पाकिस्तान में ईंधन मूल्य वृद्धि: HRC ने बताया 'आर्थिक आत्महत्या', पेट्रोल-डीजल ₹26.77 महंगा

Click to start listening
पाकिस्तान में ईंधन मूल्य वृद्धि: HRC ने बताया 'आर्थिक आत्महत्या', पेट्रोल-डीजल ₹26.77 महंगा

सारांश

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल 26.77 रुपये प्रति लीटर महंगा होने पर मानवाधिकार परिषद भड़की। अप्रैल में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है — इससे पहले पेट्रोल 43%25 और डीजल 55%25 महंगा हो चुका है। HRC ने इसे 'आर्थिक आत्महत्या' बताते हुए तत्काल समीक्षा की मांग की।

Key Takeaways

  • पाकिस्तान सरकार ने 25 अप्रैल से पेट्रोल और HSD की कीमतें 26.77 रुपये प्रति लीटर बढ़ाईं।
  • पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद (HRC) ने इसे 'आर्थिक आत्मघाती हमला' बताते हुए तत्काल समीक्षा की मांग की।
  • पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और IMF दबाव को बढ़ोतरी का कारण बताया।
  • अप्रैल में पहले की गई बढ़ोतरी में पेट्रोल 43%25 और डीजल 55%25 महंगा हुआ था — यह उसी महीने दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है।
  • HRC ने मांग की कि अभिजात वर्ग की सुविधाएं कम की जाएं और गरीब समर्थक आर्थिक नीतियां बनाई जाएं।
  • आने वाले हफ्तों में IMF समीक्षा बैठक और पाकिस्तान बजट यह तय करेंगे कि जनता को राहत मिलती है या नहीं।

इस्लामाबाद, 25 अप्रैल: पाकिस्तान सरकार द्वारा पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतों में 26.77 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी किए जाने के बाद पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद (HRC) ने इस फैसले को आम जनता पर किया गया 'आर्थिक आत्मघाती हमला' करार दिया है। ऊर्जा मंत्रालय (पेट्रोलियम डिवीजन) की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, नई दरें शनिवार, 25 अप्रैल से तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

सरकार का फैसला और पेट्रोलियम मंत्री का बयान

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इस बढ़ोतरी को अपरिहार्य बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में आई तेज उछाल के चलते सरकार के पास कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वैश्विक साझेदारों के साथ हुए समझौतों के दबाव में यह बोझ आम जनता पर डाला जा रहा है।

यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ बेलआउट कार्यक्रम की शर्तों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि ईंधन सब्सिडी हटाना IMF की प्रमुख मांगों में से एक रही है, और सरकार इसी दिशा में कदम बढ़ा रही है।

मानवाधिकार परिषद की कड़ी प्रतिक्रिया

पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद (HRC) ने इस निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि पेट्रोल की कीमतों में बार-बार की जा रही बढ़ोतरी महज आंकड़ों का हेरफेर नहीं, बल्कि उस महंगाई की आग को और भड़काना है जिसने पहले से ही आम पाकिस्तानी नागरिक की कमर तोड़ रखी है।

परिषद की चेयरपर्सन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सम्मानजनक जीवन जीना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। परिवहन, दवाइयां और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में संभावित वृद्धि लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे धकेलने के समान होगी।

HRC ने सरकार से मांग की कि इस 'दमनकारी निर्णय' की तत्काल समीक्षा की जाए और आम जनता को राहत देने के लिए आपातकालीन कदम उठाए जाएं। परिषद ने यह भी कहा कि अभिजात वर्ग को मिलने वाली सुविधाओं और विशेषाधिकारों में कटौती कर आम नागरिक को राहत दी जाए।

आम जनता पर असर: महंगाई का दोहरा बोझ

ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी पाकिस्तान की पहले से चरमराई अर्थव्यवस्था पर एक और प्रहार है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से माल ढुलाई, सार्वजनिक परिवहन और कृषि — तीनों क्षेत्र प्रभावित होंगे, जिसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ेगा।

गौरतलब है कि इसी महीने अप्रैल में पाकिस्तान सरकार ने ईंधन की कीमतों में एक और भारी बढ़ोतरी की थी — जिसमें पेट्रोल 43 प्रतिशत और हाई-स्पीड डीजल 55 प्रतिशत तक महंगा किया गया था। यानी एक ही महीने में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देश भी वैश्विक ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान में इतनी तेज और बार-बार की जाने वाली मूल्यवृद्धि इसे इस क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक बनाती है।

ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह

पाकिस्तान पिछले दो वर्षों से रिकॉर्ड मुद्रास्फीति, मुद्रा अवमूल्यन और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहा है। IMF के बेलआउट पैकेज की शर्तों के तहत सब्सिडी हटाने का दबाव लगातार बना हुआ है। ऐसे में ईंधन मूल्यवृद्धि एक संरचनात्मक समस्या का हिस्सा है, न कि कोई एकल घटना।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी राजकोषीय नीति और ऊर्जा क्षेत्र के ढांचागत सुधार नहीं करता, तब तक ऐसी मूल्यवृद्धि का सिलसिला जारी रहेगा। आने वाले हफ्तों में IMF की समीक्षा बैठक और पाकिस्तान सरकार की बजट घोषणाएं यह तय करेंगी कि जनता को राहत मिलती है या बोझ और बढ़ता है।

Point of View

लेकिन IMF पैकेज की हर शर्त आम आदमी की थाली और जेब पर सीधा वार करती है। मानवाधिकार परिषद की आवाज महत्वपूर्ण है, लेकिन जब तक पाकिस्तान की राजनीतिक अभिजात वर्ग खुद बलिदान नहीं देती, 'गरीब समर्थक नीति' की बात खोखली रहेगी। यह संकट केवल ईंधन का नहीं — यह एक ढहती अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक विफलता है।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल कितना महंगा हुआ?
पाकिस्तान सरकार ने 25 अप्रैल से पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 26.77 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। यह इसी महीने में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है।
पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद ने ईंधन मूल्य वृद्धि पर क्या कहा?
HRC ने इसे आम जनता पर 'आर्थिक आत्मघाती हमला' करार दिया और सरकार से इस फैसले की तत्काल समीक्षा की मांग की। परिषद ने कहा कि यह बढ़ोतरी गरीब और मध्यम वर्ग को गरीबी रेखा से नीचे धकेल देगी।
पाकिस्तान में ईंधन इतना महंगा क्यों हो रहा है?
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल और IMF जैसे वैश्विक साझेदारों के दबाव के कारण यह बढ़ोतरी की गई। IMF के बेलआउट कार्यक्रम की शर्तों में ईंधन सब्सिडी हटाना शामिल है।
अप्रैल में पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल कितना महंगा हुआ था?
इसी महीने पहले की गई बढ़ोतरी में पेट्रोल 43 प्रतिशत और हाई-स्पीड डीजल 55 प्रतिशत महंगा किया गया था। अब 26.77 रुपये प्रति लीटर की नई बढ़ोतरी इस पर और बोझ बढ़ाती है।
पाकिस्तान में ईंधन मूल्य वृद्धि का आम जनता पर क्या असर होगा?
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन, खाद्य पदार्थ, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं महंगी होंगी। इससे गरीब और मध्यम वर्ग पर महंगाई का दोहरा बोझ पड़ेगा।
Nation Press