भरतपुर मेयर चुनाव: गहलोत का आरोप — निर्दलीय विचित्र सिंह को धमकाकर नामांकन वापस करवाया, BJP उम्मीदवार निर्विरोध
सारांश
मुख्य बातें
भरतपुर नगर निगम के मेयर चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार विचित्र सिंह द्वारा 18 सितंबर 2026 को अपना नामांकन वापस लिए जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इस कदम से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार अनुराधा सिंह के भरतपुर की मेयर पद पर निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने इस घटनाक्रम को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय' करार दिया है और आरोप लगाया है कि विचित्र सिंह को डरा-धमकाकर नामांकन वापस लेने पर मजबूर किया गया।
घटनाक्रम: क्या हुआ भरतपुर में
कथित तौर पर नामांकन वापसी से एक दिन पहले राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने विचित्र सिंह के साथ लगभग दो घंटे की बैठक की। रिपोर्टों के अनुसार, इसके बाद बेढम ने विचित्र सिंह के पति और भरतपुर के पूर्व मेयर शिव सिंह भोंट से भी मुलाकात की।
गहलोत ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने नामांकन वापस लेने से एक दिन पहले विचित्र सिंह को उनके व्यावसायिक परिसर में धमकाया था। उनके अनुसार, इसके बाद ही राज्य मंत्री बेढम उनसे मिले और नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी हुई।
कांग्रेस के आरोप: लोकतंत्र की हत्या
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी एक्स पर पोस्ट कर BJP और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार पर तीखा हमला बोला। डोटासरा ने आरोप लगाया कि भरतपुर में मतदाताओं द्वारा नकारे जाने के बाद BJP ने 'सत्ता और पुलिस मशीनरी के दुरुपयोग' से लोकतंत्र की हत्या की।
गौरतलब है कि कांग्रेस का दावा है कि विचित्र सिंह के पास पार्षदों का स्पष्ट संख्या बल था और उनका मेयर चुना जाना लगभग तय माना जा रहा था। डोटासरा ने यह भी कहा कि चुनावी जनादेश का सम्मान करने के बजाय मुख्यमंत्री ने एक सरकारी मंत्री को निर्दलीय उम्मीदवार पर दबाव बनाने के लिए भेजा।
BJP का पार्षद बल और विवाद की जड़
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, BJP भरतपुर नगर निगम की 65 पार्षद सीटों में से केवल 20 सीटें ही जीत पाई थी — यानी उसके पास बहुमत नहीं था। इसके बावजूद BJP उम्मीदवार के मेयर बनाने की कोशिशें की गईं, जिसे कांग्रेस जनादेश का अपमान बता रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार और विपक्षी कांग्रेस के बीच पहले से ही स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर तनाव बना हुआ था। भरतपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है, जो इस मामले को राजनीतिक रूप से और संवेदनशील बनाता है।
विचित्र सिंह का पक्ष
नामांकन वापस लेने के बाद विचित्र सिंह ने कहा कि वह भरतपुर के विकास में अहम भूमिका निभाना चाहती हैं और उन्होंने इसी मकसद से यह फैसला किया। हालांकि, उनके इस बयान को कांग्रेस ने पर्याप्त नहीं माना और पूछा कि वास्तव में किन परिस्थितियों में यह निर्णय लिया गया।
आगे क्या होगा
विचित्र सिंह के हटने के बाद अनुराधा सिंह भरतपुर मेयर पद की एकमात्र दावेदार बची हैं और उनका निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय है। कांग्रेस ने मांग की है कि BJP सरकार लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करे और नामांकन वापसी की परिस्थितियों की जाँच हो। यह विवाद राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े करता है।