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28 अप्रैल 2026 पंचांग: परशुराम द्वादशी, भौम प्रदोष और त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ संयोग

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28 अप्रैल 2026 पंचांग: परशुराम द्वादशी, भौम प्रदोष और त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ संयोग

सारांश

28 अप्रैल 2026 को बैशाख शुक्ल द्वादशी पर परशुराम द्वादशी, भौम प्रदोष व्रत और त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ त्रिवेणी संगम बन रहा है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 से और अमृत काल दोपहर 2:59 से रहेगा। मेष, कन्या सहित 6 राशियों के लिए यह दिन विशेष शुभ है।

मुख्य बातें

28 अप्रैल 2026 को बैशाख शुक्ल द्वादशी पर परशुराम द्वादशी , भौम प्रदोष व्रत और त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ त्रिवेणी संयोग बन रहा है।
त्रिपुष्कर योग सूर्योदय से शाम 6:52 तक रहेगा — इस दौरान शुरू किए गए कार्यों में तीन गुना सफलता मिलने की मान्यता है।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 से 12:50 और अमृत काल दोपहर 2:59 से 4:40 तक रहेगा।
राहुकाल दोपहर 3:36 से 5:12 तक — इस दौरान शुभ कार्यों से बचें।
मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वालों के लिए यह दिन चंद्रबल की दृष्टि से विशेष अनुकूल है।
भगवान परशुराम और भगवान शिव दोनों की पूजा इस दिन विशेष फलदायी मानी जाएगी।

नई दिल्ली: 28 अप्रैल 2026, मंगलवार को हिंदू पंचांग के अनुसार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन परशुराम द्वादशी, भौम प्रदोष व्रत और त्रिपुष्कर योग — तीनों एक साथ पड़ रहे हैं, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तिथि और समय की विस्तृत जानकारी

हिंदू पंचांग के अनुसार बैशाख शुक्ल द्वादशी तिथि 28 अप्रैल 2026 को शाम 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसके पश्चात त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी, जो 29 अप्रैल 2026 की शाम 7 बजकर 51 मिनट तक चलेगी। चंद्रमा इस पूरे दिन कन्या राशि में संचरण करेगा, जबकि सूर्य देव मेष राशि में विराजमान रहेंगे।

परशुराम द्वादशी और भौम प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परशुराम द्वादशी के अवसर पर भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम की उपासना करने से साधक को शत्रु-भय से मुक्ति और अभय का वरदान प्राप्त होता है।

वहीं मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की संध्याकालीन पूजा और व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि, मनोकामनाओं की पूर्ति और ऋण-मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भौम प्रदोष विशेष रूप से मंगल दोष से पीड़ित जातकों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

त्रिपुष्कर योग — सफलता का विशेष संयोग

इस दिन का सबसे खास पहलू है त्रिपुष्कर योग, जो सूर्योदय से लेकर शाम 6 बजकर 52 मिनट तक बना रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में त्रिपुष्कर योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस योग में किए गए कार्यों में सफलता तीन गुना अधिक मिलने की मान्यता है। नई व्यापारिक शुरुआत, संपत्ति खरीद, निवेश और शुभ कार्यों के लिए यह योग विशेष रूप से अनुकूल है।

शुभ मुहूर्त — कब करें पूजा और महत्वपूर्ण कार्य

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 22 मिनट से 5 बजकर 10 मिनट तक — ध्यान, साधना और पूजा-पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ समय।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक — दिन का सर्वाधिक शुभ काल, जिसमें कोई भी महत्वपूर्ण कार्य आरंभ किया जा सकता है।

अमृत काल: दोपहर 2 बजकर 59 मिनट से शाम 4 बजकर 40 मिनट तक — इस समय में किए गए धार्मिक कार्य और दान-पुण्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।

अशुभ काल — इन समयों में बचें शुभ कार्यों से

राहुकाल: दोपहर 3 बजकर 36 मिनट से शाम 5 बजकर 12 मिनट तक — इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य, यात्रा या नई शुरुआत न करें।

यमगंड काल: सुबह 9 बजकर 12 मिनट से 10 बजकर 48 मिनट तक। गुलिक काल: दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 2 बजे तक। दुर्मुहूर्त: सुबह 8 बजकर 33 मिनट से 9 बजकर 24 मिनट तक और रात 11 बजकर 16 मिनट से 12 बजकर 1 मिनट तक।

राशिफल के अनुसार किन राशियों के लिए शुभ है यह दिन

चंद्रबल की दृष्टि से मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वाले जातकों के लिए 28 अप्रैल 2026 का दिन विशेष अनुकूल रहेगा। इन राशियों के लोग इस दिन महत्वपूर्ण निर्णय, व्यापारिक समझौते और पूजा-अनुष्ठान कर सकते हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार परशुराम द्वादशी, भौम प्रदोष और त्रिपुष्कर योग का यह त्रिवेणी संगम वर्षों में एक बार बनता है। 29 अप्रैल 2026 को त्रयोदशी तिथि के साथ प्रदोष व्रत का प्रभाव जारी रहेगा, जिसे भी धार्मिक कार्यों के लिए उत्तम माना जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय जनमानस की दिनचर्या और निर्णय-प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है। परशुराम द्वादशी, भौम प्रदोष और त्रिपुष्कर योग का एकसाथ आना इस बात का प्रमाण है कि वैदिक ज्योतिष में खगोलीय गणनाएं कितनी सटीक और जटिल हैं। यह संयोग केवल आस्था का विषय नहीं — यह उन करोड़ों भारतीयों की सांस्कृतिक पहचान है जो अपने जीवन के हर महत्वपूर्ण निर्णय में ब्रह्मांडीय ऊर्जा को साझीदार मानते हैं। मुख्यधारा मीडिया अक्सर इन पंचांग-आधारित खबरों को सतही तरीके से पेश करती है, जबकि इनके पीछे सदियों की वैज्ञानिक खगोल-गणना और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व छिपा है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

28 अप्रैल 2026 को कौन-कौन से व्रत और योग हैं?
28 अप्रैल 2026 को परशुराम द्वादशी, भौम प्रदोष व्रत और त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ संयोग है। यह तीनों एक साथ बैशाख शुक्ल द्वादशी तिथि पर पड़ रहे हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
28 अप्रैल 2026 का अभिजीत मुहूर्त कब से कब तक है?
28 अप्रैल 2026 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ समय होता है, जिसमें कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शुरू किया जा सकता है।
त्रिपुष्कर योग क्या होता है और 28 अप्रैल को यह कब तक रहेगा?
त्रिपुष्कर योग ज्योतिष शास्त्र का एक अत्यंत शुभ योग है, जिसमें किए गए कार्यों का फल तीन गुना मिलता है। 28 अप्रैल 2026 को यह योग सूर्योदय से शाम 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
28 अप्रैल 2026 को राहुकाल कब है?
28 अप्रैल 2026 को राहुकाल दोपहर 3 बजकर 36 मिनट से शाम 5 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, यात्रा या नई शुरुआत करने से बचना चाहिए।
28 अप्रैल 2026 किन राशियों के लिए शुभ है?
चंद्रबल की दृष्टि से 28 अप्रैल 2026 मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वालों के लिए विशेष शुभ है। इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में और सूर्य मेष राशि में रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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