इम्फाल में कोकोमी रैली हिंसक: छात्र संगठन सदस्य पर हमला, आंसू गैस से तितर-बितर हुई भीड़
सारांश
Key Takeaways
- कोकोमी की इम्फाल रैली 25 अप्रैल 2025 (शनिवार) को हिंसक हो गई।
- लैंफिल स्थित कोकोमी कार्यालय पर क्रोधित भीड़ ने हमला किया।
- ख्वैरंबंद कीथेल में कोकोमी छात्र विंग के एक सदस्य पर हमला हुआ, जिसे सुरक्षाबलों ने बचाया।
- सुरक्षाबलों ने आंसू गैस और नकली बम दागकर भीड़ को तितर-बितर किया।
- कोकोमी ने सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा, जिसमें आईडीपी पुनर्वास और सीआरपीएफ गोलीबारी जांच प्रमुख मांगें हैं।
- प्रवक्ता शांता नाहकपम ने चेतावनी दी कि सरकार का जवाब न मिला तो लोकतांत्रिक आंदोलन और तेज होगा।
इम्फाल, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मणिपुर अखंडता समन्वय समिति (कोकोमी) द्वारा शनिवार को आयोजित जनसभा उस समय हिंसक रूप ले गई जब भीड़ के एक हिस्से ने संगठन के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। ख्वैरंबंद कीथेल (महिला बाजार) में कोकोमी छात्र विंग के एक सदस्य पर हमला हुआ, जबकि लैंफिल स्थित कोकोमी कार्यालय पर भी क्रोधित भीड़ ने धावा बोल दिया। सुरक्षाबलों को भीड़ नियंत्रण के लिए आंसू गैस के गोले और नकली बम दागने पड़े।
रैली का उद्देश्य और मार्ग
यह रैली मणिपुर सरकार को सात प्रमुख मांगों से संबंधित प्रश्न सौंपने के लिए बुलाई गई थी। कोकोमी नेताओं ने लैंफिल स्थित अपने मुख्यालय से मार्च शुरू किया और नागमापाल तथा ख्वैरंबंद कीथेल से गुजरते हुए आगे बढ़े, जहां बड़ी संख्या में महिला विक्रेता जुलूस में शामिल हुईं।
जुलूस कांगला पश्चिमी गेट की ओर बढ़ा, लेकिन राज्य और केंद्रीय सुरक्षाबलों ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। प्रमुख चौराहों पर भारी सुरक्षा तैनाती देखी गई।
कोकोमी की सात सूत्रीय मांगें
कोकोमी प्रवक्ता शांता नाहकपम ने मीडिया को बताया कि रैली का मकसद सरकार से कई ज्वलंत मुद्दों पर जवाब मांगना था। इनमें 3 मई 2023 से अब तक हुई नागरिक हत्याएं, ट्रोंगलाओबी घटना जिसमें दो नाबालिगों की मौत हुई, और उसके बाद सीआरपीएफ की गोलीबारी शामिल हैं।
कोकोमी के ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं: आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) का पुनर्वास, सीआरपीएफ गोलीबारी की न्यायिक जांच, और कथित नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद के विरुद्ध ठोस कार्रवाई। एक प्रतिनिधिमंडल ने यह ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को सौंपा।
हिंसा का विस्फोट — कार्यालय पर हमला और छात्र घायल
तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने कोकोमी पर सरकार से बातचीत से बचने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि केवल ज्ञापन सौंपना पर्याप्त नहीं है और संगठन जनता को गुमराह कर रहा है।
इसके बाद क्रोधित भीड़ ने लैंफिल स्थित कोकोमी कार्यालय पर हमला कर दिया। सुरक्षाबलों ने आंसू गैस और नकली बमों का उपयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। ख्वैरंबंद कीथेल में एक अलग घटना में कोकोमी छात्र विंग के एक सदस्य पर भीड़ ने हमला किया, जिसे सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप कर बचाया।
प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर और गुलेल का इस्तेमाल करते हुए सड़कें अवरुद्ध कर दीं। सुरक्षाबलों ने अतिरिक्त आंसू गैस और नकली बमों से जवाब दिया। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी।
कोकोमी और सरकार के बीच गतिरोध
गौरतलब है कि इससे पहले कोकोमी ने मणिपुर सरकार के वार्ता निमंत्रण को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि इस मसले पर संगठन के घटक निकायों और केंद्रीय समिति में आंतरिक चर्चा जरूरी है। यह गतिरोध दर्शाता है कि मई 2023 से चल रहे मणिपुर संकट में अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
शांता नाहकपम ने चेतावनी दी कि यदि सरकार कुछ ही दिनों में स्पष्ट और ठोस जवाब नहीं देती, तो कोकोमी अपने लोकतांत्रिक आंदोलनों को और तेज कर सकती है। उन्होंने सरकार से आगामी जनगणना या एनआरसी प्रक्रिया से पहले विस्थापित लोगों को उनके घरों में वापस लौटाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की।
व्यापक संदर्भ — मणिपुर संकट की पृष्ठभूमि
यह घटना उस पृष्ठभूमि में हुई है जब मणिपुर में मई 2023 से जातीय संघर्ष जारी है, जिसमें अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हैं। ट्रोंगलाओबी में दो नाबालिगों की मौत और उसके बाद सीआरपीएफ की गोलीबारी ने पहले से भड़के माहौल में और आग डाल दी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोकोमी जैसे संगठनों पर जनता का दबाव बढ़ना यह संकेत देता है कि आम लोग अब केवल प्रतीकात्मक विरोध से संतुष्ट नहीं हैं — वे ठोस परिणाम चाहते हैं। यह विरोधाभास कि एक शांति-समन्वय संगठन की रैली खुद हिंसक हो गई, मणिपुर में व्याप्त गहरी निराशा और अविश्वास को उजागर करता है।
आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और कोकोमी के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं — खासकर तब जब जनगणना और एनआरसी जैसी संवेदनशील प्रक्रियाएं क्षितिज पर हैं।