एयरलाइंस को बड़ी राहत: केंद्र सरकार ला सकती है 5,000 करोड़ की क्रेडिट स्कीम, मध्यपूर्व तनाव का असर

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एयरलाइंस को बड़ी राहत: केंद्र सरकार ला सकती है 5,000 करोड़ की क्रेडिट स्कीम, मध्यपूर्व तनाव का असर

सारांश

मध्यपूर्व तनाव और ईंधन मूल्य वृद्धि से जूझ रही भारतीय एयरलाइंस को केंद्र सरकार ECLGS के तहत 5,000 करोड़ रुपए की क्रेडिट सपोर्ट स्कीम दे सकती है। प्रति एयरलाइन 1,000 करोड़ की सीमा और 90%25 सरकारी गारंटी के साथ यह योजना 5 साल तक चलेगी।

Key Takeaways

  • केंद्र सरकार मध्यपूर्व तनाव से प्रभावित एयरलाइंस के लिए 5,000 करोड़ रुपए की क्रेडिट सपोर्ट स्कीम पर विचार कर रही है।
  • यह योजना ECLGS (आपातकालीन ऋण गारंटी योजना) के तहत लागू की जाएगी, जो पहले कोविड राहत के लिए उपयोग हुई थी।
  • प्रत्येक एयरलाइन को 1,000 करोड़ रुपए तक की क्रेडिट लिमिट मिलने की संभावना है।
  • सरकार इस योजना के तहत ऋणों पर 90 प्रतिशत तक की गारंटी देगी, जिससे बैंकों का जोखिम कम होगा।
  • यह योजना 5 वर्षों तक चलेगी और इसे 2.5 लाख करोड़ रुपए के व्यापक राहत पैकेज का हिस्सा बनाया जाएगा।
  • नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू के नेतृत्व में FTO रैंकिंग का दूसरा चरण भी जारी किया गया है।

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2025। मध्यपूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से बुरी तरह प्रभावित भारतीय एयरलाइंस को राहत देने के लिए केंद्र सरकार 5,000 करोड़ रुपए की क्रेडिट सपोर्ट स्कीम लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह योजना आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ECLGS) के तहत लागू की जा सकती है। एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।

क्या है प्रस्तावित योजना?

सूत्रों के अनुसार, सरकार मध्यपूर्व तनाव से प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों के लिए लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए के विस्तारित राहत पैकेज पर काम कर रही है, जिसका एक हिस्सा एविएशन सेक्टर को मिलेगा। एयरलाइंस को ECLGS के माध्यम से प्रति एयरलाइन लगभग 1,000 करोड़ रुपए की क्रेडिट लिमिट दिए जाने की संभावना है।

यह योजना पांच वर्षों तक लागू रहने की उम्मीद है और जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। सबसे अहम बात यह है कि इस योजना के तहत दिए गए ऋणों पर सरकार 90 प्रतिशत तक की गारंटी देने को तैयार है, जिससे बैंकों का जोखिम काफी कम हो जाएगा।

मध्यपूर्व तनाव का एविएशन पर असर

यह कदम ऐसे नाजुक समय पर उठाया जा रहा है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष सहित कई भू-राजनीतिक संकट एक साथ उभरे हैं। इन तनावों के कारण ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जो एयरलाइंस की परिचालन लागत को सीधे प्रभावित करता है।

गौरतलब है कि एविएशन सेक्टर में ईंधन की लागत कुल परिचालन व्यय का 35 से 40 प्रतिशत तक होती है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में हर बड़ा उछाल एयरलाइंस की बैलेंस शीट को सीधे नुकसान पहुंचाता है। इंडिगो, एयर इंडिया, अकासा एयर जैसी कंपनियां इस दबाव को महसूस कर रही हैं।

