लखपति दीदी योजना: सुकमा की सविता ने किराना दुकान से कमाए सालाना 2 लाख, बनीं आत्मनिर्भरता की प्रेरणा
सारांश
Key Takeaways
- करतम सविता, सुकमा जिले के ग्राम पोलमपल्ली निवासी, ने 'लखपति दीदी' अभियान से जुड़कर दिहाड़ी मजदूरी छोड़ी और उद्यमिता अपनाई।
- 'प्रिया स्व-सहायता समूह' से प्राप्त 60,000 रुपए के ऋण से उन्होंने 'कृति किराना स्टोर' की स्थापना की।
- सविता अब सालाना 1 से 2 लाख रुपए की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं और गांव में सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जाती हैं।
- सुकमा जिले में चार 'सेवा एक्सप्रेस' वाहनों के जरिए दूरस्थ महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जा रहा है।
- जिले में अब तक लगभग साढ़े पांच हजार महिलाएं 'लखपति दीदी' के रूप में आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
- यह कार्यक्रम जिला सीईओ मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन और जिला कलेक्टर अमित कुमार की निगरानी में संचालित हो रहा है।
सुकमा, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत नियद नेल्लानार ग्राम पोलमपल्ली निवासी करतम सविता ने 'लखपति दीदी' अभियान और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से दिहाड़ी मजदूरी की जिंदगी को पीछे छोड़ते हुए एक सफल महिला उद्यमी के रूप में नई पहचान बनाई है। 60 हजार रुपए के स्व-सहायता समूह ऋण से शुरू की गई उनकी 'कृति किराना स्टोर' आज उनके परिवार को सालाना 1 से 2 लाख रुपए की शुद्ध आय दे रही है।
दिहाड़ी मजदूरी से उद्यमिता तक का सफर
सविता ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि कुछ समय पहले तक उनका पूरा परिवार दिहाड़ी मजदूरी और छुटपुट कामों पर निर्भर था। इससे घर की आर्थिक स्थिति हमेशा अनिश्चित बनी रहती थी। रोज की कमाई पर टिका जीवन न तो बच्चों की पढ़ाई को सुरक्षित कर पाता था, न ही भविष्य की कोई ठोस योजना बन पाती थी।
बदलाव की शुरुआत हुई जब सविता 'प्रिया स्व-सहायता समूह' से जुड़ीं। इस समूह के माध्यम से उन्हें 60,000 रुपए का ऋण मिला, जिसे उन्होंने अपने गांव में 'कृति किराना स्टोर' खोलने में लगाया। यह छोटी-सी शुरुआत आज उनके परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी है।
सालाना 2 लाख तक की आय, परिवार में खुशहाली
सविता आज अपनी किराना दुकान से सालाना 1 से 2 लाख रुपए तक की शुद्ध आय कमा रही हैं। यह आय न केवल परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी कर रही है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दे रही है। सविता बताती हैं कि अब उन्हें रोजगार के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता — दुकान से नियमित आमदनी होती है, जिससे घर में स्थिरता और सुकून आया है।
दुकान के संचालन में परिवार के अन्य सदस्य भी हाथ बंटाते हैं। इससे बच्चों की शिक्षा और भविष्य की राह भी सुरक्षित हो रही है। गांव में सविता की पहचान अब एक सफल महिला उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी है, जो आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
जिला प्रशासन का प्रयास: 5,500 से अधिक लखपति दीदियां
जिला कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और 'लखपति दीदी' अभियान के तहत जिले में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की मुहिम तेज गति से चल रही है। जिला सीईओ मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है।
नवाचार के तहत जिले में चार 'सेवा एक्सप्रेस' वाहन संचालित किए जा रहे हैं, जो सुदूर गांवों की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने का काम करते हैं। इन प्रयासों के फलस्वरूप अब तक जिले में लगभग साढ़े पांच हजार महिलाओं को 'लखपति दीदी' के रूप में आत्मनिर्भर बनाया जा चुका है।
व्यापक संदर्भ: नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलाव की बड़ी तस्वीर
यह उल्लेखनीय है कि सुकमा जिला देश के उन क्षेत्रों में शामिल है जो लंबे समय से नक्सल हिंसा और आर्थिक पिछड़ेपन से जूझते रहे हैं। ऐसे संवेदनशील इलाके में ग्रामीण महिलाओं का स्वरोजगार की ओर बढ़ना केवल एक आर्थिक परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी संकेत है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं, तो वे परिवार और समाज दोनों स्तरों पर निर्णय लेने में सक्षम बनती हैं।
केंद्र सरकार की 'लखपति दीदी' योजना का लक्ष्य देशभर में 3 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है। सविता जैसी महिलाओं की सफलता इस दावे को जमीनी हकीकत में बदलती दिखती है।
सविता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार जताते हुए कहा कि इन योजनाओं ने उनके जैसी ग्रामीण महिलाओं के सपनों को उड़ान देने का काम किया है। आने वाले समय में जिला प्रशासन का लक्ष्य और अधिक महिलाओं को इस अभियान से जोड़कर सुकमा को महिला उद्यमिता का एक मॉडल जिला बनाना है।