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बलूच कार्यकर्ता फोजिया बलोच गिरफ्तार, मानवाधिकार संगठनों ने पाक सरकार को घेरा

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बलूच कार्यकर्ता फोजिया बलोच गिरफ्तार, मानवाधिकार संगठनों ने पाक सरकार को घेरा

सारांश

बलूच कार्यकर्ता फोजिया बलोच को कराची प्रेस क्लब से पाक पुलिस ने गिरफ्तार किया। वे अपने भाई दादशाह बलोच के जबरन गायब होने का मुद्दा उठाने पहुंची थीं। BYC, BNM और BVJ सहित कई मानवाधिकार संगठनों ने पाक सरकार की कड़ी निंदा की है।

मुख्य बातें

फोजिया बलोच , बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की सदस्य, को शनिवार 26 अप्रैल 2025 को कराची प्रेस क्लब के बाहर पाकिस्तान पुलिस ने गिरफ्तार किया।
फोजिया के भाई दादशाह बलोच को 21 अप्रैल 2025 को कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने घर से जबरन उठाया था।
परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया।
BYC, BNM-पांक और BVJ सहित कई मानवाधिकार संगठनों ने गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए तत्काल रिहाई की मांग की।
BSO-आजाद के अनुसार, 2025 में अब तक करीब दो दर्जन बलूच महिलाओं को क्वेटा, कराची, खुजदार, केच और आवारान से जबरन उठाया गया है।
मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है।

फोजिया बलोच की गिरफ्तारी — मुख्य घटनाक्रम

क्वेटा, 25 अप्रैलबलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की सदस्य और बलूच कार्यकर्ता फोजिया बलोच को शनिवार, 26 अप्रैल 2025 को कराची प्रेस क्लब के बाहर पाकिस्तान पुलिस ने हिरासत में ले लिया। फोजिया अपने परिवार के साथ वहां प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंची थीं, जिसमें वे अपने भाई दादशाह बलोच के जबरन गायब किए जाने का मुद्दा उठाना चाहती थीं। पुलिस ने उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया, जिसकी कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी निंदा की है।

बीवाईसी के अनुसार, 21 अप्रैल 2025 को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने दादशाह बलोच को उनके घर से कथित तौर पर जबरन उठा लिया था। तब से उनका कोई अता-पता नहीं है। परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया।

मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

बलूच यकजेहती कमेटी ने पाकिस्तान सरकार से फोजिया बलोच और उनके भाई दादशाह बलोच को तत्काल रिहा करने की मांग की है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से भी पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है।

बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग 'पांक' ने इस घटना को पीड़ित परिवारों की आवाज़ दबाने और न्याय तक उनकी पहुंच रोकने की एक सुनियोजित नीति का हिस्सा बताया।

बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने कहा कि पाकिस्तान में असहमति के लिए सार्वजनिक स्थान तेज़ी से सिकुड़ता जा रहा है। जो परिवार अपने लापता परिजनों के बारे में जवाब मांगते हैं, उन्हें डराया-धमकाया जाता है और उनके बुनियादी अधिकार छीने जा रहे हैं।

बलूच महिलाओं पर अत्याचार का व्यापक पैटर्न

इससे पहले गुरुवार को बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन आजाद (बीएसओ-आजाद) ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी अधिकारी बलूच महिलाओं के जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

संगठन के प्रवक्ता शोलन बलोच ने दावा किया कि वर्ष 2025 में अब तक करीब दो दर्जन बलूच महिलाओं को क्वेटा, कराची, खुजदार, केच, आवारान और अन्य क्षेत्रों से जबरन उठाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है और झूठे नैरेटिव के ज़रिए बलूचिस्तान आंदोलन को कमजोर करने की साज़िश रची जा रही है।

ऐतिहासिक संदर्भ और गहरा विश्लेषण

यह घटना उस व्यापक पैटर्न का हिस्सा है जिसे मानवाधिकार संगठन वर्षों से दस्तावेज़ीकृत कर रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की घटनाओं को लेकर पाकिस्तान की आलोचना करती रही हैं। गौरतलब है कि जब भी कोई पीड़ित परिवार मीडिया या न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने की कोशिश करता है, उन्हें भी हिरासत में लेने की घटनाएं सामने आती रही हैं।

विरोधाभास यह है कि पाकिस्तान खुद को लोकतांत्रिक राष्ट्र बताता है, लेकिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने लापता भाई की आवाज़ उठाने आई महिला कार्यकर्ता को सार्वजनिक रूप से गिरफ्तार करना उस दावे को सीधे चुनौती देता है।

आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय दबाव और बीवाईसी की कानूनी कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करेगी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भी इस मुद्दे के उठाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें पाकिस्तानी राज्य तंत्र पीड़ितों की आवाज़ को मीडिया तक पहुंचने से पहले ही दबा देता है। विडंबना यह है कि जिस देश में न्यायपालिका और मीडिया को स्वतंत्र बताया जाता है, वहां एक प्रेस क्लब के बाहर से कार्यकर्ता को उठाया जाता है। यह पैटर्न नया नहीं — बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की यह श्रृंखला दशकों पुरानी है, लेकिन अब महिलाओं को निशाना बनाया जाना इसे एक नए और खतरनाक मोड़ पर ले जाता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी इस दमन को और मज़बूत करती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फोजिया बलोच को क्यों गिरफ्तार किया गया?
फोजिया बलोच को कराची प्रेस क्लब के बाहर पाकिस्तान पुलिस ने उस समय हिरासत में लिया जब वे अपने भाई दादशाह बलोच के जबरन गायब होने के मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंची थीं। उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया गया।
दादशाह बलोच कौन हैं और वे कब से गायब हैं?
दादशाह बलोच, फोजिया बलोच के भाई हैं जिन्हें कथित तौर पर 21 अप्रैल 2025 को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उनके घर से जबरन उठाया था। तब से उनका कोई पता नहीं है और परिवार की पुलिस शिकायत भी दर्ज नहीं की गई।
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) क्या है?
बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) एक बलूच नागरिक अधिकार संगठन है जो बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज़ उठाता है। फोजिया बलोच इसी संगठन की सदस्य हैं।
इस साल पाकिस्तान में कितनी बलूच महिलाओं को जबरन उठाया गया है?
बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन आजाद के प्रवक्ता शोलन बलोच के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक करीब दो दर्जन बलूच महिलाओं को क्वेटा, कराची, खुजदार, केच और आवारान जैसे क्षेत्रों से जबरन उठाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने क्या कहा?
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस और BNM के 'पांक' विभाग ने इसे पीड़ित परिवारों की आवाज़ दबाने की व्यापक नीति का हिस्सा बताया है। संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग की है।
राष्ट्र प्रेस
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