16वीं जनगणना: पथानामथिट्टा में प्रशिक्षण पूरा, जुलाई से शुरू होगी मकान सूची प्रक्रिया
सारांश
Key Takeaways
- पथानामथिट्टा जिले में 16वीं राष्ट्रीय जनगणना की तैयारी पूरी, अधिकारियों के दो बैचों को छह दिनों में प्रशिक्षण दिया गया।
- कलेक्ट्रेट गावी सम्मेलन कक्ष में आयोजित प्रशिक्षण का नेतृत्व के. श्रीकुमार और सी.के. कार्तिका ने किया।
- जनगणना 2026-27 दो चरणों में होगी; केरल में मकान सूचीकरण 1 से 31 जुलाई 2026 तक चलेगा।
- जिला कलेक्टर को प्रधान जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया; तहसीलदार और नगर सचिव भी जनगणना अधिकारी बनाए गए।
- यह जनगणना 2011 के बाद पहली बार हो रही है — कोविड के कारण 2021 की जनगणना स्थगित हो गई थी।
- जनगणना डेटा ओबीसी आरक्षण, संसदीय परिसीमन और केंद्रीय अनुदान वितरण को सीधे प्रभावित करेगा।
केरल के पथानामथिट्टा जिले में भारत की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। कलेक्ट्रेट गावी सम्मेलन कक्ष में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला एवं प्रभारी स्तर के अधिकारियों को जनगणना प्रक्रिया की बारीकियां सिखाई गईं। पिछले छह दिनों में अधिकारियों के दो अलग-अलग बैचों को प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का विवरण
जनगणना निदेशालय के डेटा प्रोसेसिंग सहायक के. श्रीकुमार और सांख्यिकी अन्वेषक सी.के. कार्तिका ने प्रशिक्षण का नेतृत्व किया। इन विशेषज्ञों ने अधिकारियों को जनगणना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके महत्व और तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया।
प्रशिक्षण में जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS) पोर्टल के व्यावहारिक उपयोग पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इसके अलावा मकानों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया, स्व-गणना की विधि, गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारियां भी विस्तार से समझाई गईं।
जनगणना 2026-27 की संरचना और चरण
जनगणना 2026-27 दो मुख्य चरणों में संपन्न होगी — पहला चरण मकान सूचीकरण और दूसरा चरण जनसंख्या गणना। केरल राज्य में मकान सूचीकरण का पहला चरण 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक चलेगा।
गौरतलब है कि भारत में जनगणना प्रत्येक दस वर्षों में होती है। 2011 की जनगणना के बाद 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हो गई थी, जिसके चलते यह जनगणना करीब 15 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है। इस लंबे अंतराल के कारण नीति-निर्माण, सरकारी योजनाओं के लाभार्थी निर्धारण और संसदीय सीटों के परिसीमन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
जिले में अधिकारियों की नियुक्ति और जिम्मेदारियां
पथानामथिट्टा जिले में जनगणना कार्य के सुचारू संचालन के लिए एक सुगठित प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है। जिला कलेक्टर को प्रधान जनगणना अधिकारी, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को जिला जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है।
अन्य जिला प्रमुखों को अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी और राजस्व मंडल अधिकारियों को उप-मंडल जनगणना अधिकारी बनाया गया है। तहसीलदारों और नगर सचिवों को भी प्रभार जनगणना अधिकारी के रूप में नामित किया गया है।
जनगणना का व्यापक महत्व और प्रभाव
जनगणना के आंकड़े केवल जनसंख्या की गिनती तक सीमित नहीं हैं — ये आंकड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और सामाजिक कल्याण योजनाओं के नियोजन की नींव बनते हैं। ओबीसी आरक्षण, संसदीय परिसीमन और केंद्रीय अनुदान वितरण जैसे महत्वपूर्ण निर्णय जनगणना डेटा पर निर्भर करते हैं।
केरल जैसे राज्य में, जहां जनसंख्या वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से कम है और बुजुर्ग आबादी का अनुपात बढ़ रहा है, यह जनगणना राज्य की जनसांख्यिकीय वास्तविकता को सामने लाएगी। इससे केंद्र सरकार की योजनाओं में केरल की हिस्सेदारी और संसदीय सीटों की संख्या पर भी असर पड़ सकता है।
आने वाले महीनों में पूरे केरल में जनगणना गणनाकर्ताओं की भर्ती और प्रशिक्षण की प्रक्रिया तेज होगी। जुलाई 2026 में मकान सूचीकरण के बाद जनसंख्या गणना का दूसरा चरण निर्धारित समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।