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ट्रंप ने एर्दोगन की सराहना की, तुर्की की एफ-35 कार्यक्रम में वापसी के दिए संकेत

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ट्रंप ने एर्दोगन की सराहना की, तुर्की की एफ-35 कार्यक्रम में वापसी के दिए संकेत

सारांश

ट्रंप ने अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन के बाद एर्दोगन को 'बहुत अच्छा सहयोगी' बताया और एफ-35 कार्यक्रम में तुर्की की वापसी के संकेत दिए — यह 2019 के निष्कासन के बाद सबसे स्पष्ट अमेरिकी संकेत है, जो मध्य-पूर्व संघर्ष में तुर्की के संयम की कीमत चुकाता दिख रहा है।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई 2026 को अंकारा में तुर्की की एफ-35 कार्यक्रम में वापसी के संकेत दिए।
ट्रंप ने एर्दोगन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने मध्य-पूर्व संघर्ष में भाग न लेकर संयम दिखाया।
तुर्की को 2019 में रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के कारण एफ-35 कार्यक्रम से बाहर किया गया था।
अमेरिका ने तुर्की पर सीएएटीएसए (CAATSA) कानून के तहत प्रतिबंध भी लगाए थे।
ट्रंप ने तुर्की को नाटो का दूसरा सबसे शक्तिशाली देश बताया और दोनों देशों के संबंधों को 'सबसे अच्छे' करार दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई 2026 को अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संकेत दिया कि उनका प्रशासन तुर्की को एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम में पुनः शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने हाल के मध्य-पूर्व संघर्ष से तुर्की को दूर रखकर संयम का परिचय दिया।

ट्रंप के बयान की मुख्य बातें

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, 'वे एफ-35 विमान के बारे में बात कर रहे हैं। यह सबसे बेहतरीन विमान है और हर कोई इसे चाहता है। हमें फैसला करना होगा कि हम इसे किसे देते हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एर्दोगन ने मध्य-पूर्व युद्ध में भाग न लेकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई — और यह निर्णय उनके कहने पर लिया गया।

ट्रंप ने कहा, 'एर्दोगन बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े प्रशंसक नहीं हैं और न ही वह इजरायल के बहुत बड़े समर्थक हैं। लेकिन उन्होंने उस युद्ध में हिस्सा नहीं लिया। वह आसानी से इसमें शामिल हो सकते थे, लेकिन मेरे कहने पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।'

अमेरिका-तुर्की संबंधों का मौजूदा दौर

ट्रंप ने एर्दोगन को 'बहुत अच्छा सहयोगी' बताया और कहा कि तुर्की नाटो का दूसरा सबसे शक्तिशाली देश है जिसकी सेना अत्यंत सक्षम है। उन्होंने कहा कि 5 नवंबर के चुनाव के बाद से दोनों देशों के संबंध उल्लेखनीय रूप से बेहतर हुए हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि जब 'स्लीपी जो बाइडेन' सत्ता में थे, तब तुर्की सहित कई देशों के साथ संबंध बिगड़ गए थे।

गौरतलब है कि इससे पहले उसी दिन नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ बैठक में भी ट्रंप ने एर्दोगन की तारीफ की थी और इजरायल के साथ तनाव के बावजूद उनके संयम को सराहा था।

एफ-35 विवाद की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब तुर्की 2019 से एफ-35 कार्यक्रम से बाहर है। अमेरिका ने तुर्की को इस कार्यक्रम से इसलिए निष्कासित किया था क्योंकि अंकारा ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था। वाशिंगटन का तर्क था कि एफ-35 जैसी संवेदनशील तकनीक और रूसी एस-400 का एक साथ संचालन विमान की सुरक्षा और तकनीकी गोपनीयता के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। इसके बाद अमेरिका ने सीएएटीएसए (CAATSA) कानून के तहत तुर्की पर प्रतिबंध भी लगाए थे।

तब से तुर्की लगातार एफ-35 कार्यक्रम में पुनः शामिल होने की माँग करता रहा है और इसे 'गलत फैसला' बताता रहा है।

आगे क्या होगा

ट्रंप के इस बयान को कूटनीतिक विश्लेषक एक महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं, हालाँकि कोई औपचारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है। एस-400 विवाद का समाधान हुए बिना एफ-35 की वापसी तकनीकी और कूटनीतिक रूप से जटिल बनी रहेगी। नाटो सहयोगियों की नज़रें अब वाशिंगटन और अंकारा के बीच आने वाले हफ्तों में होने वाली वार्ता पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित कूटनीतिक संकेत है — मध्य-पूर्व में संयम के बदले एफ-35 की पेशकश। लेकिन असली अड़चन एस-400 है: जब तक तुर्की रूसी रक्षा प्रणाली नहीं छोड़ता, तब तक एफ-35 की वापसी तकनीकी और कानूनी रूप से संभव नहीं दिखती। यह ऐसे समय में आया है जब नाटो की एकजुटता पहले से दबाव में है और ट्रंप सहयोगियों को लेनदेन की भाषा में देखते हैं। सवाल यह है कि क्या वाशिंगटन सीएएटीएसए प्रतिबंधों को दरकिनार करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएगा, या यह बयान भी उन कूटनीतिक गुब्बारों में शामिल हो जाएगा जो जल्द ही पिचक जाते हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने तुर्की को एफ-35 कार्यक्रम में वापस लाने के संकेत क्यों दिए?
ट्रंप ने कहा कि एर्दोगन ने हाल के मध्य-पूर्व संघर्ष में भाग न लेकर संयम दिखाया, और यह उनके कहने पर हुआ। इसी को आधार बनाकर उन्होंने एफ-35 कार्यक्रम में तुर्की की वापसी पर विचार का संकेत दिया।
तुर्की को एफ-35 कार्यक्रम से कब और क्यों बाहर किया गया था?
अमेरिका ने 2019 में तुर्की को एफ-35 कार्यक्रम से इसलिए निकाला था क्योंकि अंकारा ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था। अमेरिका का तर्क था कि एफ-35 की संवेदनशील तकनीक और एस-400 का एक साथ इस्तेमाल सुरक्षा के लिए खतरनाक है।
सीएएटीएसए (CAATSA) क्या है और इसका तुर्की से क्या संबंध है?
सीएएटीएसए अमेरिकी कानून है जो रूसी रक्षा उपकरण खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है। एस-400 खरीद के बाद अमेरिका ने इसी कानून के तहत तुर्की पर प्रतिबंध लगाए थे।
क्या तुर्की की एफ-35 में वापसी अभी तय है?
नहीं, अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। ट्रंप ने केवल झुकाव का संकेत दिया है। एस-400 विवाद के समाधान के बिना यह वापसी तकनीकी और कानूनी रूप से जटिल बनी रहेगी।
नाटो में तुर्की की क्या भूमिका है?
तुर्की नाटो का सदस्य है और ट्रंप के अनुसार यह गठबंधन का दूसरा सबसे शक्तिशाली देश है। अंकारा की भौगोलिक स्थिति और सैन्य क्षमता नाटो की रणनीति में उसे विशेष महत्व देती है।
राष्ट्र प्रेस
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