बंगाल में भाजपा की जीत तय — दीया कुमारी का बड़ा दावा, 90%25 से ज्यादा वोटिंग
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में 152 सीटों पर 90%25 से अधिक मतदान दर्ज हुआ।
- राजस्थान उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने दावा किया कि बंगाल में भाजपा की जीत सुनिश्चित है।
- AAP के 7 राज्यसभा सांसद, जिनमें राघव चड्ढा शामिल हैं, पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए।
- भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने उच्च मतदान को "बदलाव को वोट" करार दिया।
- पंजाब भाजपा नेता अश्विनी शर्मा ने कहा कि AAP अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है और पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है।
- बंगाल चुनाव परिणाम 2029 के लोकसभा चुनाव की राजनीतिक दिशा के लिए भी निर्णायक माने जा रहे हैं।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2026 — पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में 152 सीटों पर 90 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज होने के बाद भाजपा के नेताओं का उत्साह चरम पर है। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत सुनिश्चित है और पार्टी इस विधानसभा चुनाव में विजयी होकर रहेगी।
दीया कुमारी का आत्मविश्वास से भरा बयान
उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने मीडिया से बातचीत में कहा, "जीत पक्की है, हम जीतेंगे।" उन्होंने कहा कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं तक सभी ने अथक परिश्रम किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल की जनता बदलाव और विकास की आकांक्षा रखती है। राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाएं वहाँ ठीक से लागू नहीं हो पा रही हैं। दीया कुमारी के अनुसार, इन्हीं कारणों से जनता ने भाजपा को सत्ता सौंपने का मन बना लिया है।
रिकॉर्ड मतदान — परिवर्तन का संकेत?
पहले चरण की 152 विधानसभा सीटों पर हुई बंपर वोटिंग को भाजपा नेता अपने पक्ष में मान रहे हैं। भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने कहा कि यह "बदलाव को वोट" है। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वहाँ भी मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी, और अब बंगाल व तमिलनाडु में भी यही रुझान देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में भी उच्च मतदान हुआ था, लेकिन तब तृणमूल कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। इस बार भाजपा का दावा है कि जमीनी समीकरण बदल चुके हैं।
आप के सात सांसदों का भाजपा में शामिल होना — राजनीतिक भूकंप
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा सहित आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 सांसदों के पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने पर दीया कुमारी ने कहा कि यह देश की मौजूदा राजनीतिक दिशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "चाहे जन-प्रतिनिधि हों या आम नागरिक, सभी पीएम मोदी के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं।"
भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने कहा कि AAP को खुद स्पष्ट करना चाहिए कि उनके सांसदों ने पार्टी क्यों छोड़ी। वहीं, पंजाब भाजपा नेता अश्विनी शर्मा ने तीखे शब्दों में कहा कि अरविंद केजरीवाल को अपने नेतृत्व शैली पर पुनर्विचार करना होगा।
आप की आंतरिक दरारें — विश्लेषण
अश्विनी शर्मा ने कहा कि आम आदमी पार्टी जो कभी एक "वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति" के रूप में उभरी थी, अब अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है। उनका कहना था कि पार्टी लोकतंत्र की बात करती है, लेकिन उसके भीतर आंतरिक लोकतंत्र का सर्वथा अभाव है।
विशेषज्ञ इसे AAP के संगठनात्मक संकट के रूप में देख रहे हैं। 2015 और 2020 में दिल्ली में प्रचंड बहुमत दिलाने वाले कई करीबी सहयोगियों का एक-एक करके पार्टी छोड़ना यह संकेत देता है कि केजरीवाल मॉडल की चमक फीकी पड़ रही है।
आगे क्या?
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के शेष चरणों के मतदान और मतगणना के नतीजे ही तय करेंगे कि दीया कुमारी का दावा कितना सटीक साबित होता है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच यह चुनावी टकराव न केवल बंगाल, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।