खाद्य संकट: अफगानिस्तान दुनिया में पांचवां सबसे भूखा देश, 1.74 करोड़ लोग प्रभावित
सारांश
Key Takeaways
- ग्लोबल फूड क्राइसिस 2026 रिपोर्ट में अफगानिस्तान को दुनिया का पांचवां सबसे भूख प्रभावित देश बताया गया है।
- देश में 1.74 करोड़ लोग (36%25 आबादी) गंभीर खाद्य संकट में हैं, जिनमें 47 लाख आपातकालीन स्थिति में हैं।
- कांगो, नाइजीरिया, सूडान और यमन अफगानिस्तान से ऊपर सबसे प्रभावित देशों में शामिल हैं।
- 2025 में विश्वभर में 47 देशों के 26.6 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे थे — यह 2016 से दोगुना है।
- WFP ने 4 मार्च को चेताया था कि अफगानिस्तान में कुपोषण बढ़ रहा है और पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव संकट को और गहरा कर रहा है।
- युद्ध, सूखा, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी इस मानवीय संकट के प्रमुख कारण हैं।
काबुल, 26 अप्रैल। ग्लोबल फूड क्राइसिस 2026 रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान दुनिया के सबसे गंभीर खाद्य संकट से जूझ रहे देशों में पांचवें स्थान पर है। देश की 36 प्रतिशत आबादी यानी करीब 1.74 करोड़ लोग भीषण खाद्य असुरक्षा की चपेट में हैं। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों, यूरोपीय संघ और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों ने मिलकर यह रिपोर्ट जारी की है।
रिपोर्ट के प्रमुख तथ्य
1.74 करोड़ अफगान नागरिकों में से 47 लाख लोग ऐसी अत्यंत गंभीर स्थिति में हैं जिसे आपातकाल या लगभग अकाल की श्रेणी में रखा जा सकता है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि अफगानिस्तान में भूख केवल एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि एक मानवीय आपदा बन चुकी है।
इस रिपोर्ट में अफगानिस्तान से ऊपर जिन देशों की स्थिति और भी बदतर बताई गई है, उनमें कांगो, नाइजीरिया, सूडान और यमन शामिल हैं। यह रिपोर्ट अफगान समाचार एजेंसी खामा प्रेस ने प्रकाशित की।
वैश्विक खाद्य संकट की भयावह तस्वीर
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनियाभर के 47 देशों के लगभग 26.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे। यह संख्या 2016 की तुलना में लगभग दोगुनी हो चुकी है।
रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भूख अब कोई अस्थायी या मौसमी समस्या नहीं रही, बल्कि यह एक स्थायी और लगातार गहराती वैश्विक चुनौती बन चुकी है। युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन इस संकट के तीन प्रमुख कारण हैं।
अफगानिस्तान में संकट के कारण
लगातार आर्थिक गिरावट, बेरोजगारी, सूखा और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी ने अफगानिस्तान के मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। लाखों परिवार अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए पूरी तरह बाहरी खाद्य सहायता पर निर्भर हो गए हैं।
गौरतलब है कि 4 मार्च को वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) ने भी चेतावनी दी थी कि अफगानिस्तान दुनिया के सबसे गंभीर भूख संकटों में से एक झेल रहा है। WFP ने बताया था कि देश में कुपोषण तेजी से बढ़ रहा है और हजारों बच्चे जानलेवा खतरे में हैं।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव से और बिगड़े हालात
WFP ने यह भी कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण सीमावर्ती कमजोर समुदायों को स्वास्थ्य सेवाओं और राहत सामग्री तक पहुंचने में भारी कठिनाई हो रही है। एजेंसी ने आगाह किया कि यदि यह तनाव जारी रहा तो पहले से ही संकटग्रस्त परिवारों की स्थिति और भी विकट हो जाएगी।
सहायता संगठनों का कहना है कि यदि अफगानिस्तान को निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहायता और पहुंच नहीं मिली, तो इसका दीर्घकालिक असर बच्चों के स्वास्थ्य, आजीविका और देश की समग्र स्थिरता पर पड़ेगा।
विश्लेषण: विरोधाभास और गहरा सच
यह विडंबना ही है कि तालिबान शासन के बाद से अफगानिस्तान को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय विकास सहायता लगभग ठप हो गई, जबकि मानवीय जरूरतें कई गुना बढ़ गई हैं। जो देश कभी कृषि में आत्मनिर्भर था, वह आज दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सहायता प्राप्तकर्ताओं में शामिल है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो यमन और सूडान जैसे देशों में सक्रिय युद्ध के बावजूद अफगानिस्तान की स्थिति उनसे बेहतर मानी जा रही है — लेकिन यह 'बेहतर' भी लाखों लोगों के लिए जीवन-मृत्यु का प्रश्न है।
आने वाले महीनों में यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ठोस कदम नहीं उठाए और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा तनाव कम नहीं हुआ, तो अफगानिस्तान की रैंकिंग और ऊपर जा सकती है — जो मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी होगी।