बेमौसम बारिश-ओलावृष्टि से रायगढ़ के आम किसानों पर संकट, मात्र 20-25%25 फसल, सरकार से राहत की मांग

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बेमौसम बारिश-ओलावृष्टि से रायगढ़ के आम किसानों पर संकट, मात्र 20-25%25 फसल, सरकार से राहत की मांग

सारांश

महाराष्ट्र के रायगढ़ में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने आम किसानों को तबाह कर दिया है। मात्र 20-25%25 फसल हुई, पश्चिम एशिया युद्ध से निर्यात ठप और बाजार में खरीदार नदारद। किसान सरकार से तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं।

Key Takeaways

  • रायगढ़ जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से आम की फसल बुरी तरह बर्बाद हुई।
  • इस साल आम उत्पादन सामान्य से घटकर मात्र 20 से 25 प्रतिशत तक रह गया।
  • पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण आम का निर्यात ठप है और कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे हैं।
  • वाशी एपीएमसी मंडी में व्यापारियों और बिचौलियों ने खरीद बंद कर दी, किसानों की लागत भी नहीं निकल रही।
  • अप्रैल 2025 में ही बारिश शुरू होना आम की फसल के लिए सबसे घातक साबित हुआ।
  • किसानों ने महाराष्ट्र सरकार से मुआवजा, फसल बीमा और सरकारी खरीद केंद्र की तत्काल मांग की है।

रायगढ़, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने आम उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। इस साल सामान्य से कहीं अधिक अनिश्चित मौसम के चलते आम की फसल केवल 20 से 25 प्रतिशत तक ही हो सकी है, और जो थोड़ी-बहुत उपज हुई है वह भी बाजार में बिक नहीं पा रही। किसानों ने महाराष्ट्र सरकार से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की है।

फसल बागों में पड़ी, खरीदार नदारद

कोंकण क्षेत्र, विशेषकर रायगढ़ के दक्षिणी हिस्से में बड़ी संख्या में आम उत्पादक किसान अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह इसी फसल पर निर्भर हैं। इस बार किसानों ने बड़ी मशक्कत से आम तोड़े, लेकिन अब वे बागों में ही सड़ रहे हैं। वाशी एपीएमसी मंडी जाने वाले व्यापारी और बिचौलिए खरीद से मुंह मोड़ रहे हैं, जिससे किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही।

दलालों और व्यापारियों द्वारा खरीद बंद कर देने से बाजार में मांग लगभग शून्य हो गई है। किसान अपनी उपज बेचने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन कोई खरीदार नहीं मिल रहा।

पश्चिम एशिया युद्ध से निर्यात ठप, दोहरी मार

स्थिति को और विकट बनाने में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का बड़ा योगदान है। निर्यात के लिए तैयार आम के कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे पड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घटने से व्यापारियों ने स्थानीय स्तर पर भी खरीद कम कर दी है, जिसका सीधा बोझ किसानों पर पड़ रहा है।

एक आम उत्पादक किसान ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए बताया, हम केवल आम की खेती करते हैं, लेकिन इस बार मौसम की मार ने सब बर्बाद कर दिया। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान हुआ है। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आम बाहर नहीं जा रहा और भारत में भी लोग कम खरीद रहे हैं।

अप्रैल में ही बारिश — आम की फसल के लिए सबसे घातक

किसानों के अनुसार, अप्रैल माह में ही मानसून जैसी बारिश शुरू हो जाना आम की फसल के लिए सबसे अधिक नुकसानदायक है। इस दौरान फल पकने की प्रक्रिया में होता है और बारिश से फल झड़ जाते हैं या सड़ने लगते हैं। एक बार की बारिश में ही पूरी मेहनत बर्बाद हो जाती है।

किसान ने आगे कहा, सरकार से हम गुहार लगाते हैं कि हमारी मदद की जाए, वरना इस साल हम पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। किसानों का कहना है कि अगर समय पर राहत नहीं मिली तो कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे।

गहरा आर्थिक संकट और सरकार से राहत की पुकार

इस साल आम उत्पादन में 75 से 80 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। जो किसान सालभर इसी फसल पर निर्भर रहते हैं, उनके सामने अब परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने महाराष्ट्र सरकार से फसल बीमा के त्वरित निपटान, विशेष मुआवजा पैकेज और सरकारी खरीद केंद्र खोलने की मांग की है।

गौरतलब है कि कोंकण का हापुस (अल्फांसो) आम देश-विदेश में अपनी खास पहचान रखता है और यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। अगर सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के किसान आम की खेती छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं, जो न केवल किसानों बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक नुकसान होगा।

Point of View

बल्कि एक व्यापक नीतिगत विफलता की कहानी है। जब पश्चिम एशिया में युद्ध चल रहा था और निर्यात बाधित हो रहा था, तब सरकार को वैकल्पिक घरेलू बाजार और खरीद केंद्र पहले से तैयार करने चाहिए थे। विडंबना यह है कि कोंकण का हापुस आम जीआई टैग प्राप्त और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है, फिर भी इसके उत्पादक किसान हर साल फसल बीमा और मुआवजे के लिए दर-दर भटकते हैं। फसल बीमा योजनाएं कागजों पर तो हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका लाभ किसानों तक पहुंचना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

रायगढ़ में आम की फसल को नुकसान क्यों हुआ?
रायगढ़ में अप्रैल 2025 में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने आम की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया। इससे इस साल केवल 20 से 25 प्रतिशत तक ही उत्पादन हो सका।
पश्चिम एशिया युद्ध का आम किसानों पर क्या असर पड़ा?
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत से आम का निर्यात ठप हो गया और कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे हैं। इससे व्यापारियों ने स्थानीय खरीद भी कम कर दी, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
किसानों ने सरकार से क्या मांगें की हैं?
किसानों ने महाराष्ट्र सरकार से तत्काल मुआवजा, फसल बीमा का त्वरित निपटान और सरकारी खरीद केंद्र खोलने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना सरकारी मदद के इस साल गुजारा करना मुश्किल होगा।
रायगढ़ में आम की खेती कितनी महत्वपूर्ण है?
रायगढ़ कोंकण क्षेत्र में स्थित है जो अपने हापुस (अल्फांसो) आम के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहां के बड़ी संख्या में किसान पूरी तरह आम की खेती पर ही अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं।
वाशी एपीएमसी मंडी में आम क्यों नहीं बिक रहा?
वाशी एपीएमसी मंडी में व्यापारी और बिचौलिए निर्यात ठप होने और घरेलू मांग कम होने के कारण आम खरीदने से बच रहे हैं। इससे किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही और आम बागों में ही पड़ा सड़ रहा है।
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