ट्रंप ने एर्दोगन की सराहना की, तुर्की की एफ-35 कार्यक्रम में वापसी के दिए संकेत
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई 2026 को अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संकेत दिया कि उनका प्रशासन तुर्की को एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम में पुनः शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने हाल के मध्य-पूर्व संघर्ष से तुर्की को दूर रखकर संयम का परिचय दिया।
ट्रंप के बयान की मुख्य बातें
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, 'वे एफ-35 विमान के बारे में बात कर रहे हैं। यह सबसे बेहतरीन विमान है और हर कोई इसे चाहता है। हमें फैसला करना होगा कि हम इसे किसे देते हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एर्दोगन ने मध्य-पूर्व युद्ध में भाग न लेकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई — और यह निर्णय उनके कहने पर लिया गया।
ट्रंप ने कहा, 'एर्दोगन बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े प्रशंसक नहीं हैं और न ही वह इजरायल के बहुत बड़े समर्थक हैं। लेकिन उन्होंने उस युद्ध में हिस्सा नहीं लिया। वह आसानी से इसमें शामिल हो सकते थे, लेकिन मेरे कहने पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।'
अमेरिका-तुर्की संबंधों का मौजूदा दौर
ट्रंप ने एर्दोगन को 'बहुत अच्छा सहयोगी' बताया और कहा कि तुर्की नाटो का दूसरा सबसे शक्तिशाली देश है जिसकी सेना अत्यंत सक्षम है। उन्होंने कहा कि 5 नवंबर के चुनाव के बाद से दोनों देशों के संबंध उल्लेखनीय रूप से बेहतर हुए हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि जब 'स्लीपी जो बाइडेन' सत्ता में थे, तब तुर्की सहित कई देशों के साथ संबंध बिगड़ गए थे।
गौरतलब है कि इससे पहले उसी दिन नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ बैठक में भी ट्रंप ने एर्दोगन की तारीफ की थी और इजरायल के साथ तनाव के बावजूद उनके संयम को सराहा था।
एफ-35 विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब तुर्की 2019 से एफ-35 कार्यक्रम से बाहर है। अमेरिका ने तुर्की को इस कार्यक्रम से इसलिए निष्कासित किया था क्योंकि अंकारा ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था। वाशिंगटन का तर्क था कि एफ-35 जैसी संवेदनशील तकनीक और रूसी एस-400 का एक साथ संचालन विमान की सुरक्षा और तकनीकी गोपनीयता के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। इसके बाद अमेरिका ने सीएएटीएसए (CAATSA) कानून के तहत तुर्की पर प्रतिबंध भी लगाए थे।
तब से तुर्की लगातार एफ-35 कार्यक्रम में पुनः शामिल होने की माँग करता रहा है और इसे 'गलत फैसला' बताता रहा है।
आगे क्या होगा
ट्रंप के इस बयान को कूटनीतिक विश्लेषक एक महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं, हालाँकि कोई औपचारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है। एस-400 विवाद का समाधान हुए बिना एफ-35 की वापसी तकनीकी और कूटनीतिक रूप से जटिल बनी रहेगी। नाटो सहयोगियों की नज़रें अब वाशिंगटन और अंकारा के बीच आने वाले हफ्तों में होने वाली वार्ता पर टिकी हैं।