पचपदरा रिफाइनरी आग: प्रेशर गेज लीकेज बनी वजह, मई के दूसरे पखवाड़े में फिर शुरू होगा संचालन
सारांश
Key Takeaways
- आग का कारण: वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन के प्रेशर गेज से हाइड्रोकार्बन लीकेज को आग की वजह बताया गया है।
- नुकसान का दायरा: क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट के हीट एक्सचेंजर स्टैक में 6 हीट एक्सचेंजर और संबंधित उपकरण क्षतिग्रस्त हुए।
- संचालन बहाली: 3-4 सप्ताह में मरम्मत पूरी होने के बाद मई 2026 के दूसरे पखवाड़े तक रिफाइनरी फिर से शुरू होगी।
- उद्घाटन स्थगित: 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तावित उद्घाटन समारोह अनिश्चितकाल के लिए टाला गया।
- सरकारी जांच: एम. वेंकटेश की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति जांच कर रही है।
- परियोजना का महत्व: ₹79,450 करोड़ की यह रिफाइनरी भारत की 24वीं और 90 लाख टन वार्षिक क्षमता वाली दूसरी सबसे जटिल रिफाइनरी है।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल: राजस्थान के पचपदरा में स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की संयुक्त उद्यम रिफाइनरी में 20 अप्रैल 2026 को लगी भीषण आग का मुख्य कारण सामने आ गया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि यह आग वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर लगे प्रेशर गेज से हुए हाइड्रोकार्बन लीकेज के कारण भड़की थी। मरम्मत कार्य 3-4 सप्ताह में पूरा होने और मई 2026 के दूसरे पखवाड़े तक रिफाइनरी का संचालन बहाल होने की उम्मीद है।
आग का कारण और नुकसान का दायरा
एचपीसीएल ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में खुलासा किया कि आग क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट के हीट एक्सचेंजर स्टैक तक ही सीमित रही। इस घटना में 6 हीट एक्सचेंजर और उनसे जुड़े उपकरण बुरी तरह प्रभावित हुए।
कंपनी के अनुसार, ''मौके के हालात और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना जा रहा है कि आग की वजह वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर लगे प्रेशर गेज के पॉइंट से लीकेज होना था।'' यह घटना उस समय और अधिक चर्चित हो गई जब पता चला कि यह हादसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले हुआ।
मरम्मत और संचालन बहाली की समयसीमा
एचपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि रिफाइनरी में मरम्मत का काम युद्धस्तर पर जारी है और अगले 3 से 4 हफ्तों में पूरा होने की संभावना है। क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट को मई 2026 के दूसरे पखवाड़े में दोबारा चालू करने की योजना है।
कंपनी ने यह भी बताया कि रिफाइनरी की अन्य सेकेंडरी यूनिट्स का कमीशनिंग कार्य अंतिम चरण में है और तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है। एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और नेफ्था जैसे प्रमुख ईंधनों का ट्रायल उत्पादन मई 2026 के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।
सरकारी जांच और उद्घाटन स्थगन
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस घटना की स्वतंत्र जांच के लिए एमआरपीएल के पूर्व प्रबंध निदेशक एम. वेंकटेश की अगुवाई में चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल गठित किया है। यह जांच दल घटना के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की गहन समीक्षा करेगा।
21 अप्रैल को निर्धारित रिफाइनरी का उद्घाटन समारोह फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 8 अप्रैल को जारी बयान में कहा था कि यह रिफाइनरी 1 जुलाई 2026 से व्यावसायिक संचालन शुरू करने वाली थी।
पचपदरा रिफाइनरी का महत्व और भारत की ऊर्जा रणनीति
राजस्थान के बालोतरा जिले में बन रही यह रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भारत की 24वीं रिफाइनरी होगी और देश की दूसरी सबसे जटिल रिफाइनरी मानी जा रही है। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 90 लाख टन है और इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17 है।
इस परियोजना की कुल लागत 79,450 करोड़ रुपए है। यह रिफाइनरी पेट्रोल और डीजल के अलावा पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीएथिलीन, बेंजीन और ब्यूटाडाइन जैसे उच्च मूल्य वाले पेट्रोकेमिकल उत्पादों का भी निर्माण करेगी। इसमें पेट्रोकेमिकल उत्पादन का हिस्सा 26 प्रतिशत से अधिक रहेगा, जो भारत की आयात निर्भरता घटाने की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है।
तकनीकी पृष्ठभूमि: कमीशनिंग के दौरान क्यों बढ़ता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, दुनियाभर में रिफाइनरियों में कमीशनिंग और स्टार्टअप के दौरान आग, विस्फोट और बड़े हादसों का जोखिम सामान्य परिचालन की तुलना में कई गुना अधिक होता है। इस चरण में नए या रखरखाव किए गए हाई-प्रेशर और हाई-टेम्परेचर सिस्टम में पहली बार हाइड्रोकार्बन प्रवाहित किए जाते हैं, जिससे सूक्ष्म लीकेज भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है।
गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई जब परियोजना पहले से ही लागत वृद्धि और देरी का सामना कर रही थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में परियोजना की बढ़ी हुई लागत को मंजूरी दी थी। इस पृष्ठभूमि में आग की घटना ने न केवल उद्घाटन की योजना को बाधित किया, बल्कि परियोजना की निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अब सभी की निगाहें मई 2026 के दूसरे पखवाड़े पर टिकी हैं, जब रिफाइनरी का संचालन बहाल होने और ट्रायल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। एम. वेंकटेश समिति की जांच रिपोर्ट भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।