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यूएन रिपोर्ट: 13 देशों में 26.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में, सूडान-फिलिस्तीन सबसे खतरनाक

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यूएन रिपोर्ट: 13 देशों में 26.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में, सूडान-फिलिस्तीन सबसे खतरनाक

सारांश

FAO और WFP की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के 13 देशों में 26.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में हैं और जून-नवंबर 2026 के बीच हालात और बिगड़ेंगे। 2022 से 2025 के बीच मानवीय फंडिंग में 59% की गिरावट ने संकट को और गहरा किया है।

मुख्य बातें

FAO और WFP ने 18 जून 2026 को चेतावनी दी कि 13 देशों में गंभीर खाद्य असुरक्षा जून-नवंबर 2026 के बीच और बिगड़ेगी।
इन देशों में लगभग 26.6 करोड़ लोग पहले से ही भीषण खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं।
सूडान, दक्षिण सूडान, यमन और फिलिस्तीन अतिगंभीर श्रेणी में; नाइजीरिया के बोर्नो राज्य में अकाल जैसी स्थिति का खतरा।
13 में से 12 हॉटस्पॉट में सशस्त्र संघर्ष और हिंसा खाद्य संकट की मुख्य वजह।
2022-2025 के बीच मानवीय खाद्य सहायता की फंडिंग में 59% की गिरावट, स्तर एक दशक के निम्नतम पर।
म्यांमार, माली और मेडागास्कर भी हंगर हॉटस्पॉट की सूची में शामिल।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने 18 जून 2026 को एक कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जून से नवंबर 2026 के बीच दुनिया के 13 देशों में गंभीर खाद्य असुरक्षा की स्थिति और अधिक विकराल होने की आशंका है। इन देशों में पहले से ही लगभग 26.6 करोड़ लोग भीषण खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं।

सबसे गंभीर हॉटस्पॉट कौन से हैं

खाद्य संकट के खिलाफ वैश्विक नेटवर्क (GNAFC) के माध्यम से साल में दो बार प्रकाशित होने वाली 'हंगर हॉटस्पॉट्स' रिपोर्ट के ताज़ा संस्करण में सूडान, दक्षिण सूडान, यमन और फिलिस्तीन को भूख की गंभीरता और व्यापकता के आधार पर दुनिया के सर्वाधिक संकटग्रस्त क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्रों में स्थिति पहले से ही आपातकालीन स्तर पर है।

अतिगंभीर श्रेणी में नाइजीरिया और सोमालिया भी शामिल हैं। नाइजीरिया के बोर्नो राज्य के कुछ इलाकों में आने वाले महीनों में खाद्य असुरक्षा की विनाशकारी स्थिति उत्पन्न होने का अनुमान है, जहाँ भुखमरी, अत्यधिक गरीबी और गंभीर कुपोषण स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। वहीं सोमालिया के बुरहाकाबा जिले की आबादी अकाल के गंभीर खतरे के कगार पर बताई जा रही है।

संकट की मुख्य वजहें

रिपोर्ट में बताया गया है कि इन 13 में से 12 हॉटस्पॉट में सशस्त्र संघर्ष और हिंसा खाद्य संकट की प्रमुख कारण बनी हुई है। इसके अलावा आर्थिक झटके, मानवीय सहायता के लिए फंडिंग में भारी कमी और अनुमानित एल नीनो घटना से जुड़े जलवायु खतरे — जैसे असमान वर्षा, सूखा और बाढ़ — इस संकट को और गहरा कर रहे हैं।

गौरतलब है कि 2022 से 2025 के बीच संकटग्रस्त क्षेत्रों में खाद्य सहायता, आपातकालीन कृषि समर्थन और पोषण राहत के लिए मिलने वाली फंडिंग में लगभग 59 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे वित्तीय सहायता का स्तर करीब एक दशक पहले के निम्नतम स्तर पर पहुँच गया है।

मध्य-पूर्व और डीआरसी की स्थिति

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और पूर्वी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के कुछ हिस्सों में इबोला के प्रकोप जैसी स्थितियाँ लोगों की आजीविका, बाज़ारों की कार्यप्रणाली और मानवीय सहायता तक पहुँच में नई बाधाएँ खड़ी कर रही हैं। DRC और हैती को गंभीर श्रेणी में रखा गया है, जबकि अफगानिस्तान भी इसी दायरे में है।

कौन से देश किस श्रेणी में

रिपोर्ट के अनुसार अतिगंभीर श्रेणी में सूडान, दक्षिण सूडान, यमन, नाइजीरिया, सोमालिया और फिलिस्तीन शामिल हैं। गंभीर श्रेणी में अफगानिस्तान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और हैती हैं। इसके अतिरिक्त म्यांमार, माली और मेडागास्कर पर भी 'हंगर हॉटस्पॉट' का खतरा मँडरा रहा है।

आगे क्या होगा

FAO और WFP ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल और पर्याप्त वित्तीय सहायता बहाल करने की अपील की है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बिना त्वरित हस्तक्षेप के नवंबर 2026 तक इन देशों में स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है, जिससे करोड़ों और लोग गंभीर भुखमरी की चपेट में आ सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ हथियारों की आपूर्ति जारी रहती है जबकि अनाज की सहायता घटती है। एल नीनो की चेतावनी पहले से मौजूद थी, फिर भी पूर्व-तैयारी नदारद है — यह प्रतिक्रियात्मक नीति-निर्माण का वही पुराना चक्र है जो हर बार संकट गहराने के बाद जागता है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन की 'हंगर हॉटस्पॉट्स' रिपोर्ट 2026 क्या है?
यह FAO और WFP द्वारा GNAFC के माध्यम से साल में दो बार जारी होने वाली रिपोर्ट है, जो दुनिया के उन देशों की पहचान करती है जहाँ गंभीर खाद्य असुरक्षा का सर्वाधिक खतरा है। ताज़ा संस्करण में 13 देशों को 'हंगर हॉटस्पॉट' घोषित किया गया है, जहाँ जून-नवंबर 2026 के बीच हालात और बिगड़ने की चेतावनी दी गई है।
इस संकट में सबसे ज़्यादा प्रभावित देश कौन से हैं?
सूडान, दक्षिण सूडान, यमन और फिलिस्तीन को अतिगंभीर श्रेणी में रखा गया है। नाइजीरिया के बोर्नो राज्य और सोमालिया के बुरहाकाबा जिले में अकाल जैसी स्थिति का खतरा बताया गया है। अफगानिस्तान, DRC और हैती गंभीर श्रेणी में हैं।
खाद्य संकट इतना गहरा क्यों हो रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार 13 में से 12 हॉटस्पॉट में सशस्त्र संघर्ष और हिंसा प्रमुख कारण है। इसके साथ ही 2022-2025 के बीच मानवीय फंडिंग में 59% की गिरावट, आर्थिक झटके और एल नीनो से जुड़े जलवायु खतरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
इस संकट से कितने लोग प्रभावित हैं?
रिपोर्ट के अनुसार इन प्रभावित देशों में गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे लोगों की संख्या बढ़कर लगभग 26.6 करोड़ हो गई है। फंडिंग में कमी और जारी संघर्षों के कारण यह संख्या नवंबर 2026 तक और बढ़ सकती है।
इस संकट को रोकने के लिए क्या किया जा सकता है?
FAO और WFP ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल वित्तीय सहायता बहाल करने की अपील की है। रिपोर्ट में संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय पहुँच सुनिश्चित करने और एल नीनो के असर को देखते हुए अग्रिम कृषि सहायता उपलब्ध कराने पर ज़ोर दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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