व्यापक संकट समर्थन ढांचे का हिस्सा

सूत्रों ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित एयरलाइन राहत योजना कोई अलग-थलग कदम नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अनिश्चितताओं के आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए तैयार किए जा रहे एक व्यापक संकट समर्थन ढांचे का अभिन्न हिस्सा है। इसमें विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि ECLGS योजना पहले कोविड-19 महामारी के दौरान छोटे और मझोले उद्यमों को राहत देने के लिए शुरू की गई थी और उस समय इसने लाखों व्यवसायों को बंद होने से बचाया था। अब उसी सफल मॉडल को एविएशन सेक्टर पर लागू करने की तैयारी है।

फ्लाइंग ट्रेनिंग रैंकिंग में भी सुधार

एविएशन सेक्टर में एक और सकारात्मक खबर यह है कि नागर विमानन मंत्रालय ने अप्रैल 2026 के लिए DGCA द्वारा अनुमोदित फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) रैंकिंग के दूसरे चरण की घोषणा की है। इस रैंकिंग में एक संस्थान को शीर्ष 'A' श्रेणी में शामिल किया गया है।

नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू के मार्गदर्शन में विकसित इस ढांचे का उद्देश्य देशभर के प्रशिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा मानकों को और मजबूत करना है।

आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना लागू होती है तो भारतीय एविएशन सेक्टर को न केवल तत्काल नकदी संकट से राहत मिलेगी, बल्कि नई उड़ान सेवाओं के विस्तार और रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी। सरकार के इस फैसले पर आने वाले हफ्तों में आधिकारिक घोषणा की उम्मीद है।

Point of View

जो राजकोषीय अनुशासन और उद्योग समर्थन के बीच संतुलन का प्रयास है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह राहत उन यात्रियों तक भी पहुंचेगी जो बढ़े हुए किराए से परेशान हैं, या यह केवल एयरलाइन प्रमोटरों के हितों की रक्षा करेगी? कोविड-काल में ECLGS का अनुभव बताता है कि बड़े कॉरपोरेट इस तरह की योजनाओं का लाभ उठाने में सबसे आगे रहते हैं जबकि छोटे ऑपरेटर पीछे रह जाते हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस राहत का असर आम यात्री की जेब पर भी दिखे।
NationPress
27/04/2026

Frequently Asked Questions

केंद्र सरकार एयरलाइंस के लिए कितनी बड़ी क्रेडिट स्कीम लाने पर विचार कर रही है?
केंद्र सरकार भारतीय एयरलाइंस के लिए 5,000 करोड़ रुपए की क्रेडिट सपोर्ट स्कीम लाने पर विचार कर रही है। इसमें प्रति एयरलाइन 1,000 करोड़ रुपए की क्रेडिट लिमिट और 90 प्रतिशत सरकारी गारंटी का प्रावधान होगा।
ECLGS क्या है और यह एयरलाइंस की कैसे मदद करेगी?
ECLGS यानी आपातकालीन ऋण गारंटी योजना एक सरकारी गारंटी-आधारित ऋण योजना है जो पहले कोविड-19 के दौरान MSME सेक्टर के लिए लाई गई थी। इस बार इसे एविएशन सेक्टर पर लागू कर एयरलाइंस को सस्ते और सुरक्षित ऋण उपलब्ध कराए जाएंगे।
मध्यपूर्व तनाव का भारतीय एयरलाइंस पर क्या असर पड़ा है?
मध्यपूर्व में अमेरिका-ईरान संघर्ष सहित भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है। चूंकि एयरलाइंस की कुल लागत का 35-40%25 ईंधन होता है, इससे उनकी वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ा है।
यह एयरलाइन राहत योजना कितने समय तक चलेगी?
प्रस्तावित योजना पांच वर्षों तक लागू रहने की उम्मीद है। जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
किन एयरलाइंस को इस योजना का फायदा मिलेगा?
यह योजना मध्यपूर्व तनाव से प्रभावित सभी भारतीय एयरलाइंस के लिए होगी, जिसमें इंडिगो, एयर इंडिया, अकासा एयर जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हो सकती हैं। अंतिम पात्रता मानदंड आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होंगे।
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