झारखंड के 107 प्रखंडों में BDO-CO प्रभार विलय: BJP नेता रणधीर सिंह ने बताया जनविरोधी फैसला
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार के उस फैसले पर तीखा विरोध शुरू हो गया है, जिसमें 12 से कम पंचायत वाले 107 प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचल अधिकारी (CO) का प्रभार एक ही अधिकारी को सौंपने का निर्णय लिया गया है। पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता रणधीर सिंह ने 8 जुलाई को इस निर्णय को प्रशासनिक विफलता और जनविरोधी करार देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की माँग की है।
कैबिनेट का फैसला क्या है
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया कि 12 से कम पंचायत वाले 107 प्रखंडों और अंचलों में BDO और CO के अलग-अलग पद नहीं रहेंगे। इसके तहत 53 अंचलों में CO को BDO का अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा, जबकि 54 प्रखंडों में BDO, CO का कार्यभार भी संभालेंगे। सरकार का तर्क है कि इससे छोटे प्रखंडों में उपलब्ध मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
BJP का विरोध और आरोप
रणधीर सिंह ने कहा कि सरकार प्रशासनिक सुधार के नाम पर अधिकारियों की कमी को छिपाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, राज्य में पहले से ही म्यूटेशन (दाखिल-खारिज), जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र जैसी बुनियादी सरकारी सेवाओं के निस्तारण में महीनों लग जाते हैं। ऐसे में एक ही अधिकारी पर दोहरी जिम्मेदारी डालने से आम नागरिकों की परेशानियाँ और गहरी होंगी।
BJP नेता ने यह भी आशंका जताई कि विकास और राजस्व जैसे दो महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व एक ही व्यक्ति के पास होने से फाइलों का निष्पादन धीमा पड़ेगा और प्रखंड स्तर पर भ्रष्टाचार तथा बिचौलियों की भूमिका बढ़ने की आशंका है।
विपक्ष का वैकल्पिक सुझाव
रणधीर सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार के पास अधिकारियों की कमी है, तो इसका समाधान पदों का विलय नहीं, बल्कि रिक्त पदों पर नियुक्तियाँ करना है। उन्होंने तर्क दिया कि नई नियुक्तियों से एक ओर प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और दूसरी ओर राज्य के शिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवाओं की पहुँच पहले से ही सीमित मानी जाती है। गौरतलब है कि BDO विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की देखरेख करते हैं, जबकि CO भूमि अभिलेख और राजस्व मामलों का प्रबंधन करते हैं — दोनों की प्रकृति और कार्यभार एकदम अलग हैं। आलोचकों का कहना है कि इन दोनों भूमिकाओं को एक साथ निभाना किसी भी अधिकारी के लिए व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।
आगे क्या होगा
BJP ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की माँग की है। विपक्ष के दबाव के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हेमंत सोरेन सरकार इस फैसले पर कायम रहती है या संशोधन का रास्ता अपनाती है।