जनेऊ विवाद: कर्नाटक में CET छात्र से पवित्र धागा हटवाने पर चिक्काबल्लापुर में भड़का आक्रोश
सारांश
Key Takeaways
- चिक्काबल्लापुर के नागार्जुन कॉलेज परीक्षा केंद्र पर CET छात्र जी. सुप्रीत से जनेऊ हटाने का कथित आदेश दिया गया।
- घटना तीन दिन बाद सामने आई, जिससे ब्राह्मण महासभा सहित कई संगठनों में भारी आक्रोश फैला।
- बेंगलुरु के कृपानिधि कॉलेज के तीन कर्मचारी (दो वरिष्ठ महिला सहित) पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं।
- कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) ने जांच की मांग की और संदेह जताया कि यह जानबूझकर सामाजिक वैमनस्य फैलाने की साजिश हो सकती है।
- BJP ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की; ब्राह्मण महासभा ने SP कार्यालय में शिकायत देने की तैयारी की।
- यह विवाद उच्च शिक्षा मंत्री एम.सी. के गृह जिले में हुआ, जिससे राजनीतिक संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
चिक्काबल्लापुर, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक में जनेऊ विवाद एक बार फिर तूल पकड़ता जा रहा है। कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) परीक्षा केंद्रों पर छात्रों से पवित्र धागा (यज्ञोपवीत) जबरन हटवाए जाने के आरोपों ने अब चिक्काबल्लापुर जिले को भी अपनी चपेट में ले लिया है। डोड्डामराली स्थित नागार्जुन कॉलेज परीक्षा केंद्र पर छात्र जी. सुप्रीत से परीक्षा हॉल में प्रवेश से पूर्व जनेऊ उतारने को कहा गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और विभिन्न संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया है।
मुख्य घटनाक्रम: क्या हुआ नागार्जुन कॉलेज में?
नागार्जुन कॉलेज, डोड्डामराली के परीक्षा केंद्र पर जी. सुप्रीत नामक छात्र को कथित तौर पर परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से पहले परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों ने अपना पवित्र धागा (जनेऊ) हटाने का निर्देश दिया।
यह घटना तीन दिन बाद सामने आई, जिससे समुदाय में और अधिक रोष फैल गया। छात्र के माता-पिता और समुदाय के नेताओं ने इसे धार्मिक रीति-रिवाजों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप बताया है।
इस घटना ने विशेष ध्यान इसलिए भी खींचा है क्योंकि यह उच्च शिक्षा मंत्री एम.सी. के गृह जिले में घटित हुई है, जिससे राजनीतिक संवेदनशीलता और अधिक बढ़ गई है।
विरोध और संगठनों की प्रतिक्रिया
चिक्काबल्लापुर में ब्राह्मण महासभा के सदस्यों ने पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय से संपर्क किया है और औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में हैं। उन्होंने कॉलेज अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने कॉलेज प्रबंधन तथा परीक्षा कर्मचारियों से जवाबदेही की मांग करते हुए मोर्चा खोल दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
बेंगलुरु से शुरू हुआ विवाद और सरकार की कार्रवाई
यह विवाद पहले बेंगलुरु के कोरमंगला और मडिवाला स्थित कृपानिधि कॉलेज से उठा था, जहां CET परीक्षा के दौरान छात्रों से जनेऊ हटाने को कहा गया था।
कर्नाटक कांग्रेस सरकार के निर्देश पर कृपानिधि कॉलेज के तीन कर्मचारियों को निलंबित किया गया, जिनमें दो वरिष्ठ महिला कर्मचारी भी शामिल हैं।
कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) ने बेंगलुरु शहरी उपायुक्त को पत्र लिखकर इस मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। KEA को संदेह है कि यह घटना जानबूझकर सामाजिक वैमनस्य फैलाने के इरादे से की गई हो सकती है, क्योंकि जनेऊ न हटवाने के स्पष्ट निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके थे।
जनेऊ का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
जनेऊ अथवा यज्ञोपवीत एक पवित्र धागा है जिसे हिंदू पुरुष, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय के लोग, बाएं कंधे पर और दाएं हाथ के नीचे धारण करते हैं। यह शिक्षा, आध्यात्मिकता और वयस्कता में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है। इसे उतारने का आदेश देना हिंदू धार्मिक परंपराओं का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य और आगे की राह
गौरतलब है कि कर्नाटक में धार्मिक पहचान से जुड़े विवाद नए नहीं हैं। इससे पहले हिजाब विवाद (2022) ने भी राज्य और देश को हिला दिया था। उस विवाद में भी शैक्षणिक परिसरों में धार्मिक पोशाक को लेकर टकराव हुआ था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। अब जनेऊ विवाद उसी श्रृंखला की एक नई कड़ी बनता दिख रहा है।
यह विवाद उस समय और संवेदनशील हो जाता है जब CET जैसी महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर होता है। परीक्षा केंद्रों पर धार्मिक प्रतीकों को लेकर स्पष्ट और समान नीति का अभाव इस तरह के विवादों को बार-बार जन्म दे रहा है।
आने वाले दिनों में पुलिस जांच, KEA की रिपोर्ट और राजनीतिक दबाव यह तय करेंगे कि इस मामले में कितनी जवाबदेही सुनिश्चित होती है। यदि दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुद्दा आगामी स्थानीय चुनावों में भी गूंज सकता है।