भारत की बड़ी प्रतिबद्धता: तुवालु को डायलिसिस यूनिट और समुद्री एम्बुलेंस देगा भारत
सारांश
Key Takeaways
- भारत ने तुवालु को डायलिसिस यूनिट और समुद्री एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की घोषणा की।
- विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने 25 अप्रैल 2025 को फुनाफुती का दौरा किया और प्रिंसेस मार्गरेट अस्पताल का निरीक्षण किया।
- मार्गेरिटा ने तुवालु के कार्यवाहक प्रधानमंत्री पॉलसन पनापा, गवर्नर-जनरल और कई मंत्रियों से मुलाकात की।
- बैठकों में स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु सहनशीलता, आपदा तैयारी और सतत विकास पर चर्चा हुई।
- 22 अप्रैल को वानुअतु के शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात कर प्रशांत क्षेत्र में सहयोग विस्तार पर वार्ता हुई।
- यह यात्रा FIPIC तृतीय शिखर सम्मेलन (मई 2023, पोर्ट मोरेस्बी) के संकल्पों की अनुवर्ती कार्रवाई का हिस्सा है।
फुनाफुती, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने दक्षिण प्रशांत के छोटे द्वीपीय राष्ट्र तुवालु को डायलिसिस यूनिट और समुद्री एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की घोषणा करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने शनिवार, 25 अप्रैल 2025 को फुनाफुती की यात्रा के दौरान यह महत्वपूर्ण घोषणा की। यह कदम प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ भारत की बढ़ती कूटनीतिक और विकासात्मक साझेदारी को और मजबूत करता है।
तुवालु के अस्पताल का दौरा और स्वास्थ्यकर्मियों से मुलाकात
मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने अपनी यात्रा के दौरान फुनाफुती स्थित प्रिंसेस मार्गरेट अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने वहां स्थानीय समुदाय को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों से सीधी मुलाकात कर उनके कार्य की सराहना की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और तुवालु मिलकर वहां की जनता के लिए बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेंगे। डायलिसिस यूनिट की आपूर्ति इस पोलिनेशियन द्वीप राष्ट्र के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां गुर्दे की बीमारियां एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती हैं।
द्विपक्षीय बैठकें और शिक्षा-स्वास्थ्य सहयोग पर चर्चा
मार्गेरिटा ने तुवालु के शिक्षा मंत्री और कार्यवाहक स्वास्थ्य मंत्री हामोआ होलोना से भी विस्तृत वार्ता की। दोनों नेताओं ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में भारत-तुवालु सहयोग को नई ऊंचाई देने के उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया।
इससे पहले शुक्रवार को मार्गेरिटा ने तुवालु के कार्यवाहक प्रधानमंत्री एवं विदेश, श्रम और व्यापार मंत्री पॉलसन पनापा से मुलाकात की। इस बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र, जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण और समग्र द्विपक्षीय विकास सहयोग को सुदृढ़ करने पर केंद्रित चर्चा हुई।
जलवायु परिवर्तन और आपदा तैयारी पर विशेष जोर
मार्गेरिटा ने तुवालु के गवर्नर-जनरल टोफिगा वाएवालु फलानी से भी भेंट कर विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सार्थक बातचीत की। इसके अतिरिक्त उन्होंने गृह, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण मंत्री डॉ. मैना वकाफुआ तालिया से मुलाकात कर जलवायु सहनशीलता, आपदा तैयारी, सतत विकास और क्षमता निर्माण पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
उल्लेखनीय है कि तुवालु समुद्र स्तर वृद्धि के कारण अस्तित्व के गंभीर संकट से जूझ रहा है। ऐसे में भारत का जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहयोग इस राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वानुअतु यात्रा और FIPIC शिखर सम्मेलन की निरंतरता
22 अप्रैल को मार्गेरिटा ने वानुअतु के प्रधानमंत्री जोथम नापात और कार्यवाहक विदेश मंत्री जेवियर इमैनुएल हैरी से भी भेंट कर स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और जलवायु अनुकूल ढांचे सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मार्गेरिटा की वानुअतु और तुवालु यात्रा प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ भारत के राजनीतिक और विकासात्मक संबंधों को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है। यह यात्रा मई 2023 में पोर्ट मोरेस्बी में आयोजित फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC) के तीसरे शिखर सम्मेलन में लिए गए संकल्पों की अनुवर्ती कार्रवाई का हिस्सा है।
मार्गेरिटा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत और तुवालु के संबंध साझा मूल्यों और परस्पर प्रतिबद्धता की नींव पर टिके हैं, और भारत तुवालु के विकास के सफर में एक विश्वसनीय साझेदार बना रहेगा। आने वाले महीनों में डायलिसिस यूनिट और समुद्री एम्बुलेंस की आपूर्ति की समयसीमा और तकनीकी विवरण पर दोनों देशों के बीच आगे की वार्ता अपेक्षित है।