ऑपरेशन क्रैकडाउन 2.0: तेलंगाना साइबर ब्यूरो ने 614 अपराधियों पर कसा शिकंजा

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ऑपरेशन क्रैकडाउन 2.0: तेलंगाना साइबर ब्यूरो ने 614 अपराधियों पर कसा शिकंजा

सारांश

तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने 'ऑपरेशन क्रैकडाउन 2.0' में 300 टीमों के साथ 614 साइबर अपराधियों की निगरानी की। 218 का पता चला, 115 फरार, एक आरोपी नेपाल में। यह राज्य में साइबर अपराधियों पर पोस्ट-अरेस्ट निगरानी का पहला बड़ा अभियान है।

Key Takeaways

  • तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने 26 अप्रैल 2025 को 'ऑपरेशन क्रैकडाउन 2.0' शुरू किया।
  • 2024-25 में गिरफ्तार 3,567 साइबर अपराधियों में से 614 तेलंगाना निवासियों को जांच के लिए चुना गया।
  • 335 आरोपियों का सत्यापन हुआ — 218 का पता चला, 115 फरार, 3 की मृत्यु
  • आरोपी प्रसाद कुमार (30 वर्ष) CSAM मामले में वांछित है और अभी नेपाल में है।
  • अभियान में 300 संयुक्त टीमों ने राज्यभर में एक साथ कार्रवाई की।
  • यह तेलंगाना पुलिस का साइबर अपराधियों पर पोस्ट-अरेस्ट निगरानी का पहला बड़ा अभियान है।

हैदराबाद, 26 अप्रैलतेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) ने शनिवार को राज्यव्यापी 'ऑपरेशन क्रैकडाउन 2.0' के तहत पहले गिरफ्तार हो चुके साइबर अपराधियों की गहन निगरानी और सत्यापन अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जमानत या रिहाई के बाद ये अपराधी दोबारा साइबर फ्रॉड या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि में संलिप्त न हों। यह तेलंगाना पुलिस के इतिहास में साइबर अपराधियों की एक साथ इतने बड़े पैमाने पर निगरानी का पहला अभियान है।

अभियान की पृष्ठभूमि और दायरा

वर्ष 2024-25 के दौरान तेलंगाना में कुल 3,567 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से तेलंगाना के मूल निवासी 614 आरोपियों को विशेष जांच के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया, क्योंकि ये बड़े आर्थिक साइबर फ्रॉड और अन्य गंभीर मामलों से जुड़े थे।

इस अभियान में तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो और कानून-व्यवस्था पुलिस की संयुक्त 300 टीमों ने एक साथ राज्य के विभिन्न जिलों में छापेमारी और सत्यापन कार्य किया। टीमों ने आरोपियों के मौजूदा पते, रोजगार की स्थिति, वर्तमान गतिविधियों और संपर्क सूत्रों की जानकारी जुटाई।

सत्यापन के नतीजे

TGCSB की निदेशक शिखा गोयल ने बताया कि 335 आरोपियों का सत्यापन पूरा किया गया। ये आरोपी तेलंगाना के 480 मामलों और देशभर के 1,233 मामलों से जुड़े हैं।

सत्यापन में 218 आरोपियों का पता लगाया जा चुका है — इनमें से कुछ अपने पुराने पते पर ही रह रहे हैं, जबकि कुछ अन्य स्थानों पर चले गए हैं। वहीं, 115 आरोपी अभी भी अज्ञात स्थान पर हैं और उनकी तलाश जारी है। इसके अलावा 3 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।

एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) मामले का आरोपी 30 वर्षीय प्रसाद कुमार इस समय नेपाल में रह रहा है। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय की जरूरत को रेखांकित करती है।

डेटा साझाकरण और थानों के बीच तालमेल

शिखा गोयल ने कहा कि यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर आरोपियों की आपराधिक जानकारी एक साथ संकलित कर संबंधित पुलिस थानों के साथ साझा की गई है। इससे स्थानीय पुलिस और साइबर ब्यूरो के बीच तालमेल बेहतर होगा और निगरानी अधिक प्रभावी बनेगी।

जिन आरोपियों में दोबारा अपराध में संलिप्तता या संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं, उनके खिलाफ पुलिस नियमों के अनुसार संदिग्ध सूची (Surveillance List) खोली गई है। यह कदम भविष्य में साइबर अपराध की पुनरावृत्ति को रोकने की दिशा में एक ठोस प्रणालीगत उपाय माना जा रहा है।

व्यापक संदर्भ और राष्ट्रीय महत्व

गौरतलब है कि भारत में साइबर अपराध की दर तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों के अनुसार, देश में हर वर्ष लाखों साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज होती हैं, जिनमें से तेलंगाना जैसे तकनीकी रूप से उन्नत राज्य सबसे अधिक प्रभावित हैं।

यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर अपराधियों के जमानत पर रिहा होने के बाद दोबारा अपराध करने के मामले सामने आ रहे हैं। तेलंगाना का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

आने वाले हफ्तों में 115 फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और नेपाल में बैठे प्रसाद कुमार के प्रत्यर्पण को लेकर कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

Point of View

बल्कि भारत की साइबर क्राइम नीति की एक बड़ी खामी को उजागर करता है — गिरफ्तारी के बाद निगरानी का अभाव। यह विडंबना है कि 3,567 अपराधी पकड़े गए, लेकिन उनकी रिहाई के बाद क्या हुआ, यह पहली बार ट्रैक किया जा रहा है। एक आरोपी का नेपाल में होना यह बताता है कि अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क को तोड़ने के लिए राज्य स्तरीय प्रयास पर्याप्त नहीं — केंद्रीय एजेंसियों और इंटरपोल-स्तरीय समन्वय जरूरी है। तेलंगाना का यह मॉडल राष्ट्रीय साइबर नीति में 'पोस्ट-अरेस्ट सर्विलांस फ्रेमवर्क' की मांग को और मजबूत करता है।
NationPress
27/04/2026

Frequently Asked Questions

ऑपरेशन क्रैकडाउन 2.0 क्या है?
'ऑपरेशन क्रैकडाउन 2.0' तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो का एक विशेष अभियान है जिसमें पहले गिरफ्तार हो चुके साइबर अपराधियों की वर्तमान स्थिति और गतिविधियों की जांच की गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये अपराधी दोबारा साइबर फ्रॉड में शामिल न हों।
इस अभियान में कितने साइबर अपराधियों की जांच हुई?
अभियान में 2024-25 के दौरान गिरफ्तार 3,567 साइबर अपराधियों में से तेलंगाना के 614 आरोपियों को शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें से 335 का सत्यापन किया गया, जिसमें 218 का पता चला और 115 अभी भी फरार हैं।
क्या कोई आरोपी विदेश भाग गया है?
हां, बाल यौन शोषण सामग्री मामले का आरोपी 30 वर्षीय प्रसाद कुमार इस समय नेपाल में रह रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए संबंधित एजेंसियों को सतर्क किया गया है।
तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो की निदेशक कौन हैं?
तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो की निदेशक शिखा गोयल हैं। उन्होंने इस अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर आरोपियों की जानकारी थानों के साथ साझा की गई है।
इस अभियान का आम जनता पर क्या असर होगा?
इस अभियान से साइबर अपराधियों पर प्रभावी निगरानी बढ़ेगी और उनके दोबारा अपराध करने की संभावना कम होगी। इससे आम नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बेहतर सुरक्षा मिलेगी और पुलिस-थाना समन्वय भी मजबूत होगा।
Nation Press