा जोखिम है।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

इस हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 2.3 प्रतिशत और निफ्टी50 1.9 प्रतिशत गिरा। शुक्रवार को सेंसेक्स 999.79 अंक गिरकर 76,664.21 और निफ्टी 275.10 अंक फिसलकर 23,897.95 पर बंद हुआ।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण क्या रहा?
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान और कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना मुख्य कारण रहे। इसके साथ ही आईटी सेक्टर में करीब 10 प्रतिशत की भारी बिकवाली ने बाजार को और नीचे खींचा।
इस सप्ताह एफआईआई और डीआईआई ने कितनी खरीद-बिक्री की?
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 1,369 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 9,782 करोड़ रुपए की खरीदारी की। डीआईआई की मजबूत खरीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया।
आईटी सेक्टर में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों की आशंका और वैश्विक आर्थिक मंदी की चिंता के कारण आईटी सेक्टर में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि इंफोसिस और टीसीएस के वास्तविक नतीजे संतोषजनक रहे।
अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा किन कारकों पर निर्भर करेगी?
अगले सप्ताह भारत के मार्च 2026 के आईआईपी डेटा, अमेरिका के पीसीई महंगाई आंकड़े और फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड व यूरोपीय केंद्रीय बैंक की नीति घोषणाएं बाजार की दिशा तय करेंगी। पश्चिम एशिया की स्थिति भी अहम रहेगी।
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