भुखमरी की मार: पाकिस्तान दुनिया के टॉप 10 खाद्य संकट वाले देशों में शामिल, 1.1 करोड़ लोग प्रभावित
सारांश
Key Takeaways
- संयुक्त राष्ट्र की 2026 ग्लोबल फूड क्राइसिस रिपोर्ट ने पाकिस्तान को दुनिया के शीर्ष 10 खाद्य संकट देशों में शामिल किया।
- पाकिस्तान में 1.1 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा में हैं, जिनमें 17 लाख आपातकालीन स्थिति में हैं।
- 2025 में भारी बाढ़ ने 60 लाख से अधिक पाकिस्तानियों को प्रभावित कर फसलें और बुनियादी ढांचा नष्ट किया।
- बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा को रिपोर्ट में सर्वाधिक कुपोषण-प्रभावित क्षेत्र बताया गया।
- विश्लेषण का दायरा 43 से बढ़ाकर 68 जिले किया गया, जिससे 1.4 करोड़ अतिरिक्त लोग दायरे में आए।
- 2026 में पाकिस्तान में महंगाई 6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान, जिससे खाद्य संकट और गहरा होने की आशंका।
इस्लामाबाद, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र की 2026 की ग्लोबल फूड क्राइसिस रिपोर्ट में पाकिस्तान को दुनिया के उन शीर्ष 10 देशों में शामिल किया गया है जहां खाद्य असुरक्षा की स्थिति सर्वाधिक गंभीर है। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में पाकिस्तान में करीब 1.1 करोड़ (11 मिलियन) लोग भयावह खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने इस रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी साझा की है।
किन देशों के साथ पाकिस्तान की गिनती
रिपोर्ट में पाकिस्तान को अफगानिस्तान, बांग्लादेश, कांगो, म्यांमार, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया और यमन जैसे युद्धग्रस्त और अत्यंत गरीब देशों के साथ रखा गया है। यह वर्गीकरण इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि इस सूची में शामिल अधिकांश देश या तो गृहयुद्ध की चपेट में हैं या दशकों से आर्थिक बर्बादी झेल रहे हैं। पाकिस्तान का इस सूची में आना उसकी बिगड़ती आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
संकट की गहराई: आंकड़े क्या कहते हैं
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित 1.1 करोड़ लोगों में से 93 लाख (9.3 मिलियन) लोग 'संकट' श्रेणी में हैं, जबकि 17 लाख (1.7 मिलियन) लोग 'आपातकाल' श्रेणी में आते हैं। एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC) प्रणाली के तहत 'आपातकाल' श्रेणी अकाल के ठीक पहले की सबसे गंभीर स्थिति मानी जाती है। इसका अर्थ है कि लाखों पाकिस्तानी नागरिक अकाल की कगार पर खड़े हैं।
विश्लेषण का दायरा 2024 में 43 ग्रामीण जिलों से बढ़ाकर 2025 में 68 जिलों तक कर दिया गया। इसके चलते विश्लेषण में शामिल पाकिस्तान की कुल आबादी का हिस्सा 16 प्रतिशत से बढ़कर 21 प्रतिशत हो गया और 1.4 करोड़ से अधिक अतिरिक्त लोग इस दायरे में जुड़ गए।
बाढ़ और मौसम की मार ने बढ़ाया संकट
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि खराब मौसम पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा का एक स्थायी कारण बन चुका है। 2025 में भारी मानसून बारिश और अचानक आई बाढ़ ने 60 लाख (6 मिलियन) से अधिक लोगों को प्रभावित किया, जिससे फसलें और बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ। गौरतलब है कि 2022 की विनाशकारी बाढ़ में पाकिस्तान की एक-तिहाई भूमि जलमग्न हो गई थी, जिसका असर अब भी खेती और ग्रामीण आजीविका पर बना हुआ है।
कुपोषण के हॉटस्पॉट: बलूचिस्तान, सिंध और KPK
रिपोर्ट के पोषण विश्लेषण में बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) को सर्वाधिक चिंताजनक क्षेत्र बताया गया है। इन इलाकों में खान-पान की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच, स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की गंभीर कमी है। हालांकि, 2025 के लिए पाकिस्तान के पास पर्याप्त ताजा डेटा न होने के कारण इसे 'कोई गंभीरता डेटा उपलब्ध नहीं' वाली श्रेणी में रखा गया है।
आर्थिक दबाव और भविष्य की चुनौती
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में पाकिस्तान में महंगाई दर 6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जो पहले से कमजोर खाद्य व्यवस्था पर और अधिक दबाव डालेगी। यह उस देश के लिए और भी गंभीर है जो पहले से IMF के बेलआउट पैकेज पर निर्भर है और जहां विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दबाव में रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान में संरचनात्मक कृषि सुधार और जलवायु अनुकूलन नीतियां लागू नहीं होतीं, यह संकट और गहरा होता जाएगा।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाती हैं, विशेष रूप से 2025-26 के मानसून सीजन से पहले।